संतुलित व प्रभावी लघुकथाकार, कहानीकार है सिद्धेश्वर-प्रो.(डॉ.)शरद खरे

मंडला(मप्र)। साहित्य की विविध विधाओं पर सिद्धेश्वर का एकल पाठ सुनने के बाद लगता है कि वे एक सधे और मंझे साहित्य सृजक हैं,जिनके पास एक विशिष्ट चिंतन व मौलिकता विद्यमान है। वे संतुलित व प्रभावी लघुकथाकार,कहानीकार हैं।मुख्य अतिथि और वरिष्ठ गीतकार-कथाकार प्रो.(डॉ.) शरद नारायण खरे ( म.प्र).ने ‘हैलो फेसबुक साहित्य सम्मेलन’ के अंतर्गत कहानीकार-कवि-चित्रकार … Read more

ईश स्वरूप माँ

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** मुझको तो माँ की गोदी में स्वर्ग दिखाई देता है,माँ का मधुरिम स्पर्श सभी मन की पीड़ा हर लेता है। सहनशील ममता की मूरत हृदय समुंदर है जिसका,करें समाहित हर पीड़ा अंतस विशाल कितना उसकाअपनी पीड़ा सदा छुपा सबकी पीड़ा हर लेती है,आँखों में उमड़ा दरिया आँखों में ही पी लेती … Read more

कान्हा कब होगा तेरा आना…?

आचार्य गोपाल जी ‘आजाद अकेला बरबीघा वाले’शेखपुरा(बिहार)********************************************* मधुबन में मुरली मीठी बजाना,यूँ गाय चराने नित दिन जाना।मित्र-मंडली में नित इठलाना,कान्हा अब कब होगा तेरा आना ? गोकुल-गलियों में‌ धूम मचाना,बाल सखा संग माखन खाना।यमुना तीर पर तेरा चीर चुराना,कान्हा अब कब होगा तेरा आना ? मकराकृत कुंडल अंग पीतांबर,मोर मुकुट मस्तक पर लगाना।नित गल बैजंती … Read more

पढ़ाई के साथ खेल भी आवश्यक

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** जब हम छोटे थे,तब दौड़ा-दौड़ी के बाद सबसे पहले लूडो खेलना शुरू किया जो आज भी उम्र के इस पड़ाव में उतने ही उत्साह से खेल लेते हैं। जब कुछ सयाने हुए तब कैरम खेलने लग गए। कुछ और सयाने हुए,तब पांव से गेंद एक दूसरे की तरफ फेंकने लगे। जब … Read more

सोच के कदम बढ़ाना

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** अफगानिस्तान में मची हुई है आज तबाही भारी,तालिबानियों के आतंक से थर्राई दुनिया सारी। कितने ही अफगानी वहाँ से जान बचाकर भागे,किसी देश ने शरण नहीं दी उनके डर के आगे। ऐसा न हो इसी आड़ में ‘तालिबानी’ आ जाएँ,अपने आश्रयदाता को ही ये धोखा दे जाएँ। एक भूल के कारण ही … Read more

विलुप्त होता शिक्षक धर्म

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)*************************************** शिक्षा-ज्ञान एक ऐसा दीपक है,जिसके द्वारा कभी अन्धकार नहीं मिलता या होता है। ज्ञान रुपी प्रकाश से अज्ञानता विलीन होती है। शिक्षा या ज्ञान का महत्व हर युग में बहुत रहा है,इसलिए ज्ञान की देवी सरस्वस्ती पूज्यनीय हैं। पहले गुरुकुल में जाकर ज्ञान प्राप्त किया जाता था,चाहे सामान्य विद्यार्थी हो या राजकुमार हो। … Read more

तन्त्र-मन्त्र

डॉ.मधु आंधीवालअलीगढ़(उत्तर प्रदेश)**************************************** आज लाइब्रेरी से लौटने में शोभित को कुछ अधिक ही देर हो गई। सारे दोस्त रास्ते से ही अलग-अलग हो जाते थे। यूनिवर्सिटी से घर आने में बीच में काफी सुनसान रास्ता पड़ता था। बारिश का मौसम था,जैसे ही सब दोस्तों को छोड़ कर आगे बढ़ा,एक दम से बिजली कड़कड़ाने लगी और … Read more

कविताओं से प्रसारित किया श्रीकृष्ण के प्रेममयी संदेश को

इंदौर (म.प्र.)। जगदीश्वर श्रीकृष्ण का अद्भुत चरित्र प्रेम व परस्पर स्नेह का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसी कड़ी में साहित्यिक संस्था नई क़लम ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी विशेष काव्य गोष्ठी के माध्यम से श्रीकृष्ण के इसी प्रेममयी संदेश को अपनी कविताओं के माध्यम से प्रसारित करने का प्रयास किया।इस आयोजन में गज़लकार संजय जैन बैजा़र, आतिश इंदौरी,श्रुति … Read more

सम्पूर्ण व्यक्तित्व दर्शाया जगत को

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’बरेली(उत्तरप्रदेश)********************************* जन्माष्टमी विशेष….. करावास में जन्म लिया और कंस का नाश किया,भागवतगीता दिया उपदेश,कौरवों का भी विनाश किया।रच कर रासलीला भी तुम तो निच्छल प्रेम-प्रतीक बने-लेकर अवतार विष्णु द्वापर में सृष्टि नवविन्यास किया॥ बने गोवर्धनधारी वृंदावन को बचाया इंद्रवर्षा से,बन कर भी द्वारिकाधीश मिले सुदामा को हर्षा से।अखिल ब्रह्मांड आलोकित हुआ प्रेम व्यवस्था … Read more

कान्हा ले नया जन्म

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ उदयपुर(राजस्थान) *************************************** जन्माष्टमी विशेष….. कान्हा तेरी बंशी के सुर,कहाँ खो गए हैं,तेरे थिरकते कदम,जाने क्यूँ सो गए हैं। तेरे इंतजार में जीना मुश्किल हो गया है,मेरे आँसू,यमुना तट तक भिगो गए हैं। छोड कर गया था तू,बाल सखाओं को,बड़े हो गए,पर सभी सुदामा हो गए हैं। कंस को मारा पर बुराई का अंत … Read more