‘हर्ष’ का गुमनाम एहसास है `खामोश दर्द`

आरती सिंह ‘प्रियदर्शिनी’ गोरखपुर(उत्तरप्रदेश) ***************************************************************************************** वर्तमान अंकुर प्रकाशन के बैनर तले सम्पादक निर्मेश त्यागी द्वारा प्रकाशित प्रमोद कुमार ‘हर्ष’ की पुस्तक खामोश दर्द का एक अलग ही स्थान है। पुस्तक को प्रसिद्ध कवि एवं लेखक राजेश मल्होत्रा ‘राज’ ने सम्पादित किया है। यह पुस्तक कहानियों एवं कविताओं का मिला-जुला संग्रह है। पुस्तक में संग्रहित कविताओं … Read more

फिल्मों में ‘मानसिक विकृत’ किरदार

इदरीस खत्री इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************* ‘जजमेंटल है क्या’ में दिखेंगे २ मानसिक विकृत राजकुमार राव और कंगना रणौत दोस्तों,एक फ़िल्म आने वाली है ‘जजमेंटल है क्या’,जिसमें एक नहीं,२ मानसिक विकृत( साइको किरदार) देखने को मिलेंगे-पहला राजकुमार राव,दूसरा कंगना रणौत। दोनों किरदार फ़िल्म जगत में मंजे हुए अदाकारों के जिम्मे है तो बेहतर ही होंगे,लेकिन इनके पहले … Read more

जीना सीखो

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’ पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़  ************************************************** जीवन को तुम जीना सीखो,हर पल खुशी मनाओ जी। चाहे कितने संकट आये,कभी नहीं घबराओ जी॥ सिक्के के दो पहलू होते,सुख-दु:ख आनी-जानी है। कभी खुशी तो गम भी आते,सबकी यही कहानी है॥ होना नहीं उदास कभी भी,गीत खुशी के गाओ जी। चाहे कितने संकट आये,कभी नहीं घबराओ जी॥ … Read more

शाम

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* दूर क्षितिज पे, लगे यूँ ऐसे ढलती शाम का ढलता सूरज है अधीर, धरती से मिलने। आसमां की छटा निराली, कुछ उजली कुछ काली-काली, चारों ओर धुँधलका छाया, अब है रात पसरने वाली। ढूंढ रहे हैं पँछी भी देखो, अपना अपना रैन-बसेरा। जड़-चेतन सब थके-थके से, शाम हुई आराम चाहिए, … Read more

सावन

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** सावन जो आये यहाँ, लेकर मधुर फुहार। जी भरकर भीजूँ सखी, गाऊँ मैं मल्हार॥ अब सावन आता नहीं, जो भीजूँ पिय संग। सूखा सावन देख के, उर में नहीं उमंग॥ सावन के घन आ यहाँ, जोहूँ तोरी बाट। बिन भीजे सूखी कलम, सूखे उर के पाट॥ सावन को देखा नहीं, … Read more

मिलती खुशियाँ नहीं ज़माने से

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** मिलतीं खुशियाँ नहीं ज़माने से, मांग लेता हूँ मैं वीराने से। बाप-माँ तो खुदा सरीखे हैं, बाज आओ इन्हें रुलाने से। आग छप्पर की हम बुझा देते, दिल की बुझती कहाँ बुझाने से। काश इनको छुपा लिया होता, ज़ख्म गहरे हुए दिखाने से। जब भी फुरसत की बात होती … Read more

समय कहाँं है

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** भूख मिटाऊँ समय कहाँं है। मंदिर जाऊँ समय कहाँं है॥ गीता पढ़ ली पाप हो गया, और कमाऊँ समय कहाँं है। सरपट भाग रहा है सत्य, उसे छुपाऊँ समय कहाँं है। असंख्य कहाँं हैं साँसें मेरी, व्यर्थ गवाऊँ समय कहाँ है। देशहित में जीवन समर्पित, रक्त बचाऊँ … Read more

नजर में फिर नजर नहीं आया

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** नजर में फिर नजर नहीं आया नजर लगाने वाला, आख़िर पकड़ा गया वो दरिंदा शहर जलाने वाला। खुद को खुदा मानकर बिना खौफ के जीने वाला, मर गया एक दिन फिर खुद को खुदा बताने वाला। भरोसा उसका भी टूटा,जो कभी भरोसे की मिसालें देता था, नींद से जाग ही … Read more

सीताराम येचुरी को पत्र

निर्मलकुमार पाटोदी इन्दौर(मध्यप्रदेश) ************************************************** सेवा में मा.सीताराम जी येचुरी, महासचिव, भारतीय मार्क्सवादी पार्टी, नई दिल्ली। विषय:हिंदी भाषा को अनिवार्य करने के विषय में आपका बयान। संदर्भ:२६ जून २०१९ के नवभारत टाइम्स का समाचार। आपके वक्तव्य में है कि-“स्नातक पाठ्यक्रमों में हिंदी को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने की यूजीसी की कोशिश अन्य भाषाई … Read more

प्यार का नशा

एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’  गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************** प्यार का नशा, यार के दीदार का नशा। नशा,नशा नहीं, मजा जिंदगी का।। कहीं दौलत का है गुरुर नशा, कहीं शोहरत का सुरूर नशा। हुस्न की हस्ती का नशा, इश्क की मस्ती का नशा। नशा,नशा है जिंदगी का, प्यार की बन्दगी का।। किसी को दानिश इल्म का नशा, किसी … Read more