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है कोई ऐसा मंत्र!

संजय जैन 
मुम्बई(महाराष्ट्र)

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न राम चाहिए,
न श्याम चाहिए।
हम लोगों को तो,
‘कोरोना’ से निजात चाहिए।
है कोई ऐसा मंत्र,
अब तांत्रिकों के पास!
जो इसका बीमारी का,
कर सके इलाज॥

भविष्यवाणी करने वालों,
कहाँ पर तुम सब सो गए।
क्या अब कोरोना के बारे में,
अपना मुँह खोलोगे।
या फिर से देशवासियों की,
भावनाओं से तुम खेलोगे।
और फिर से ग्रंथों की बातें,
तुम लोगों से बोलोगे॥

जब कहर ढा रही,
देश में ये बीमारी।
इसमें भी राजनीति,
तुम सब कर रहे हो।
अरे कुछ तो शर्म करो,
देशवासियों पर रहम करो।
क्या क्या नहीं दिया,
देश की जनता ने।
फिर भी उसी की,
भावनाओं से खेल रहे हो॥

परिचय–संजय जैन बीना (जिला सागर, मध्यप्रदेश) के रहने वाले हैं। वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं। आपकी जन्म तारीख १९ नवम्बर १९६५ और जन्मस्थल भी बीना ही है। करीब २५ साल से बम्बई में निजी संस्थान में व्यवसायिक प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। आपकी शिक्षा वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ ही निर्यात प्रबंधन की भी शैक्षणिक योग्यता है। संजय जैन को बचपन से ही लिखना-पढ़ने का बहुत शौक था,इसलिए लेखन में सक्रिय हैं। आपकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। अपनी लेखनी का कमाल कई मंचों पर भी दिखाने के करण कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इनको सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के एक प्रसिद्ध अखबार में ब्लॉग भी लिखते हैं। लिखने के शौक के कारण आप सामाजिक गतिविधियों और संस्थाओं में भी हमेशा सक्रिय हैं। लिखने का उद्देश्य मन का शौक और हिंदी को प्रचारित करना है।