उत्तर-दक्षिण भाषा-सेतु के वास्तुकार मोटूरि सत्यनारायण

डॉ. अमरनाथ,कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)****************************** हिन्दी योद्धा-पुण्यतिथि विशेष… आजादी के आन्दोलन के दौरान गाँधी जी के साथ हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में विकसित करने का जिन लोगों ने सपना देखा और उसके लिए आजीवन निष्ठा के साथ संघर्ष किया उनमें मोटूरि सत्यनारायण ( २ फरवरी १९०२ से ६ मार्च१९९५) का नाम पहली पंक्ति में लिया … Read more

फणीश्वर नाथ रेणु के नारी पात्रों का सन्दर्भ

डॉ.अर्चना मिश्रा शुक्लाकानपुर (उत्तरप्रदेश)*************************************** महिला दिवस स्पर्धा विशेष…… सृष्टि का आधार,प्रकृति की पुत्री-नारी जो आकर्षक,स्नेहयुक्त, उल्लासदायिनी है,अनंतकाल से ही साहित्यकारों की लेखनी में चित्रित होती रही है। आँचलिक उपन्यासकार फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ के साहित्य में उनकी ही तूलिका से चित्रांकित साहित्य फलक में अवतरित मुख्य नारी पात्रों का सन्दर्भ प्रस्तुत कर रही हूँ ।नारी का जीवन … Read more

कर्तव्यों को नहीं निभाते तो अधिकारों का कोई महत्व नहीं

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *************************************** मौलिक अधिकार राज्य के अपने नागरिकों के प्रति कर्तव्यों को दर्शाता है,वहीं मौलिक कर्तव्य राज्य के नागरिकों से यह अपेक्षा करता है कि वे भी राज्य के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाएंगे। प्रसिद्ध आदर्शवादी पाश्चात्य विचारक टीएच ग्रीन का कहना था,-‘अधिकार और कर्तव्य एक सिक्के के दो पहलू हैं।’अधिकारों का … Read more

पुरुषप्रधान विश्व रचि राखा

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* हम लोग कितने बड़े ढोंगी हैं ? हम डींग मारते हैं कि हमारे भारत में नारी की पूजा होती है। नारी की पूजा में ही देवता रमते हैं। ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते तत्र रमन्ते तत्र देवताः।’ अभी-अभी विश्व बैंक की एक रपट आई है,जिससे पता चलता है कि नारी की पूजा करना तो … Read more

विचाराधीन कैदियों के अधिकार बहुत,पर…

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** आज समाचार पत्र में पढ़ा कि एक कैदी को आगरा जेल से बिना अपराध सिद्ध किए २० वर्ष के बाद न्यायालय ने अपराध मुक्त किया। यह मात्र एक प्रकरण नहीं है,ऐसे हमारे देश में लाखों विचाराधीन कैदी जेलों में सड़ रहे हैं और वे विचारे कभी कभी अकथनीय यातनाओं के कारण मर जाते … Read more

भारतीय किसान की परिस्थिति आज भी खराब

अल्पा मेहता ‘एक एहसास’राजकोट (गुजरात)*************************************** ‘बोए जो बीज खून-पसीना बहा के,आँखों से क्यू फिर आँसूओं की धारा बहती हैमिट्टी को सोना बनाते-बनाते,खुद क्यूँ मिट्टी में मिल जाते हैं।चूल्हा जलाने माचिस की तीली तो मिलती है,पर तवे पे सेंकने रोटी क्यूँ आखिर नहीं मिलती है॥’आज लगभग ९५ फीसदी किसान आधिकारिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे … Read more

हिंदी भाषा की विविधता बनाम विशेषता

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** अपने भारतवर्ष की मातृ भाषा ‘हिन्दी’ की कुछ विविधताओं का उल्लेख कर रहा हूँ। इसी तारतम्य में सबसे पहली बात ये कि समस्त विश्व को ‘ओम’ शब्द पुरातन काल से भारतवर्ष की पूजा-प्रार्थना, आरती,भजन-कीर्तन इत्यादि से मिला,जो सूर्य किरणों के साथ ही सूर्य से उदघोषित होता है। इस बात … Read more

स्वयं पर पुन: अनुशासन की आवश्यकता

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** अचानक देश के अनेक भागों से ‘कोरोना’ संक्रमितों की संख्या में इजाफा देख केन्द्र के साथ राज्य सरकारें भी हरकत में आ गई हैं और कहीं रात का कर्फ्यू लगाया तो कहीं १४४ धारा यानि चेन तोड़ने की चेष्टा प्रारम्भ हो चुकी है,जबकि सभी जगह कोरोना टीकाकरण यथावत चालू है।अब जब … Read more

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस और हमारी मातृभाषा हिन्दी

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस स्पर्धा विशेष…. सभी जानते हैं कि यूनेस्को ने विभिन्न मातृभाषाओं के प्रति जागरुकता लाने या यूँ कहिए कि अपनी अपनी भाषा-संस्कृति के प्रति लोगों में रुझान पैदा करने के उद्देश्य से पूरे विश्व में २१ फरवरी को ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ मनाए जाने की शुरुआत वर्ष २००० से की … Read more

मातृभाषा आदमी के संस्कारों की संवाहक

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ************************************************ अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस स्पर्धा विशेष…. मातृभाषा शब्द की पृष्ठभूमि-मातृ शब्द का अर्थ माँ और मातृभाषा का शाब्दिक अर्थ माता की भाषा होता है, परंतु मातृभाषा शब्द की पृष्ठभूमि पर जाएं तो ज्ञात होता है कि मातृभाषा शब्द बहुत पुराना नहीं है,मगर इसकी व्याख्या करते हुए लोग अक्सर इसे बहुत प्राचीन मान … Read more