नाट्य कार्यशाला में समझाई अभिनय की बारीकियाँ

शिलाँग(मेघालय)l संगीत नाटक अकादमी(नई दिल्ली) के सहयोग से डॉ. अकेलाभाई प्रोग्रेसिव फाउंडेशन(छाप,गोपालगंज) द्वारा सिसई स्थित मॉडर्न पब्लिक स्कूल में हिंदी नाट्य कार्यशाला का आयोजन फाउंडेशन के कार्यक्रम निदेशक जान मुहम्मद के संयोजन में किया गया। कार्यशाला के दौरान रंगमंच का इतिहास,वाचिक परम्परा,नाटक की उपयोगिता,रोजगार के अवसर,अभिनय,संवाद,लेखन,स्मरण शक्ति का प्रयोग,मंच व्यवस्था एवं रेडियो नाटक आदि विषयों … Read more

रच दे एक नयी महाभारत

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** अब सहनशीलता से परे है,चीन पाक की ये शरारतयूँ चुप बैठे रहना भी नहीं है,ये तो हमारी विरासत,कृष्ण की गीता सुनने का,अब वो समय खत्म हुआउठ अर्जुन तू धनुष उठा,रच दे एक नयी महाभारत। शांति-भाइचारे को दुश्मन समझ बैठे जब कायरताबुझा राख में छुपी चिंगारी की,आग लगाने की आदत,जो बीत गया … Read more

सलामत मुस्कान रखना

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)**************************************************** सलामत होंठ पर मुस्कान रखना,सफर में ना बहुत सामान रखना।सदा जीवन रहे,सुखमय तुम्हारा- नहीं दिल में बहुत अरमान रखना॥ परिचय- शिवेन्द्र मिश्र का साहित्यिक उपनाम ‘शिव’ है। १० अप्रैल १९८९ को सीतापुर(उप्र)में जन्मे शिवेन्द्र मिश्र का स्थाई व वर्तमान बसेरा मैगलगंज (खीरी,उप्र)में है। इन्हें हिन्दी व अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है। जिला-लखीमपुर … Read more

नव चिंतन,संस्कारों और मूल्यों की ‘स्वप्निल हकीकत’

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** काव्य जहां हमारी भावनाओं को अभिव्यक्ति देता है,तो दूसरी और वह हमारी चेतना को भी झकझोरता है,तथा सामाजिक विषमताओं पर भी आघात करता है। कविताएं जहां एक ओर हमें कोमलता का अहसास कराती हैं,वहीं हमें जीने की कला भी सिखाती है,और अगर कहीं सृजक ‘प्रीति भारती’ जैसी युवा ऊर्जस्वी हो,तो … Read more

शिव शंभू के रूप अनेक

नताशा गिरी  ‘शिखा’ मुंबई(महाराष्ट्र)********************************************************************* इस धरा विराजमान पहला ज्योतिर्लिंग हूँ,चंद्रमा के श्राप में दक्ष का मैं क्रोध हूँ। मैं आदि हूँ,अनंत हूँ,प्रचंड हूँ,प्रकाल हूँ,बोलो शिव शंभू या बोलो सोमनाथ हूँ। अश्वमेघ यज्ञ-सा श्री शैल विराजमान हूँ,कृष्णा नदी देख रहे कैलाश-सा महान हूँ। मैं अंत हूँ,आरंभ हूँ,मैं तन में हूँ,मैं कर्म में हूँ,रूप विकराल हूँ,बोलो मल्लिका अर्जुन … Read more

साहित्योदय ने कराया ‘माँ तुझे सलाम’ पर शानदार साहित्यिक कार्यकम

मधुपुर (झारखंड)। अंतर्राष्ट्रीय साहित्य-कला संगम साहित्योदय ने देश-विदेश के कवि-कवियित्रियों को ‘साहित्योदय माँ भारती’ सम्मान देने के साथ ही देशभक्ति पर आधारित ‘माँ तुझे सलाम’ कार्यक्रम कराया। इसमें राष्ट्रीय कवि अजय अंजाम ने अपनी शैली में चीन को मुँहतोड़ जवाब दिया।कार्यक्रम का सन्चालन कर रहे संस्थापक अध्यक्ष पंकज ‘प्रियम’ ने ‘बाँध क़फ़न सर चलते हम,पर … Read more

मन को लुभाए सावन

सूरज कुमार साहू ‘नील`भोपाल (मध्यप्रदेश)***************************************************************** बड़ी तेज बरस रही बारिश,पानी की छम-छम बूँद गिरेभर आँगन गया परछी गीली,अब तो पानी अँख मूँद गिरे। गीली मेड़ भर खेत गया,डम डोल हुआ पानी-पानीमन को लुभाए यह सावन,और करे कोई आना-कानी। जहाँ रखे पैर वह फिसल जाए,गिर कीचड़ में सन जाएमन की अभिलाषा मेरा प्रिय,इस मौसम में लूट … Read more

चीन तेरा कैसा रवैया

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************* कभी नीम-नीम,कभी शहद-शहद…चीन तेरा रवैया। चुभती है तुझको हमारी कामयाबी,मशीनी कलपुर्जे तू क्या…बाजूओं के दम को पहचान पाएगा। पड़ोसी होकर भी,तू कट्टर दुश्मन कहलाएगा…भाई-भाई के नारों से कब तक,तू बच पाएगा!उठी है जो कसक दिल में हमारे,इस बार मुद्दा आर-पार हो जाएगा। सतत चुभन और अकुलाहट को,अब न हम बर्दाश्त … Read more

उम्र का दौर

उषा शर्मा ‘मन’जयपुर (राजस्थान)**************************************************** गुजरते देखा आज उम्र को,जब पड़ी स्वयं पर नजर। उम्र खुद को खुद से जुदा कर,चेहरा-चेहरे से बिछुड़ गया किस कदर। बढ़ती उम्र जीवन के साथ ही,बीत चला जीवन का सफर। उम्र का हर इक दौर,धरता चला अपने समय पर। उम्र का नजरिया भी देखो,स्वयं से रुबरु होने में बीत जाती … Read more

अख़बार रद्दी कर गया विकास

संदीप सृजनउज्जैन (मध्यप्रदेश) ****************************************************** सुबह का अखबार शाम को रद्दी हो जाता है,यह तय है पर इस बार अखबार सुबह-सुबह ही रद्दी हो गया। ये चंदू भैया के जीवन में किसी हादसे से कम नहीं है। पूरे ४ रुपए का अखबार चंदू भैया को लेना पड़ रहा है। वो भी मजबूरी में,क्योंकि बचपन से ही चंदू … Read more