बरखा ऋतु
मनोरमा जोशी ‘मनु’ इंदौर(मध्यप्रदेश) **************************************************** हरित तृणिका भेदनी पर, मोर मनहर दिखते हैं। शरद के पग चिन्ह आली, हर दिशा में दिखते हैं। छंट गए बादल बरसते, विहग पुलकित मोर नाचतेl आज ये जलकुंड देखो, झिलमिलाते दिखते हैं। सघन कुंजों के किनारे, कृषक धरती के सितारे। झुन्ड के अब झुन्ड देखो, हल चलाते दिखते हैं। … Read more