‘हिन्दी’ हमारी जीवनशैली एवं प्यारी माँ

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं,बल्कि यह हमारे अल्फाजों को समेट,हमारी बातों को सरलता एवं सुगमता से कहने का विशेष माध्यम है। हिन्दी बिल्कुल हमारी की तरह ही हमसे जुड़ाव रखती है और हम भी माँ हिन्दी के बिना अपने अस्तित्व की कभी कल्पना नहीं कर सकते,क्योंकि माँ के बिना बेटे की … Read more

मन ही मन मैं रो रहा

गोलू सिंह रोहतास(बिहार) ************************************************************** यह वासना का दलदल है, यह काया का मायाजाल है सुंदर चेहरे के पीछे बिछ रहा अब जंजाल है, अब हर तरफ बातें नहीं,बातों में वेश्यावृत्ति है भविष्य इसका उज्जवल है,घर-घर में यह कुरुति है, किस रिश्ते को लिखूं विस्तार कर शर्मशार खुद मैं हो रहा… ऐसी हालत देख माधव मन … Read more

रोला छंद विधान

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* साहित्य की पाठशाला …………. (रचना शिल्प:रोला छंद २४ मात्रिक छंद होता है। विषम चरणों में ११ मात्रा और चरणांत २१ से होता है। सम चरणों में १३ मात्रा और चरणांत २२ से होता है। समचरणांत में २२ का विकल्प:-११२,२११,११११ भी मान्य है। दो,दो सम चरणों में समतुकांत हो।) उदाहरण…. . तिरंगा … Read more

नसीब जग गया है उनका

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** नसीब जब जग गया है उनका बेखौफ हुए इस दुनिया के आगे, खुदा को भी भूल बैठे अब वो सजदे करवाते अपने ही आगे। वक्त के फेर थे उनकी किस्मत में या दुनियादारी समझ आयी उनको, भूले हैं सभी के सारे एहसानों को खाक भी नसीब में नहीं थी जिनको। … Read more

कोई अपना-सा हो दूर कहीं

अंतुलता वर्मा ‘अन्नू’  भोपाल (मध्यप्रदेश) ************************************************************ बस यूँ ही,जी करता है, कोई अपना-सा हो,दूर कहीं जो बंधा हो दिल की डोर से, जिसका न कोई छोर हो, बस एक मजबूत डोर हो…l जिसके दूर होने पर भी, मेरे चेहरे पर नूर हो जब उसका कहीं जिक्र हो, और धड़कनें तेज़ हों शोर भी संगीत लगे, … Read more

`सेक्शन ३७५` मर्जी या ज़बरदस्ती

इदरीस खत्री इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************* निर्देशक बहल ने इस फिल्म में जटिल विषय बलात्कार का सटीक चित्रण किया हैl #मुख्तसर चर्चा दोस्तों, सेक्शन ३७५ फिल्म का विषय बेहद संवेदनशील होने के साथ भावनात्मक भी हैl इंडियन पैनल कोड की यह धारा ३७५ लैंगिक अपराध के संदर्भ में ही रखी गई हैl यह एक वीभत्स अपराध है,जो … Read more

अंतरिक्ष है शान

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** सबसे आगे दौड़ में,हो नित धावक श्रान्त। शुरु मन्द धावन पथी,नित विजयी बन कान्तll हार-जीत संघर्ष नित,यात्रा जीवन राह। डटे रहे जो विघ्न पथ,अंत सफल हो चाहll चाह सतत नर आलसी,सोच विरत युवजोश। सीख बिना यायावरित,मद में हो बेहोशll रनिवासर इसरो जहाँ,तत्पर अनुसंधान। कहो न नवसिखुआ उसे,पहुँचा मंगलयानll … Read more

पुस्तक..

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ जीवन सार- पुस्तकों में छिपा है, सुखी संसारl बड़ों का मान- पुस्तकें सिखाती है, हमें सद्ज्ञानl राह बताती- किताबें हमें सच्चा, पाठ पढ़ातीl जग विचित्र- अनजान राहों में, पुस्तक मित्रl देती संस्कार- सभी पर लुटाती, पुस्तकें प्यारl परिचय-निर्मल कुमार जैन का साहित्यिक उपनाम ‘नीर’ है। आपकी जन्म तिथि … Read more

स्पर्धा में संदीप ‘सृजन’-कार्तिकेय त्रिपाठी ‘राम’ प्रथम एवं सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’-डॉ. पूर्णिमा मंडलोई द्वितीय

इंदौर। हिन्दीभाषा डॉट कॉम परिवार द्वारा सतत स्पर्धा के क्रम में ‘कृष्ण जन्माष्टमी’ विशेष स्पर्धा के परिणाम १७ सितम्बर को जारी कर दिए गए हैं। इसमें आलेख वर्ग में संदीप ‘सृजन’ प्रथम और डॉ. पूर्णिमा मंडलोई द्वितीय स्थान पर रहे हैं,जबकि काव्य में कार्तिकेय त्रिपाठी ‘राम’ प्रथम एवं सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’ दूसरे क्रम पर … Read more

मुहब्बत सोचने वालों के बस की बात ना होती

अमितू भारद्वाज शिकोहपुर (उत्तरप्रदेश) ******************************************************************************** मुहब्बत सोचने वालों के,बस की बात ना होती, ये आँखें सूख जाती तो,कोई बरसात ना होती। ना आते तुम ख्वाबों में,अगर चितचोर के जैसे, उड़ी होती पतंग मन की,बता बिन डोर के कैसेl मेरी नदियों का सागर बन सहारा हो गया होता, जो मेरे पास है सारा,तुम्हारा हो गया होताl … Read more