बौराया अम्बुवा…
डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************* सरसों खिली बाग में पीत हो गये।बसंती रूत में गुल मीत हो गये॥ बौराया अम्बुवा पलाश खिल रहे,टेसू के रंगों से रंग मिल रहे।फागुनी राग में नवगीत हो गये,सरसों खिली…॥ रूत बसंत आज उल्लास भर रही,लताएं फूल से श्रृंगार कर रही।भंवरों की गुंजन के गीत हो गये,सरसों खिली…॥ निर्झर निनाद से अब … Read more