ट्रम्प की टोपी में मोर पंख और बिच्छू…

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************************** पिछले दिनों में अमेरिका एक बार उठ गया और एक बार गिर गया। वह उठा तब,जबकि इस्राइल और संयुक्त अरब अमीरात (यू.ए.ई.) में समझौता हो गया और वह गिरा तब,जबकि सुरक्षा परिषद में वह ईरान के विरुद्ध बुरी तरह से पछाड़ खा गया। इस्राइल की स्थापना १९४८ में हुई,लेकिन पश्चिम एशिया के … Read more

महत्वाकांक्षा-सम्मान न मिलना मानसिक रोग तो नहीं!

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** वर्तमान राजनीति महत्वाकांक्षा और सम्मान न मिलना यानी अपमान इस समय राजनीति में बहुत अधिक प्रचलन में है। ऐसा कौन व्यक्ति होगा,जिसकी सभी महत्वाकांक्षा पूरी हुई होगी और ऐसा कौन व्यक्ति न होगा जिसकी कभी बेइज्जती न हुई हो। व्यक्ति जन्म लेता है,यदि वह घर में बड़ा हुआ और उसके छोटे भाई-बहिनों ने … Read more

भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय आपातकाल

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)******************************************************************* २५ जून १९७५-यह तारीख भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काला धब्बा हैI इस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया था,जो २१ मार्च १९७७ तक यानि २१ महीने तक चलाI क्यों लगा आपातकाल और क्या रहा उसका असर ? आपातकाल की घोषणा कानून व्यवस्था बिगड़ने,बाहरी आक्रमण और वित्तीय … Read more

जंगल में चुनाव

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन(हिमाचल प्रदेश)******************************************************************* जंगल में है इस समय ख़ुशी भारी,क्योंकि चल रही है चुनाव की तैयारी। चुनाव को देखकर शेर ने किया है यह वादा,अब उसने किया है शाकाहारी होने का इरादा। शेर और बकरी एक ही घाट का पानी पीएंगे,साथ जिएंगे और साथ ही मरेंगे। बिल्ली का है यह वादा,उसने छोड़ दिया … Read more

‘रणछोड़’ नीतीश और ‘धृतराष्ट्र’ लालू यादव…!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** देश में जारी कोरोना संकट के बीच नीतीश-लालू के प्रदेश बिहार में क्या चल रहा है, यह जानना दिलचस्प है। कोरोना विषाणु के कारण बिहार में अब तक ३० मौतें हुई हैं,जो कई बड़े राज्यों की तुलना में काफी कम है,लेकिन प्रदेश के राजनेताओं की दिलचस्पी अब कोरोना से लड़ने से ज्यादा … Read more

केवल भारत कहा जाए,इंडिया नहीं

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’ मुम्बई(महाराष्ट्र)*************************************************************** मुद्दा-भारत को भारत कहो,इण्डिया नहीं….. इसके लिए दो ही उपाय हैं-पहला यह कि देश में इसके लिए जागरूकता अभियान के साथ-साथ इसके लिए प्रबल मांग भी हो। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि राजनीतिक दल जनता की मांग के आधार पर ही अपनी नीतियां तय करते हैं। यदि पर्याप्त जनसमर्थन … Read more

`आत्मनिर्भर भारत` के सपने और चुनौतियां

गोपाल मोहन मिश्र दरभंगा (बिहार) ******************************************************************************** प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने `कोरोना` प्रकोप से त्रस्त,आर्थिक नजरिए से ध्वस्त और अंतर्मन से जले-भुने भारतवासियों के लिए २० लाख करोड़ रुपए के जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है,वह बदलते वक्त के लिहाज से दूरदर्शितापूर्ण कदम है। साथ ही जितनी चतुराई से उन्होंने स्थानीय को आवाज यानि `लोकल … Read more

ट्रम्प का मोदी से मदद मांगना ‘कृष्ण’ की ‘सुदामा’ से गुहार…!

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** `कोरोना` संकट से घिरे दुनिया के ‘महाबली’ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जब रविवार को हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कोरोना से लड़ने दवा की मदद मांगी,तो लगा मानो आज ‘कृष्ण’ को ही ‘सुदामा’ की सहायता की जरूरत पड़ गई है। खुद अपने देश में मुँह पट्टी या मुखौटे,पीपीई और वेंटीलेटर की … Read more

कोरोनाःरेलें और बसें तुरंत चलाएं

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** ‘तालाबंदी'(लाॅकडाउन) की ज्यों ही घोषणा हुई,कुछ टी.वी. चैनलों पर कहा था कि यह ‘तालाबंदी’ बीमारी ‘कोरोना’ से भी ज्यादा खतरनाक सिद्ध हो सकती है। कोरोना से पिछले दो हफ्तों में २० लोग भी नहीं मरे हैं और १००० लोग भी उसके मरीज़ नहीं हुए हैं लेकिन शहरों और कस्बों में … Read more

खुशहाली लेकर लौटेगी गौरैया

अरशद रसूल, बदायूं (उत्तरप्रदेश) ********************************************************************* नटखट बचपन में तरंगें पैदा करने के लिए गौरैया का नाम जरूर आता है। बच्चा गौरैया या ऐसी ही चिडि़ंयों को देखकर मचलता जरूर है। बात कोई बहुत ज्यादा पुरानी नहीं है। कोई एक-डेढ़ दशक पहले ज्यादातर घरों में गौरैया का घोंसला जरूर होता था। घोंसला न भी हो,तो यह … Read more