मासूम का करुण क्रंदन

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** यूक्रेन और रूस के बीच छिड़े युद्ध में राजधानी कीव में फंसी जूही अपने ३ महीने के बच्चे को अपनी छाती से चिपकाए हुए बैठी हुई थी। गरजती-बरसती मिसाइल और बम के धमाकों की आवाजों से वहाँ बैठे सभी लोगों के चेहरे पर भय और खौफ का आतंक छाया हुआ था। तभी धमाके की … Read more

हमेशा सच के साथ चलिए

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** सतरंगी दुनिया-२२… ज़िंदगी को ठंड और घमंड दोनों से बचाकर रखना चाहिए, क्योंकि दोनों ही परिस्थितियों में आदमी अकड़ जाता है। हम लोग घर के दरवाजे पर शुभ-लाभ लिखते हैं। केवल शुभ-लाभ लिखने से कुछ नहीं होगा। शुभ विचार रखिए अपने लिए भी और दूसरों के लिए भी, फिर … Read more

गंगोत्री से गंगासागर तक ‘कमल’ दस्तक

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारतीय लोकतंत्र के विशाल परिदृश्य में समय-समय पर ऐसे क्षण आते हैं, जो केवल चुनावी परिणाम नहीं होते, बल्कि वे इतिहास की दिशा को बदलने वाले संकेत बन जाते हैं। वर्ष २०२६ के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम ऐसा ही एक निर्णायक मोड़ लेकर आया है, जिसने देश के राजनीतिक … Read more

‘अपराजेय’ कोई नहीं, इसलिए जन-हित न भूलिए

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** जैसे खेल में बहुत कुछ तय होने पर भी अनेक बार नया इतिहास रचा जाता है, ऐसे ही राजनीति में भी सबका समय आता है और जनादेश किसी को सत्ता देता है, तो किसी के किलों की दीवारें दरक जाती है। अर्थात साफ है कि राजनीति में कोई ‘अपराजेय’ नहीं होता। … Read more

‘किराए की संतान’ के प्रचलन से घटते सम्बंध

ललित गर्गदिल्ली*********************************** जीवन की सांझ जब अपने पूरे विस्तार के साथ उतरती है, तब मनुष्य को सबसे अधिक आवश्यकता दवाइयों या धन की नहीं, बल्कि अपनों के सान्निध्य और अपनों की होती है। यह वही समय होता है, जब व्यक्ति अपने जीवन की संचित स्मृतियों, अनुभवों और भावनाओं को साझा करना चाहता है, लेकिन आज … Read more

अगर ये  पंछी न होते तो…

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* पूर्वांचल पर भोर की लालिमा धूमिल हुई, तब उजियारे की नई आभा लेकर सूरज की कोर उभरने लगी है। भीषण गर्मी के दिन हैं, फिर भी सुबह की ठंडी हवा के झोंके कुछ यूँ छू रहे हैं, जिससे तन-मन प्रसन्न हुआ जा रहा है।   सामने इमली के पेड़ों में छिपकर एक भरद्वाज का … Read more

वास्तविक खुशी दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने में

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मन कुछ कहता है…(‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)… हर मनुष्य की अपनी-अपनी इच्छाएँ होती हैं। वह अपनी इच्छाओं को समाज में साकार होते देखना चाहता है और उनकी पूर्ति के लिए हर संभव प्रयास करता है। इच्छाएँ केवल व्यक्तिगत नहीं होतीं, बल्कि सामाजिक भी होती हैं। एक व्यक्ति की सकारात्मक इच्छाएँ समाज … Read more

मजदूर, मशीन और मर्म का मंथन

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** ‘मजदूर दिवस’ विशेष…. ‘मजदूर दिवस’ बीत गया—एक ऐसा दिन, जब मंचों पर श्रम की महत्ता के गीत गाए गए, भाषणों में गरीब, किसान और मजदूर वर्ग को राष्ट्र की रीढ़ बताया गया और  संवेदनाओं के शब्दों से वातावरण भर दिया गया। सरकारी सभागारों से लेकर निजी संस्थानों तक, हर जगह श्रम … Read more

हिंदी पत्रकारिता के २०० वर्षों की समृद्ध संग्रामगाथा

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** हिंदी पत्रकारिता की दो सौ वर्षों की यात्रा केवल एक भाषाई या संचार माध्यम का विकास नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज, उसकी चेतना, उसके संघर्षों और उसके लोकतांत्रिक विकास की गहरी और बहुआयामी कथा है। १८२६ में कलकत्ता से प्रकाशित ‘उदन्त मार्तण्ड’ से आरंभ हुई यह परंपरा उस समय की … Read more

आशा, करुणा और मानवीय मूल्यों के पुनर्जागरण का अवसर

ललित गर्गदिल्ली*********************************** ‘विश्व इच्छा दिवस’ (२९ अप्रैल) विशेष…. हर वर्ष २९ अप्रैल को मनाया जाने ‘विश्व इच्छा दिवस’ मानवता के उन कोमल स्पंदनों को अभिव्यक्त करता है, जो हमें एक-दूसरे से जोड़ते हैं। यह संवेदनशीलता, करुणा और आशा का वैश्विक अभियान है। इस दिन का मूल उद्देश्य उन बच्चों के जीवन में खुशी और सकारात्मक … Read more