ग़म के हजार घूँट
वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** कितना बे’दर्द हो गया’ संसार देखिये, कोई नहीं है’ पूछता’ अखबार देखिये घायल तड़प रहा था’ वहाँ बीच सड़क पे- कारों की’ बिगड़ती हुई’ रफ्तार देखिये। जीवन गुजारना नहीं’ आसान अब यहाँ, सस्ता नहीं है’ एक भी’ सामान अब यहाँ सस्ती महज़ है’ जिंदगी’ यह घास की तरह- इंसान … Read more