धड़कन

वन्दना पुणताम्बेकर इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************************************************* नौ महीनों का दर्द सहकर एक नया अंकुर खिलाती, उस गुंजन के कलरव से वह खुशियों से वह झूम जाती। उस खुशी का एहसास क्या होता…, एक माँ से पूछो॥ ममता की छाँव में अपने नौनिलो को लोरी की तान सुनाकर, मन विभोर करती फिर उस सूनी गोद का दर्द … Read more

पिताजी

देवेन्द्र कुमार ध्रुव गरियाबंद(छत्तीसगढ़ ) ************************************************************************** मुझे लगता था वो मुझे डांटने-दबाने में लगे रहे, मैं गलत था,वो तो मुझे ऊपर उठाने में लगे रहे। उनके टोकने,और रोकने से मैं खीझ जाता, मगर मेरे पिता मुझे बेहतर बनाने में लगे रहे। मैं जिद में अड़ जाता,बड़ी हसरतें करता, वो चुपचाप मेरी जरूरतें जुटाने में लगे … Read more

स्त्री

डॉ.अभिषेक कुमार सदानंदपुर (बिहार) *************************************************************************** स्त्री, उपभोग के लिए बनी मांस पिंडों से सजी, पुरुषों की काम वेदना को शांत करने वाली, चलती-फिरती यंत्र भर नहीं। स्त्री, नवांकुरों की सृजनकर्ता पृथ्वी है। स्त्री जीवनदायिनी,ऊष्मा प्रदाता सूर्य है। स्त्री जीवन के लिए आवश्यक अमृत समान जल है। स्त्री, जिसके बिना जिंदगी की कल्पना नहीं, वो प्राणवायु … Read more

ज़रा सोंचो..

डॉ.आभा माथुर उन्नाव(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************************** कन्याभोज करने वालों तुम ध्यान से मेरी बात सुनो, यदि आये पसन्द यह बात मेरी तो इसको भरे समाज कहो। यूँ तो छोटी बच्ची को तुम देवी कह पूजा करते हो, पर वहीं अजन्मी कन्या को यमलोक तुम्हीं पहुँचाते हो। मासूम बच्चियों को पाकर राक्षसों की लार टपकती है, वह … Read more

नारी शक्ति

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* नारी! नहीं रही अब अबला, और न ही पुरुषों की कैद में गिरफ़्त है। वह पुरुषों के साथ, कदम से कदम मिलाकर चलना सीख गई है। माँ के रूप में, मातृत्व की ममता लुटाती, पत्नी के रूप में पत्नी धर्म निभाती है, राजनीति से लेकर खेल तक, जमीं से लेकर अन्तरिक्ष … Read more

नारी

देवेन्द्र कुमार राय भोजपुर (बिहार)  ************************************************************* नारी नर की जननी है, और धरा की प्रेम प्रतीक। पल्लवित कण-कण इससे, हर पग जग लेता है सीख। मूल में ममता मानवता की, आँचल में स्नेह की धारा है संस्कृति की अविचल गाथा, और संबल दीप सहारा है। धैर्य धरा प्रतिबिंबित होता, मुस्कान मनोवांछित फल पाए जब नारी … Read more

होली के सात रंग

विश्वम्भर पाण्डेय  ‘व्यग्र पाण्डे’ गंगापुर सिटी(राजस्थान) ******************************************************************************** होली का नाम लेकर उसने छुआ मुझे, स्पर्श में पर उसके होली कोसों दूर थी। वो मुस्करा के रंग लगाकर चला गया, रंग ऐसा चढ़ा मुझ पर उतरता ही नहीं। रगड़-रगड़ के कितने साबुन घिस दिये, होली के रंग कैसे हैं कि उतरते ही नहीं। मैं ढूंढ नहीं … Read more

नजरों का मिलना

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ जबसे मिली है,तुमसे नजरें, तब से न जाने,क्या हो गया। अब तो आँखें भी,शर्माने लगी। किसी और से,नजरें मिलाने को॥ तेरे इंतज़ार में,एक उमर हो गई, रात रुक सी गई, और सहर हो गई। पता नहीं अब,कब मुलाकात होगी, नज़रों की नजरों से,कब बात होगी॥ तेरी बेरुखी का अब,हम गिला क्या … Read more

परीक्षा

हेमलता पालीवाल ‘हेमा’ उदयपुर (राजस्थान ) *************************************************** यह जीवन भी एक परीक्षा है, हर रोज होती यहाँ परीक्षा है। इस दुनिया को रोशन करने में, सूरज की होती नित्य परीक्षा है। पेट भरने के लिए तपना पड़ता है, भूखे मजदूर को देनी परीक्षा है। समन्दर में लहरों से लड़ना पड़ता है, साहिल पर आने की … Read more

अभिनंदन

केवरा यदु ‘मीरा’  राजिम(छत्तीसगढ़) ******************************************************************* मेरे देश का वीर सिपाही, मेरे माथे का चंदन। ‘अभिनंदन’ का अभिनंदन, है शत-शत बार नमन। आने से महका गुलशन, झूम उठा गगन। अभिनंदन का है अभिनंदन, शत-शत बार नमन। है भारत का शेर, दहाड़ कर आया है। जुल्मों सितम के आगे, नहीं शीश झुकाया है। धन्य-धन्य हे वीर कहे, … Read more