ख़ुद जीवन का रिपु मनुज

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** जीवन का रिपु मनुज,खड़े मौत आगाज। बिन मौसम छायी घटा,वायु प्रदूषित आजll भागमभागी जिंदगी,बढ़ते चाहत बोझ। सड़क सिसकती जिंदगी,वाहन बढ़ते रोज॥ चकाचौंध उद्यौगिकी,नभ में फैला धूम। जले पराली खेत में,मौत प्रदूषण चूम॥ चहुँदिक् है फैला तिमिर,भेद मिटा निशि रैन। नैन प्रदूषित जल रहा,सुप्त प्रशासन चैन॥ हृदय रोग बढ़ता … Read more

मेरा देश…मेरी पूजा…मेरा देव

डॉ.दिलीप गुप्ता घरघोड़ा(छत्तीसगढ़) ******************************************************** देश मेरा देव मेरा,साँस मेरी जान है…, नभ में लहराता तिरंगा,हिन्द का सम्मान है फहरता जब तक रहे,आज़ाद हिंदुस्तान है। तिरंगा हर भारतीय की जान है-अभिमान है, नभ में लहराता तिरंगा,हिन्द का सम्मान हैll हाथ में लेकर ध्वजा सीमा पे तन कर हैं खड़े, जां हथेली पर लिए,आंधी-तूफानों में…अड़े सम्मान माटी … Read more

कबीर का गहरा प्रभाव था डॉ. सीताराम ‘दीन’ की रचनाधर्मिता पर

जयंती पर साहित्य सम्मेलन में संगोष्ठी,कवियों ने दी भावपूर्ण काव्यांजलि……….. पटना(बिहार)। स्मृतिशेष कवि डॉ. सीताराम ‘दींन‘ पर फक्कड़ और अक्खड संतकवि सद्ग़ुरु कबीर का गहरा प्रभाव था। वे कबीर साहित्य के विद्वान मर्मज्ञ और बड़े अध्येता थे। यही कारण है कि उनके साहित्य में स्थान–स्थान पर कबीर का स्वर गुंजित होता दिखाई देता है। यह … Read more

भरा यदि है खून..

रणदीप याज्ञिक ‘रण’  उरई(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************** भरा है यदि खून तो, खौलना भी सीख लो खून को क्रोध में नहीं, पसीने में बहाना सीख लो। यदि गर्म हवा भी चलेगी, ठंडक का सुकून मलेगी तबियत से किताब तो खोलो यात्री, जीवन का सबक तुम्हें सिखला देगी। मान लिया अटूट भीड़ है, तुम्हारी लक्ष्य यात्रा में लेकिन … Read more

हम सबके मर्यादा पुरुषोत्तम राम

हेमेन्द्र क्षीरसागर बालाघाट(मध्यप्रदेश) *************************************************************** राम सत्य है,मर्यादा है,कर्म है,आदर्श है,अनुकरणीय,हर मन में विराजते और जगत के पालनहार हम सबके मर्यादा पुरुषोत्तम राम हैं। जानें, र का अर्थ है अग्नि,प्रकाश,तेज,प्रेम,गीत। रम (भ्वा आ रमते) राम (कर्त्री धन ण) सुहावना,आनंदप्रद,हर्षदायक,प्रिय,सुंदर,मनोहर। राम शब्द इतना व्यापक है कि साहित्य में परमात्मा के लिए इसके समकक्ष एक शब्द ही आता … Read more

धुंध की चादर

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* छायी धुंध की चादर, शहरों में घुटन ऐसी जन-जीवन का अभिशाप, उफ्फ कर रहा हर जंतु-जीवl प्रगति कहे मानव दोषी, मानव कहे प्रगति कारण कल कारखाने मोटर-कार, दो पहिया ट्रक ए.सी. अनेकl किसानों ने जलाई पिराली, तापमान हुआ असंतुलित घनत्व वायु का जो बढ़ा, उलझन ऐसी नमी के … Read more

आम लोगों के सपनों की उड़ान है निशा का `परवाज़`

वाराणसी(उत्तरप्रदेश)। शहर बनारस से गंगा-जमुनी तहज़ीब व इंसानी मोहब्बत की वरिष्ठ गज़लकार डॉ. नसीमा निशा के ग़ज़ल संग्रह परवाज़ का लोकार्पण गोलघर स्थित पराड़कर स्मृति भवन में काशी के विद्वत साहित्यिक परिवार के बीच हुआ। मुख्य अतिथि सम्पादक हीरालाल मिश्र ‘मधुकर’ ने कहा कि,परवाज़ का आसमान बहुत ऊंचा है और कलम में अक़ीदत को ज़िंदा … Read more

जीवन,जीवन ना रहा

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे मंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** दुनिया कैसी हो गई,कैसे हैं अब लोग। पूजा से सब दूर हैं,चाहें केवल भोग॥ सेवक बनकर घूमते,पर करते हैं राज। सेवा का कोई नहीं,करता है अब काज॥ सत्ता पाना हो गया,अब कितना आसान। पर ऑफिस में,भृत्य का,पद मुश्किल,यह जान॥ जो सच्चे,वो रो रहे,झूठों पर मुस्कान। नम्बर दो से ही … Read more

रोटी और मकान नहीं है

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** रोटी और मकान नहीं है, जीवन यह आसान नहीं है। खुद की बदहाली पर सोचो, रोता कौन किसान नहीं है। फुटपाथों पर सोने वाला, बोलो क्या इंसान नहीं है ? रोजी-रोटी ढूँढ रहा जो, वह कोई नादान नहीं है। चूल्हे में है आग भले पर, चावल और पिसान नहीं … Read more

जिंदगी इक संघर्ष

तृप्ति तोमर `तृष्णा` भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* जिंदगी का उपनाम है संघर्ष, इशारों पर नचाती जैसे सर्कस। जिंदगी का हर रुप है चुनौती, हर पहलू में नया रंग दिखलाती। कभी टूटती है जीवन की हर एक आस, तो अगले पल होता समर्पण का एहसास। है कभी खुशियों और मुश्किलों का शोर, न जाने ले जाएगी जिंदगी किस … Read more