भक्तिन राम प्यारी

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’अलवर(राजस्थान)*********************************************** आज राम प्यारी बहुत उदास थी। उसकी आँखों में आँसू बह रहे थे। शायद रोज़ की भांति बहू ने आज भी उसे भला-बुरा कहा है। बेचारी करती भी क्या! असहाय जो ठहरी। शरीर में इतनी ताकत नहीं बची थी कि बहू का मुकाबला कर सके। उसके प्रश्नों का जवाब दें सके। बस … Read more

कर्ज का दंश

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’अलवर(राजस्थान)*********************************************** अरे! आ गए आप। आज बड़ी जल्दी आ गए।सब खैरियत तो है ? मैं कई दिनों से देख रही हूँ आप बहुत उदास उदास से नजर आ रहे हो। रमेश ने कोई जवाब नहीं दिया। उसके चेहरे से उदासी स्पष्ट झलक रही थी।अच्छा ठीक है। आप हाथ-मुँह धो लो,मैं चाय बना कर … Read more

पश्चाताप के आँसू

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’अलवर(राजस्थान)*********************************************** दिनेश, ओ दिनेश…भैंस को पानी पिला दे बेटा। अब तो तू बड़ा हो गया है। थोड़ा बहुत घर के काम-काज में भी हाथ बटा लिया कर। मैं ही करुँ सारे काम-काज। डूगँर सू बलितों लेकर आऊं,गोबर चौथ,रोटी टूक सब मैं ही करुँ। क्या-क्या करुँ मैं। हे भगवान मरी भी तो नही आवे … Read more

फर्ज..अपना-अपना

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** अरे पापा आप अभी तक तैयार नहीं हुए। बैग कहाँ है आपका ? चलिए मैं पैक करती हूँ। पापा ने एक उदास नजर नीलू पर डाली। नीलू बेटा मैं कहीं नहीं जाऊंगा। ये घर तेरी माँ की यादों से भरा हुआ है। नीलू की आँखें भर आई। पापा माँ को गए … Read more

बारात…

डॉ. सोमनाथ मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)******************************************* ‘बारात’ में जाने की बात सुनकर किसे न अच्छा लगता है। सब लोग एक से एक कपड़े में सज-धजकर बैंड-बाजा,रौशनी,डीजे की धुन के साथ थिरकते हुए रास्ते से जब जाते हैं,तब शहर,क़स्बा या गाँव के लोग बड़े ध्यान से देखते हैं कि कौन,क्या पहना हुआ है और कैसे-कैसे नाच रहे हैं। … Read more

माँ का आँचल

स्मृति श्रीवास्तवइंदौर (मध्यप्रदेश)********************************************* कल्पना की सुबह-सुबह ही नींद लगी थी। सुबह ४ बजे तक तो वह घड़ी ही देख रही थी। क्या करती,पति के व्यापार में हुए घाटे के कारण उनका स्वास्थ्य गड़बड़ा गया था और रातभर से चिंता में कल्पना जाग रही थी।बस अभी अभी नींद ने कल्पना को आगोश में लिया ही था … Read more

शहीद…

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************ एक छोटे से गाँव में गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा था। पूरे गाँव को रंग-बिरंगी झंडियों से सजाया गया था। सरकारी विद्यालय के विद्यार्थी खाकी पेंट व सफेद शर्ट पहनकर हाथ में छोटे-छोटे झंडे लेकर विद्यालय के मैदान में पंक्तिबद्ध होकर खड़े हुए थे। तब ही गाँव में एक खबर ने … Read more

अबोध कली

स्मृति श्रीवास्तवइंदौर (मध्यप्रदेश)********************************************* सुबह उठकर पौधों के साथ समय बिताना राधा को बहुत पसंद है। रंग-बिरंगे फूलों की खुशबू और ताजी हवा राधा को अंदर से ऊर्जावान कर देती है। इसलिए राधा अपने दिन की शुरुआत हमेशा बगीचे में समय बिता कर ही करती है। उस दिन भी राधा सुबह-सुबह अपने पौधों में पानी डाल … Read more

उसूल

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* एक पत्थर पर एक ओर आलोक व दूसरी ओर नेहा दोनों ही मिलने के लिए हाथ बढ़ाए हुए हैं,किन्तु तिल भर के लिए उनके हाथ रूक गए। काॅलेज के शैक्षिक भ्रमण के दौरान दोनों के दिल इक-दूजे के बेहद करीब आ चुके थे। विवाह की बात को लेकर दोनों के … Read more

लज्जा हीन

स्मृति श्रीवास्तव इंदौर (मध्यप्रदेश)********************************************* ‘हैलो! रजनी सब तैयारी हो गई ना ? कितना पैसा इकट्ठा हुआ है ? उसे एक लिफाफे में रख लेना,खुले पैसे देना अच्छा नहीं लगेगा।’रजनी ने जैसे ही फोन उठाया उसे सामने से केदार भाई साहब की आवाज सुनाई दी।रजनी- ‘जी भाई साहब,आप चिंता ना करें। सब तैयारी हो गई है … Read more