हौंसला रखिए,हँसने वाले तालियां भी बजाएंगे

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ********************************************** यह समाज है,जो अंधा-बहरा और लंगड़ा होने के साथ-साथ मनोरोगी भी है। इसकी विशेषता है कि यह जिन पर पहले हँसता है,बाद में उनकी सफलता प्राप्ति पर तालियां भी बजाता है। इसलिए आत्मनिर्भर कर्मठ व्यक्ति कभी हौंसला नहीं गंवाते और साहसी बन कर अपनी मंजिल की ओर यात्रा … Read more

प्रेम,सद्भावना और भाईचारे का त्यौहार

सुरेन्द्र सिंह राजपूत हमसफ़रदेवास (मध्यप्रदेश)****************************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… बचपन में जबसे होश संभाला था,तबसे लगाकर आज तक होली के त्यौहार पर इस प्रचलित जुमले को सुनते आ रहे हैं-‘बुरा न मानो होली है,हम मस्तों की टोली है।’इसका आशय यह है कि,’आज होली का त्यौहार है,हम तुमको रंग लगाएंगे,तुमको इसका बुरा नहीं मानना है।’ … Read more

होली खुशियों को बांटने का अपूर्व अवसर

ललित गर्गदिल्ली ************************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली)  विशेष… होली प्रेम,आपसी सद्भाव और मस्ती के रंगों में सराबोर हो जाने का अनूठा त्यौहार है। ‘कोरोना’ महामारी के कारण इस त्यौहार के रंग भले ही फीके पड़े हैं या मेरेे-तेरे की भावना,भागदौड़,स्वार्थ एवं संकीर्णता से होली की परम्परा में बदलाव आया है। परिस्थितियों के थपेड़ों ने होली … Read more

सामाजिक समरसता का पर्याय होली

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* फागुन संग-जीवन रंग (होली) विशेष… होली सामाजिक समरसता का त्यौहार है। इसमें कोई किसी से भेदभाव नहीं करता। रंगों के इस त्यौहार में अमीर-गरीब एक जगह इकठ्ठे होकर रंग-गुलाल खेलते हैं, पर समय के साथ इसमें बहुत परिवर्तन हो गया है। पर्यावरण के बचाव के कारण लकड़ियों का जलाना कम होता जा रहा … Read more

रूह का रंगरेज़

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************************* फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… कविता,जो प्रीत के साथ ही बी.ए. फाइनल ईयर में थी,ने कहा-‘प्रीत! कौन सी किताब पढ़ रही है ? आज तू संस्कृत की कक्षा में भी नहीं आई। अब जल्दी चल,आज गृहविज्ञान की प्रयोगात्मक लैब में जाना है।’तभी प्रीत को अहसास हुआ कि अरे! इतना … Read more

बुरा न मानो होली है…

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… सतुयग से कलयुग यानि आज तक वसंत ऋतु में सभी सनातन धर्मावलम्बी,बच्चे-बूढ़े,सब संकोच और रूढ़ियाँ भूलकर ढोलक- झाँझ-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में डूब जो त्योहार पूरे उमंग,जोश व उल्लास के साथ मनाते हैं,उसी महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार का नाम है होली। वैसे … Read more

होली-नई शुरूआत का संदेश

दिपाली अरुण गुंडमुंबई(महाराष्ट्र)***************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… हिंदू काल गणना के अनुसार फागुन ऐसे तो अंतिम माह है,परंतु वह हमेशा नई शुरुआत की सीख देता है। फागुन की पूर्णिमा-होली के नाम से जानी जाती है। होली से संबंधित हिरण्य कश्यप तथा भक्त प्रहलाद की कहानी तो सब जानते हैं,जो हमें सिखाती है कि,हमें … Read more

आओ रंग दें हिंन्दुस्तान…

अल्पा मेहता ‘एक एहसास’राजकोट (गुजरात)*************************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… हृदय की तरंगों को,रंगों मे घोलकरखेलेंगे होली,गिले-शिकवे छोड़कर। रंगत दिलों की,फिर से उभर जाएसंगत बिछड़ों की,फिर से संवर जाए। ग़ुलाल के पानी से,राग-द्वेष धोकरकेसुड़े रस से,हवाओं में इतर घोलकर। महकाएँ दशों दिशा,दुश्मनी भुलाकररिश्ते भी महकाएँ,हर अहम् भाव छोड़कर। अवनी पर हो रहा,खेल रक्त की … Read more

फागुन का श्रंगार-होली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… ‘जीवन फागुन बन गया,गाता मंगल गीत।आओ,हम अंकर भरे,नेह भरी नव प्रीत॥’होली वसंत का एक उल्लासमय पर्व है। होली को ‘वसंत का यौवन’ भी कहा जाता है। इस समय प्रकृति सरसों की पीली साड़ी पहनकर किसी की राह देखती हुई प्रतीत होती है। हमारे पूर्वजों … Read more

सम्मान चाहता है नारी अस्तित्व

मंजू भारद्वाजहैदराबाद(तेलंगाना)******************************************* यह सर्वविदित है कि आज २१वीं सदी में नारी पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है,पर यह कहना गलत नहीं होगा कि नारी ने इस मुकाम को पाने के लिए युगों-युगों से युद्ध किया है । आज भी उसका युद्ध जारी है। कहते हैं भारतीय सभ्यता ने हमेशा नारी को पूज्य … Read more