मोहर
अनिता मंदिलवार ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** अजीब-सी रीत है, हर काम करने के पहले लगवानी पड़ती है, तुम्हारी स्वीकृति की मोहर। तुम हाँ कहो, तभी कदम आगे बढ़े मेरे वरना कदम रुके ही, रह जाते हैं मेरे। ऐसा क्यों ? मैं नारी हूँ… बस इसलिए ! मुझे भी उड़ने का हक है खुले उन्मुक्त गगन में, … Read more