जैन धर्म में भगवान का अलग स्वरुप

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** जैन धर्म की ऐतहासिकता के अलावा जैन धर्म के सिद्धांत,दर्शन के बारे में बहुत से लोग अनभिज्ञ हैंl जैन धर्म कर्मवाद-भाव पर अधिक ध्यान देता हैl संसार यानी भ्रमण करना और मुक्ति यानी इससे मुक्त होनाl मानव मोह के कारण संसार में घूमता हैl मोह रूपी सम्राट के २ सेनापति राग -द्वेष हैंl … Read more

देवत्व ही जीवन का सर्वोत्तम वरदान

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* असुरों से सभी घृणा करते हैं,क्योंकि उनकी भावनाओं में स्वार्थपरकता और भोग लालसा,इतनी प्रबल होती है कि वे इसके लिए दूसरों के अधिकार सुख और सुविधाएं छीन लेने में कुछ भी संकोच नहीं करते। उनके पास रहने वाले भी दुखी रहते हैं और व्यक्तिगत बुराइयों के कारण उनका निज़ जीवन तो … Read more

शिक्षा और न्याय में हिन्दी बेहद आवश्यक

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* सम्पूर्ण शिक्षा नीति का नवीनीकरण हो रहा है,किन्तु जब तक न्यायपालिका में हिन्दी भाषा का प्रयोग नहीं होता,तब तक सब शिक्षा व्यर्थ है। इस पर सशक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी को संज्ञान लेकर अहम भूमिका निभानी चाहिए,क्योंकि न्याय का रोना जन्म के साथ ही हो जाता है … Read more

अत्यधिक आकांक्षाओं से टूटते परिवार

डॉ.सत्यवान सौरभहिसार (हरियाणा)************************************ भौतिकवादी युग में एक-दूसरे की सुख-सुविधाओं की प्रतिस्पर्धा ने मन के रिश्तों को झुलसा दिया हैl कच्चे से पक्के होते घरों की ऊँची दीवारों ने आपसी वार्तालाप को लुप्त कर दिया हैl पत्थर होते हर आँगन में फ़ूट-कलह का नंगा नाच हो रहा हैl आपसी मतभेदों ने गहरे मन भेद कर दिए … Read more

हिन्दीःविश्व में प्रतिष्ठा,देश में उपेक्षा क्यों ?

ललित गर्गदिल्ली ****************************************************** हाल ही में एथनोलॉग द्वारा जारी प्रतिवेदन के अनुसार हिंदी विश्व में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा बन गई हैl वर्तमान में ६३७ मिलियन लोग हिंदी भाषा का उपयोग करते हैं। हिंदी भारत की राजभाषा है। सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व को समेट हिंदी अब विश्व में लगातार अपना फैलाव कर … Read more

हर ट्रेन की यही कहानी

तारकेश कुमार ओझाखड़गपुर(प. बंगाल ) ********************************************************** हम भारतीयों की किस्मत में ही शायद सही-सलामत यात्रा का योग ही नहीं लिखा है। किसी सफर में सब कुछ सामान्य नजर आए तो हैरानी होती है। कोरोना काल में उत्तर प्रदेश की मेरी वापसी यात्रा का अनुभव कुछ ऐसा ही रहा। कई मामलों में नए अनुभव के बावजूद … Read more

संयम से काम लें भाजपा और ममता

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************** पश्चिम बंगाल में भाजपा अध्यक्ष जगत नड्डा और भाजपा प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के काफिले पर जो हमला हुआ,उसमें ऐसा कुछ भी हो सकता था,जिसके कारण ममता बनर्जी की सरकार को भंग करने की नौबत भी आ सकती थी। यदि श्री नड्डा की कार सुरक्षित नहीं होती,तो यह हमला जानलेवा ही सिद्ध होता। … Read more

राजधर्म निभाए सरकार

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’बहादुरगढ़(हरियाणा)***************************************************** लोकतन्त्र में ऐसा भी होता है कि,प्रचण्ड बहुमत पाने के बाद सत्ताधारी दल का सर्वेसर्वा अपने को अजेय-विलक्षण समझने लगता हैl उसको लगता है कि मैं जो भी कर रहा हूँ,वह उचित ही हैl सब उसको मान ही लेंगे,नहीं तो मैं सत्ता के तंत्र से दबा कर उनके विरोध को अनसुना कर … Read more

बौद्ध धर्म और अहिंसा-एक विश्लेषण

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** सम्पूर्ण जगत में हमें अगर शांति स्थापित करनी है, या अमन-चैन कायम करना हो तो हिंसा से दूर रहकर अहिंसा का पालन कर सकते हैं। अहिंसा का सामान्य अर्थ है हिंसा न करना। इसका व्यापक अर्थ हैं-किसी भी प्राणी को तन,मन, कर्म वचन और वाणी से कोई नुकसान न पहुंचाना। मन में किसी … Read more

बढ़ती जनसंख्या-घटते संसाधन,नियंत्रण कानून बेहद जरुरी

अंकुर सिंहजौनपुर(उत्तर प्रदेश)*************************************************** जनसंख्या वृद्धि कहीं न कहीं हमें आने वाले समय में भयंकर दुष्परिणाम की तरफ ले जा रही है, इस पर हम आज सचेत नहीं हुए तो आने वाले समय में संसाधनों के लिए महायुद्ध जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है,क्योंकि दैनिक उपयोग के संसाधन जैसे-पेट्रोल,डीजल,पेयजल,निवास और खेती हेतु भू-भाग इत्यादि … Read more