मान-अपमान

वीना सक्सेना इंदौर(मध्यप्रदेश) *********************************************** “मम्मी जी खाना लग गया है,गरम-गरम खा लीजिएl” बहू ने आकर मालती जी को दोपहर के भोजन के लिए बुलाया। ऐं..l मालती जी को बड़ा आश्चर्य हुआ कि,आज उनकी बहू ने बगैर उनसे पूछे पूरा खाना बना लिया,थोड़ा-सा दुख भी कि,उनकी अहमियत अब परिवार में कम होती जा रही है। भारी … Read more

निगाहें

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** निगाहें ख़ंजर का भी काम करती है, जिधर उठती है कत्लेआम करती है। इन आँखों की गुस्ताखियां तो देखो- दिल की बातें भी सरेआम करती है। निगाहें मैख़ाने का भी काम करती है, मुहब्बत के पैमाने में जाम भरती है। डूबकर कभी इन आँखों में तो देखो- खुद आँखों … Read more

किस्मत का फसाना

आशीष प्रेम ‘शंकर’ मधुबनी(बिहार) ************************************************************************** जीवन की तड़-तड़ से हमने तराना सीख लिया, जैसे तड़ाग ने असालतन ही अणु जमाना सीख लियाl मैं सोच बैठा,कुछ न हो पाएगा अब, इतने में ही किसी बेजुबां से हमने नवल गढ़ाना सीख लिया। जैसे तरुवर ने स्वतः ही तड़ित से बचना सीख लिया, वैसे हमने भी आत्महित विकट … Read more

इंसानियत की ऊंची मिसाल

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** गुजरात में सावरकुंडला के एक मुस्लिम परिवार ने इंसानियत की बहुत ऊंची मिसाल कायम कर दी है। मियां भीखू करैशी और भानुशंकर पंडया,दोनों मजदूर थे। चालीस साल पहले एक ही जगह मजदूरी करते-करते दोनों की दोस्ती हो गई। पंडया ने शादी नहीं की। वे अकेले रहते थे। कई साल पहले … Read more

`हिंदी` हीरे-सी अनमोल

सुनीता बिश्नोलिया चित्रकूट(राजस्थान) ****************************************************** शब्दों की सरिता बहे,बोले मीठे बोल। हिंदी भाषा है रही कानों में रस घोलll पश्चिम के तूफान में,नहीं पड़ी कमजोर, हिंदी शब्दों की लहर,करती रही हिलोर, सोने-सी महँगी बड़ी,हीरे-सी अनमोल- इसे चुरा पाए नहीं,भारत आए चोरl सरस शब्द ही जान है,इनसे है पहचान, हिंदी की गाथा सकल,गाता सदा जहान, नव सृजन,नव … Read more

`हिन्दी` भाषा में `अंग्रेजी` के उपयोग से बचा जाए

नरेंद्र श्रीवास्तव गाडरवारा( मध्यप्रदेश) ***************************************************************** हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है और जन-जन की भाषा भी। हिन्दी हमारे राष्ट्र में विविध बोली जाने वाली भाषाओं में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह बेहद खुशी और गौरव की बात है कि वर्तमान में हिन्दी में इतना लेखन हो रहा है जो इसके पहले कभी नहीं लिखा गया। … Read more

राष्ट्र,राष्ट्रीयता और राष्ट्रभाषा हिन्दी

प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामी दिल्ली *************************************************************************** राष्ट्रभाषा को समझने से पहले राष्ट्र और राष्ट्रीयता शब्दों को समझना असमीचीन न होगा और राष्ट्र को समझने के लिए देश और जाति की अवधारणा को समझना आवश्यक है। राष्ट्र,राष्ट्रवाद तथा राष्ट्रीयता भी एक दूसरे में अंतर्ग्रंथित हैं,जो किसी देश की भाषा और संस्कृति को स्पष्ट करने में सहायक … Read more

बारिशों के डर से तू कब तक छुपेगी ?

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* आशिकी आवारगी की बहुत हो गई गुफ्तगू, खुद से भी तू उतनी ही कभी मोहब्बत कर तो लेl डाल मिट्टी संजीदगियों पर, खोल मुट्ठी दबी ख्वाहिशों कीl क्यों देख रही है किसी की रहमत, हो जा तू बस खुद से सहमतl कब तक रहेगी तुझमें बुलबुल की नजाकत, बारिशों के … Read more

माँ का आलिंगन

डॉ.आभा माथुर उन्नाव(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************************** हिन्दी मेरी माँ है, सुखदायक है आलिंगनl ज्यों माँ की गोद में आ कर, सन्तति पाती सुख अनुपमl भरपूर प्रयास किए और, साधा आंग्ल भाषा कोl पर वह सुख नहीं मिला जो, पाया हिन्दी को पा करl लिपि भी निर्दोष है इसकी, जो लिखना,वही बोलनाl क्या पा सकते हो यह … Read more

व्यस्त है हिंदी

अरुण कुमार पासवान ग्रेटर नोएडा(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************* मनुष्य की स्वाभाविक आदत है रोना, हँसने,गुस्साने,प्यार करने की ही तरह। इसीलिए,रोने का प्रयोजन हमेशा दु:ख-दर्द ही नहीं होता…। अतृप्ति कभी-कभी सकारात्मक भी होती है, गति बनी रहती है अतृप्ति से, विकास में निरन्तरता रहती है। सम्भवतः इसी लिए, देश-विदेशों में,चारों दिशाओं में फैलने के बाद भी, सिमटी दिखती … Read more