हे राम तुम्हें फिर आना होगा
पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** हे राम तुम्हें फिर आना होगा, खुद अधिकार जताना होगा। नहीं मिलेगा इंसाफ तुम्हें भी, खुद हथियार उठाना होगा। याद है वो सागर की ढिठाई, पूजा-प्रार्थना काम न आयीl जब कुपित हो उठाया बाण, खुद सागर ने थी राह दिखाई। वही रूप तुम्हें दिखाना होगा, हे राम तुम्हें… अब … Read more