फसलों का `गर्भपात’

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************************** यदि, घड़ी भर के लिए उनके पास ठिठक जाती है नींद, तब भी मेरे पिता जी, नींद में बड़बड़ाते रहते हैं। उनके हाथ, नींद में भी थिरकते हैं ऐसे, जैसे जागृत अवस्था में खेत से, छुट्टा पशुओं को भगा रहे हों। जरा-सा, मक्के की पाती यदि हिल जाती है हवा से, … Read more

सृजन करें

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’ पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़  ************************************************** नई सृजन की बेला आई,आओ कुछ निर्माण करें। आगे बढ़ते जायें हम सब,भारत माँ का नाम करेंll कदम रुके मत बाधाओं में,संकट से हम नहीं डरें। लक्ष्य साध कर बढ़ते जाओ,मन में अपना धीर धरेंll करें खोज विज्ञान जगत में,छू लें चाँद-सितारों को। सृजन करें ऐसे हम साथी,माने … Read more

राम नाम की महिमा

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** राम नाम जप रे मनां,राम नाम ले जाप। तर जायेगा तेरा जीवन,राम धन मन में रख। जग जीत ले राम नाम तू जप के, मिटा ले विघ्न राम नाम के तप से। सबल,सहज,सजग,सरल,दिन रैन, राम नाम दे हर सुख और चैन। राम नाम की वाणी से, मिट जाते … Read more

प्यारा भारत

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ******************************************** जन्म लिया है भारत में, तभी तो प्यारा लगता है। विश्व में सबसे न्यारा, देश हमारा दिखता है। कितने देवी देवताओं ने, जन्म लिया इस भूमि पर। धन्य हो गए वो सभी जन, जिन्हें मिला जन्म इस भूमि परll कण-कण में बसते हैं भगवान, वो भारत देश हमारा है। कितनी नदियां … Read more

वर्तमान का मूल्यांकन

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** संचार क्रान्ति का युग है, लोग ये कहते है। दूरियाँ न रही अब, दूरियाँ बढ़ गयी मगर दिलों की। ईंट से ईंट जुड़कर, मकान बन रहे हैं। दरारें पड़ रही हैं, मगर मानवीय रिश्तों में। अनवरत् कदम बढ़ाए जा रहे हैं, दिन महीने की ओर, महीने वर्षों की ओर वर्ष … Read more

प्रकृति से प्यार

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** प्रकृति कुछ कहना चाहती है मुझसे, हवा की सरसराहट कुछ कहना चाहती है मुझसे पक्षियों की चहचहाहट कुछ कहना चाहती है मुझसे, बारिश का उल्लास वातावरण बातें करते हैं मुझसे, चाँदनी रात का मदमस्त वातावरण, कुछ कहना चाहता है मुझसे, चाँदनी की शीतलता मुझे सुकून देती है। सूरज के ताप हमेशा … Read more

प्रदूषण

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* हर तरफ मचा हाहाकार है रोगग्रस्त हर परिवार है, कोई खाँसता,कोई आँखों से बेकार है पड़ी जिस पर भी प्रदूषण की मार है। धूम-धड़ाका खूब मनाई दीवाली है कृषकों ने भी जला डाली पराली है, हर तरफ घुटन,साँसों में चुभन, दिन धुँआ-धुँआ है,रातें भी काली-काली हैं। सड़कों पर … Read more

सब ज़िम्मेदार

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** लफ्फाज़ी होती रही,हुई तरक़्क़ी सर्द। समझ नहीं ये पा रहे,सत्ता के हमदर्दll अबलाओं पर ज़ुल्म कर,बनते हैं जो मर्द। निन्दा जमकर कीजिये,मिलेंं जहाँ बेदर्दll डंका अब बजने लगा,उसका भी घनघोर। एक ज़माने तक रहा,जो इक नामी चोरll हम सब ज़िम्मेदार हैं,सिर्फ नहीं इक आध। भूख कराती है … Read more

अपने तक सारे हैं सीमित

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे मंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** दिल छोटे,पर मक़ां हैं बड़े,सारे भाई न्यारे, अपने तक सारे हैं सीमित,नहीं परस्पर प्यारे। दद्दा-अम्मां हो गये बोझा, कौन रखे अब उनको! टूटे छप्पर रात गुज़ारें, परछी में हैं दिन को। हर मुश्किल से दद्दा जीते,पर अपनों से हारे, अपने तक सीमित हैं सारे,नहीं परस्पर प्यारे॥ मीठा बचपन भूल … Read more

न कहना ख़ुदा भी नहीं रहा अब तो

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’ छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) ********************************************************************  ख़ुशी का कोई सिला भी नहीं रहा अब तो। यहाँ ग़मों का पता भी नहीं रहा अब तो। ख़ता हुई तो मुझे उसने ये सज़ा दी है, किया मुआफ़ ख़फा भी नहीं रहा अब तो। जो अश्क़ का था समंदर उदास आँखों में, हुआ न ख़ुश्क भरा … Read more