भक्तिन राम प्यारी
ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’अलवर(राजस्थान)*********************************************** आज राम प्यारी बहुत उदास थी। उसकी आँखों में आँसू बह रहे थे। शायद रोज़ की भांति बहू ने आज भी उसे भला-बुरा कहा है। बेचारी करती भी क्या! असहाय जो ठहरी। शरीर में इतनी ताकत नहीं बची थी कि बहू का मुकाबला कर सके। उसके प्रश्नों का जवाब दें सके। बस … Read more