ज़िन्दगी गुनगुनाने लगी
प्रदीपमणि तिवारी ध्रुव भोपाली भोपाल(मध्यप्रदेश) **************************************************************************** नाम खुद की हथेली पर उनका लिखा,तब से बेचैन वो नींद जाने लगी। उनसे पूछा नहीं पर पता चल गया,ज़िन्दगी नेह में गुनगुनाने लगी। ज़ादुई रंग शायद है दिल में चढ़ा, अड़ गये हाथ उनका वो कल थामने। बात ऐसी हुई खाइयाँ थी बहुत, साथ में ऐसा कुछ था कुँआ … Read more