तपती धरती
डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** तपती धरती आज,सभी से कहती देखो। जल की प्यासी आज,तड़पती हूँ मैं देखोll जंगल-जंगल आग,धधकती चौतरफा है। धुआं आग के ताप,से प्राणी हांफ रहा हैll जल बिन धरती सूख,तड़पते सारे प्राणी। वृक्ष,वनस्पति,फूल,सिसकते पानी-पानीll अंबर ज्वाला बरस,धधकती ज्वाला धरती। नीर बिना भू तरस-तरस कर आज चटकतीll माटी का कण आज,कोसता है … Read more