सच्चाई
दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* झूठ का नकाब उतारा तो,असली चेहरे दिखने लगेजिन्हें हमने समझा अपना,हमसे ही नजरें चुराने लगे। नये ज़माने की दौड़ में,अपनों को पीछे छोड़ दियाजिससे मिले फायदा,बस वही अपने लगने लगे। भावनाएं सबकी मर चुकी,संवेदनाएं ख़त्म हो गईंदान देने से ज्यादा लोग,दान का दिखावा करने लगे। परिवार से हुआ करती थी,रौनक घर कीघर-परिवार … Read more