एक अनोखा बंधन
डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* दूर रहकर यह मन अपना, जाने कैसे फिर जुड़ जाता।एक अनोखे बंधन में, यह मन अपना फिर से बँध जाता॥ लगता था मीलों की दूरी, तय नहीं कर पायेगें,थोड़ी दूर तलक ही चलकर, हम थक कर रह जायेगें।किंतु आगे और बढ़े तो, मन थक कर फिर उनको पाता,एक अनोखे बंधन … Read more