मस्जिद में हिंदू विवाह अनुकरणीय

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** केरल के कायमकुलम कस्बे के मुसलमानों ने सांप्रदायिक सदभाव की ऐसी मिसाल कायम की है,जो शायद पूरी दुनिया में अद्वितीय है। उन्होंने अपनी मस्जिद में एक हिंदू जोड़े का विवाह करवाया। निकाह नहीं,विवाह! विवाह याने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार मंत्र-पाठ,पूजा,हवन,द्वीप-प्रज्जवलन,मंगल-सूत्र आदि यह सब होते हुए आप यू-टयूब पर देख सकते … Read more

भारतीय नारी कल और आज

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ हमारा देश आजाद हुए सात दशक से अधिक का समय हो चुका है। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त तथा महीयसी महादेवी वर्मा प्रसाद जी की पंक्तिया `अबला जीवन यही कहानी आँचल में है दूध आँखों में पानी`,`एक नहीं दो दो मात्राएं नर से बढ़कर नारी नारी नहीं बन्दिनी हूँ`,जैसी पंक्तियों का अर्थ … Read more

बहुत जरुरी है जनसँख्या नियंत्रण कानून बनाना

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** आबादी नियंत्रण करना नामुमकिन है, चाहे नियम,कानून,सामाजिक,पारिवारिक स्तर पर कितने भी प्रयास किये जाएंl इसको इस प्रकार समझाना-समझना होगा कि, वर्तमान में देश की आबादी १३० करोड़ हैंl हम पूरी आबादी को वर्षवार बाँट लें,यानी एक वर्ष से लेकर १३० वर्ष की आयु वर्ग के १ करोड़ लोग हैं,अब आप २० … Read more

सुरक्षा-शान्ति-समृद्धि के लिए युद्ध आवश्यक

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* जी हाँ,समृद्धि शान्ति से ही सम्भव है और शान्ति के लिए युद्ध आवश्यक है,जिसका इतिहास ही नहीं बल्कि धार्मिक ग्रंथ भी साक्षी है। जैसे त्रेता युग में श्री राम जी शान्ति से अपना वनवास काटना चाहते थे,किन्तु १६कला सम्पन्न महापंडित राजा रावण माता सीता का हरण कर … Read more

वक्त जरूर याद रखेगा संवेदना की ‘छपाक्’ को

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** फिल्म बनाना और उसका चलना न चलना बेशक एक व्यवसाय है,लेकिन कुछ अच्छी और सोद्देश्य फिल्मों का न चलना अथवा कम चलना समाज की संवेदनशीलता और समझ पर भी सवाल खड़े करता है। सवाल ये कि क्या समाज फिल्मों के आईने में अपनी मनपसंद या चयनित छवि ही देखना चाहता है … Read more

संस्कृति संरक्षण और शिक्षा

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** यह कल्पना करना ही भयावह लगता है कि अगर शिक्षा न होती तो क्या होता ? अगर शिक्षा न होती तो प्राचीनतम् विचारों का क्रमबद्ध संकलन होना सम्भव नहीं होता। गुरुकुल या विद्यापीठ अथवा आज के अत्याधुनिक विद्यालय नहीं होते। समाजीकरण की सतत् प्रक्रिया सुचारु नहीं हो पाती। हमारी अनमोल … Read more

युद्ध का अंधेरा नहीं चाहता कोई भी राष्ट्र

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* अमेरिका एवं ईरान के बीच बढ़ते तनाव से बनती विश्व युद्ध की स्थितियों ने समूची दुनिया को संकट में डाल दिया है। इन वैश्विक तनावों के बीच व्यापार और तकनीकी संघर्ष के चलते वैश्विक बाजार अस्थिर हो रहे हैं,विकास की गति मंद हो रही है,महंगाई बढ़ती जा रही है,मानव जीवन जटिल … Read more

एकता और नागरिकता

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’ बहादुरगढ़(हरियाणा) *********************************************************************** लगभग डेढ़ माह से पूरे देश में नागरिकता पर चर्चा,प्रदर्शन,आंदोलन,हिंसा,आरोप-प्रत्यारोप के कारण नकारात्मकता का इतना विषैला वातावरण हो रहा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने चिंता व्यक्त कर कठिन दौर में शान्ति बनाए रखने की अपील की है। यह कैसी विडम्बना है कि संसद द्वारा पारित कानून की संवैधानिकता पर प्रश्न … Read more

कश्मीर को भी अब ‘ऑनलाइन’ लाना ही होगा…

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** संदर्भ भले जम्मू-कश्मीर का हो,लेकिन इसकी व्याप्ति संपूर्ण देश और मानव समाज तक है। शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार द्वारा इंटरनेट सुविधा पर मनमानी पाबंदी को लेकर जो फैसला दिया है,वह दूरगामी और गहरा अर्थ लिए हुए है। न्यायालय ने कश्मीर घाटी में ५ महीने से सुरक्षा कारणों की आड़ … Read more

पर्यावरण संकट:सबसे बड़ी चुनौती

डॉ. स्वयंभू शलभ रक्सौल (बिहार) ****************************************************** ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग में झुलसकर करीब ५० करोड़ निरीह जानवरों की मौत हो चुकी है। इनमें स्तनधारी पशु, पक्षी और रेंगने वाले जीव सभी शामिल हैं। इनकी कितनी ही प्रजातियां अब समाप्त हो जाएंगी। तस्वीरें दिल को दहला देती हैं,दर्जनों लोग भी मारे गए हैं। कुआला … Read more