हिंदी हमारी पहचान

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. हिंदी हमारी पहचान है अपनेपन की भाषा है, और हिंदी हमारी मातृभाषा इसमें जीना-इसमें मरना, हमारी शान है। हिन्दुस्तान में जन्में हम जहां चलना और जीना, सीखा हमने वह, हिन्दुस्तान हमारा है, वह हमारी जान है। हिंदी हमारी…॥ हिन्द की है साँस जहां जहां प्यार की पवन … Read more

हिंदी आत्मा की पुकार है

प्रेमशंकर ‘नूरपुरिया’ मोहाली(पंजाब) **************************************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. भाषाओं में एक विशाल प्रकार है हिंदी, हृदय के उपवन की एक बहार है हिंदी। कितनी धड़कनें धड़कती हैं हिंदी के लिए, हम सभी में आत्मा की पुकार है हिन्दीll हिंदी हमारे हिन्दुस्तान की मुख्य साख है, हमारी हिंदी में संस्कार का सामर्थ्य लाख है। जिससे दिखता … Read more

हिन्दी की महिमा

पवन गौतम ‘बमूलिया’ बाराँ (राजस्थान) ************************************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. प्रबल भावों विचारों का नवल उत्थान है हिन्दी, हमारे पूर्वजों के रक्त का अनुदान है हिन्दी। इसे जगमग सजाना है दुनिया के आँगन में… परम उद्देश्य पाने का हृदय आह्वान है हिन्दी। खिले निज गन्ध भाषा-सी रहे हिन्दी बहारों-सी… हमारी मातृभाषा का अमर वरदान है … Read more

हिन्दी

कैलाश झा ‘किंकर’ खगड़िया (बिहार) ************************************************************************************ हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. निज भाषा-उत्थान में,भाषाई पहचान में, गाँधी के अभियान में,हिन्दी मचल रही। हिन्दी की जयकार है,हिन्दी ही मेरा प्यार है, हिन्दी ही रसधार है,हिन्दी सफल रही॥ हिन्दी भाषा के नाम पर,बातें हों अंजाम पर, लेखनी के काम पर,हिन्दी सबल रही। भनई कैलाश आज,जागे हैं हिन्दी समाज, … Read more

हिंदी के राष्ट्रभाषा बनने की बुनियाद कमज़ोर है क्या ?

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. सौ बरस से अधिक समय हो गया हिंदी को राष्ट्रभाषा का अधिकार मिले,पर आज भी हिंदी सिर्फ हिंदी मानने वालों के कारण बची हैl महात्मा गाँधी ने १९१८ में अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा था कि-“हिंदी को राष्ट्रभाषा का अधिकारी घोषित करना और दक्षिण भारत में हिंदी … Read more

पहचान है ये हिंदी

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’ छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) ********************************************************************************************  हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. माँ शारदे का न्यारा,वरदान है ये हिंदी। इस हिंद देश की तो,पहचान है ये हिंदी॥ हिंदी है गंगा-यमुना,सी एक नदी पावन। स्वर और व्यंजनों की,लहरें है जिसमें बावन॥ नव पीढ़ी आओ आगे,निज शक्तियां संभालो। पाना है संस्कृति तो,इस नीर में नहा लो॥ संस्कृत-सी … Read more

हिन्दी का अभिमान

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. हिंद की निवासी हूँ,हिंदी का अभिमान चाहती हूँ, अंग्रेजी का बहिष्कार नहीं,हिंदी का अधिकार चाहती हूँ। कब कहा है मैंने अंग्रेजी मीडियम से बच्चे न पढ़ाओ, साथ में उनको रामायण-महाभारत की कहानियां भी तो बतलाओ। बतियाने लगे हैं बच्चे अंग्रेजी में गिटपिट-गिटपिट, माँ-बाप का सीना देखो … Read more

हिंदी का क्रंदन

आरती जैन डूंगरपुर (राजस्थान) ********************************************* हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. हिंदी आज करती है क्रंदन, एक दिन ही क्यूँ हम करें वंदन। हिंदी बन गयी है आज शर्म, अंग्रेजी बना हमारा प्रथम धर्म। पराए को भले दो तुम मान, पर अपनों की मत छीनो शान। जो हिंदी थी गले का हार, आज उस हिंदी बोलने से … Read more

चाँद को गले लगा कर

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** चाँद से मिलने को गए हैं हम बारम्बार, मिलकर उनसे हर्षाएं हैं हम बारम्बारl कभी हम उनकी सुनें, कभी वह हमारी सुनेंl सुन-सुन कर एक-दूसरे के संग, गले मिलने को बाँहें फैलाएं हैं इस बार। देख फैली बाँहों को हमारी, चकराया है यह संसार। क्या हुआ यदि गले … Read more

क्या लिखूँ…

डोमन निषाद बेमेतरा(छत्तीसगढ़) ************************************************************* चिंतित हूँ, लिखूँ तो क्या…? मोहब्बत में, शोहरत में गम से, रम से विचलित हूँ। लिखूँ तो क्या लिखूँ…? क्या गृह संसार पर, इस शुभ विचार पर या शुभ चिंतन करूँ, और नहीं तो अभिनंदन करूँ शब्दों से सवाल करता हूँ, उलझन में हूँ, लिखूँ तो क्या लिखूँ…? ऐ खुदा, तू … Read more