‘हिंदी’ है देश-प्रेम की भाषा

शंकर शरण  ************************************************************************ यह बात बार-बार साबित हो रही है कि जिन भारतीयों को पूरे देश से जुड़ाव-लगाव है वे तो हिंदी का महत्व समझते हैं,लेकिन जो राष्ट्रीय एकता के प्रति लापरवाह हैं,प्राय: वही हिंदी पर हीला-हवाला करते हैं। हमारे जो बुद्धिजीवी माओवादियों,अलगाववादियों, जिहादियों आदि से सहानुभूति रखते हैं,वे हिंदी का विरोध भी करते हैं। … Read more

लोकतंत्र `लोक-सुख` या `लोक-दुःख` का ?

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* देश के सामने हर दिन नयी-नयी समस्याएं खड़ी हो रही हैं,जो समस्याएं पहले से हैं,उनके समाधान की तरफ एक कदम भी आगे नहीं बढ़ रहे हैं,बल्कि दूर होते जा रहे हैं। रोज नई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं,कर रहे हैं। तब ऐसा लगता है कि पुरानी समस्याएं पृष्ठभूमि में चली गईं,पर … Read more

रिश्तों की गरिमा क्यों खो रही है ?

राजकुमार जैन ‘राजन’ आकोला (राजस्थान) ****************************************************** रिश्ते या सम्बन्ध भारतीय जीवन के केन्द्र में रहे हैं,और लोग उन्हीं को जीने में अपना जीवन मानते रहे हैं। रिश्तों का बंधन बड़ा सुहावना लगता है,और हमारा इतिहास,संस्कृति और संस्कार इस बात के गवाह हैं कि,हम रिश्तों के ख़ातिर सब-कुछ दांव पर लगा देते थे। एक जमाना था जब … Read more

दिवाली क्या गई,जीना हराम कर गई

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** दिवाली वैसे तो खुशी का त्योहार है,हर कोई चाहता है कि, उसके जीवन में दिवाली आए,पर कुछ लोगों को लगता है कि भगवान करे इस बार दिवाली नहीं आए,क्योंकि दिवाली आने के पहले ही उनको तनाव शुरू हो जाता है,और दिवाली के बाद तो उनका जीना हराम हो जाता है। … Read more

प्रकृति

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** चलते-चलते, दूर निकल गई इन वादियों में, खो गई… कितनी खूबसूरत है ये ज़मीं,ये आसमां, ये सारी प्रकृति…l   जाऊंगी कहां, पता नहीं आसमां झुक रहा है, शायद वहां तक मन में सवाल है, हजारों ख्याल है ये प्रकृति…l   रंग-बिरंगे फूल, हरी-भरी वादियां लम्बे ऊंचे पेड़, बतियाती ये डालियां ये … Read more

शिक्षा में रामायण और गीता जरुरी

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) ************************************************************** भौतिकवाद के युग में हम विकास की बुलंदियो को छू रहे हैं,और विश्व स्तर पर भौतिक विकास में चार चाँद लगा दिए हैं। तकनीकी के क्षेत्र में भी भारत विश्व स्तर पर अग्रणी है,लेकिन इतना होने पर भी मानव अशांत है। शांति का बीजारोपण कैसे हो, उसका साधन क्या है ? … Read more

आओ हास करें..

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** जीवन कितने दिन का ?,आओ हास करें। छोड़ उरों से रिपुता,मिलकर रास करेंll यमशाला है भू पर,भू पर इन्द्रपुरी। क्या मिलता है किसको,उर में छिपी धुरीll विपदा में हो कोई,उसके घर जाकर। छांटें उसके शूल व,बांटे कुसुमाकरll उपजे कटुता कोई,उसका नास करें। जीवन कितने दिन का ?,आओ हास करेंll राघव … Read more

गुरु नानकदेव

सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’ कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** थे गुरु नानकदेव जी,युग के पुरुष महान। की जिनने संसार को,संस्कृति नई प्रदानll कहते नानकदेव जी,परम पुरुष है एक। उसकी इच्छा में चलें,छोड़ सभी उद्रेकll एकमात्र कवि संत हैं,नानकदेव महान। निन्दा तज जिनने किया नारी का गुणगानll सब जीवों को आत्मवत,देते आदर प्यार। अहं-शून्य होकर रहे,नानक इस संसारll किसी जाति … Read more

जीवन जंग है

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** यह जीवन तो एक जंग है, यहाँ बदलता सबका रंग है सभी कहते,ओ शरीफ़ हैं, व्यवहार से,जमाना दंग है यह जीवन तो एक जंग है, यह जीवन तो एक जंग है। शराफत से जीना भी जंग है, गिरगिट-सा सबका रंग है शरीफ़ों को सब तड़पाते हैं, सच्चाई के नहीं कोई … Read more

जानना होगा

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  ********************************************************************************* भला क्या है बुरा क्या है, मुझे ये जानना होगा बुरी राहों पे चलने से भी, खुद को टालना होगा। सिखाती है हमें ये जिंदगी, जीने के तरीके सबक जीने का मुझको भी, इसी से सीखना होगा। गले मिलते हैं दुश्मन भी, मुखौटा पहन यारी का है कौन अपना … Read more