चिड़िया के बच्चे

मौसमी चंद्रा पटना(बिहार) ************************************************************************ उफ्फ! फ़िर तिनके…परेशान कर रखा है इन चिड़ियों ने…। उमा एक हाथ में झाडू उठाये बड़बड़ाये जा रही थी। मैंने कमरे से ही आवाज लगायी-“क्या हो गया उमा ? क्यूँ गुस्सा कर रही हो इन बिचारी चिड़ियों पर..!” “क्या करूं दीदी,२ बार झाडू लगा चुकी हूँ। पूरे घर में इन शैतानों … Read more

तीन रुपये का व्यय

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) ************************************************************** एक राजा था। वह परा विद्या(अध्यात्म विद्या) का ज्ञाता था। एक दिन उसने अपने राज्य में ढिंढोरा पिटवाया,और सभी प्रजावासियों को महल में एकत्रित होने के लिए आमंत्रित किया।सभी प्रजावासी और राजा के मंत्रीगण भी महल में आ गए। राजा ने सभी प्रजावासियों और मंत्रियों को तीन-तीन रुपये दिए और कहा-तुम … Read more

चान्डाल चौकड़ी की पिकनिक

डॉ.आभा माथुर उन्नाव(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************************** विश्व बाल दिवस स्पर्धा विशेष……….. टिंकू मेंढक,पिंकी गिलहरी,टफी कछुए और गोलू पिल्ले की टोली जंगल में चांडाल चौकड़ी के नाम से प्रसिद्ध थी। जमीन पर,पानी में और पेड़ों पर भी इनके उपद्रव का अंत न था। पेड़ के नीचे से निकलने वालों पर फल या फलों की गुठलियाँ गिराना,नदी के … Read more

माँ से कहो कि आश्रम…!

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’ मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************* मुकुंद आज आने में काफी देर हो गई। हाँ! बस थोड़ा-सा काम आ गया तो यही सोचा पूरा होने पर निकलूं। नीरू किचन की ओर बढ़ते हुए,-“मुकुंद जल्दी फ्रेश हो जाओ,मैं खाना लगाती हूँ।” तुम खाना लगाओ नीरू,बस मैं यूँ गया और यूँ आया। खाना परोसते हुए नीरू कुछ … Read more

अनार्याणां प्रवेश: निषिद्ध

सुशांत सुप्रिय  ग़ाज़ियाबाद (उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** पंडित ओंकारनाथ संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान थेl लोग उनके पांडित्य का लोहा मानते थे। पांडित्य उन्हें संस्कारों में मिला था।एक और वस्तु जो उन्हें संस्कारों में मिली थी,वह थी-कुल का गौरव और जातिगत अभिमान। उच्च वर्ण का जातिय अहं उनकी नस-नस में भरा था। उनका मानना था कि उनकी शिराओं … Read more

नया बरगद,बूढ़े बाबा

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** “इसे ही ‘समय का फेर’ कहते हैं। आज मैं बेसहारा हूँ,लाचार हूँ,पर भगवन भक्ति से मुख नहीं मोड़ा है। यही कारण है कि मैं अपने वर्तमान को देख पा रहा हूँ। यहाँ बैठे-बैठे अपने साथ-साथ अतिथि भगवनों का भी पेट भर जाता है। समय-समय पर भक्ति-भजन और भंडारे का आयोजन … Read more

मेरी सखी

वीना सक्सेना इंदौर(मध्यप्रदेश) *********************************************** बेटे की शादी की तैयारियां लगभग पूर्ण हो गई थी। घर मेहमानों से भरा हुआ था। सिर्फ दो दिन बचे थे। आज हल्दी थी,कल महिला संगीत होगा,और परसों शादी..कि अचानक दरवाजे से मेरे पति की आवाज आई.. “अरे देखो कौन आया है..?” मैंने बाहर जाकर देखा तो रेखा खड़ी थी।रेखा मेरी … Read more

निशान्त

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’ बहादुरगढ़(हरियाणा) *********************************************************************** रमेश बाबू अपने वर्तमान से संतुष्ट थे। स्थानीय पोस्ट ऑफिस में क्लर्क की नौकरी शुरू की थी,वहीं पर अब पोस्टमास्टर हो गये थे।सरल,मीठा बोल,सहनशीलता उनका चरित्र बन गया था। अपनी मनमोहक मुस्कान से हर आने वाले का दिल जीत लेते थेl उनके अनुभव की छाप उनके चेहरे पर साफ झलकती … Read more

बदलते रिश्ते

डॉ.साधना तोमर बागपत(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** शालू ग्रीष्मकालीन अवकाश में एक महीने के लिए बच्चों के पास पूना आयी थी। बेटा,बहू और बेटी सब एकसाथ रहते थे। बेटी,बहू दोनों एक ही कम्पनी में इंजीनियर थी और बेटा अलग कम्पनी में। बेटा बहुत कम बोलता था,हर समय अपने काम में लगा रहता। उसे न घूमने का शौक … Read more

तनाव

वीना सक्सेना इंदौर(मध्यप्रदेश) *********************************************** “चल रोहित लंच करते हैं”,आशीष ने रोहित से आकर कहा।आशीष रोहित का सहयोगी था। ऑफिस में लंच टाइम हो चुका था,लेकिन रोहित का आज लंच करने का मन नहीं था। वास्तव में वह घर से लंच लाया ही नहीं था। कई दिनों से वह बहुत ही ज्यादा वर्क प्रेशर में अपने-आपको … Read more