उनकी कमी खली जाए
राजेश पड़िहार प्रतापगढ़(राजस्थान) *********************************************************** साँस जितनी बची चली जाए। जिंदगी फिर नहीं छली जाए। स्वार्थ वाली पकी तवा रोटी, साग अब फिर कहीं जली जाए। मुस्कुराते रहे हज़ारों में, आज उनकी कमी खली जाए। गम हटा कर कभी चला करना, राह फिर मौज से ढली जाए। हार दर पर तेरे चढ़ाया जो, नोंचती तो नहीं … Read more