हरेली त्योहार

अर्चना पाठक निरंतर अम्बिकापुर(छत्तीसगढ़) ***************************************************************************** हरियाली का अपभ्रंश है हरेली, छत्तीसगढ़ी प्रकृति पूजते बना सहेली। नांगर,कोपर रापा,कुदारी,चतवार सूजा, कृषि कार्य ही इनकी सर्वोत्तम पूजा। होम धूप दे भोग लगे चीला, हर कृषक रहता यहाँ खिला-खिला। डोंगहार सिंदूर का त्रिशूल बना पूजते नाव, भेलवा और महुआ डाली दरवाजे पर रखते पूरे गाँव। हरेली के दूसरे दिन राउत … Read more

करता नहीं ऐतबार आदमी

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** (रचना शिल्प:अरकान-२१२ २१२ २१२ २१२) हर कदम पर करे इंतजार आदमी, प्यार दिल में लिए बेशुमार आदमी। बात दिल की कहे तो कहे अब किसे, आज करता नहीं ऐतबार आदमी। इस जहां में सभी एक से एक हैं, कौन किसको कहे होशियार आदमी। गर मुहब्बत में खा जख़्म … Read more

अपने सर पे हम बाँध कर कफन चले

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- हम हैं ऐसे नौजवान कट ही जाए सर भले, आज अपने सर पे हम बाँध कर कफन चले। हम वतन की आबरू मिटने नहीं देंगे कभी, उठी गलत नजर तो आँख फोड़ देंगे हम अभी। जो गला विद्रोह की आवाज गर उठायेगा, बोलने से पहले ही हम काट देंगें … Read more

हौंसला सभी का बढ़ाया करो

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** जश्न सब ज़िन्दगी के मनाया करो। बाँसुरी चैन की मिल बजाया करो। सख़्त मेहनत करो मुस्कुराओ सदा, मुश्किलों को हँसी में उड़ाया करो। भाई को भाई से जो मिलाते मिलें, हौंसला उन सभी का बढ़ाया करो। नित पसीना बहाते हैं जो लोकहित, पीठ उनकी ज़रा थपथपाया करो। … Read more

हरियाली

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** धरा करती श्रृंगार देखो वर्षा की फुहार, हरियाली हर ओर धरती हरियाई। छाई है देखो बहार नाचता है मन मोर, हो गई सुहानी भोर धरा खिलखिलाई। कोयल की मीठी तान पपीहे की देखो शान, कामदेव छोड़े बान रति भी मुस्कुराई। घनघोर घटा छाई मोरनी नृत्य लुभाई, मन में खुशियाँ लाई … Read more

टूट पड़ो

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’ पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़  ************************************************** टूट पड़ो अब बैरी ऊपर,भाग कहीं ना जाने पाय। खाल खींचकर भूसा भर दो,जो भी हमको आँख दिखायll नहीं डरेंगे धमकी से अब,गीदड़ भभकी देना छोड़। आँख उठाकर देखा भी तो,बम का गोला देंगे फोड़ll बड़े-बड़े मिसाइल गोला,रखते हैं हम अपने पास। सीधा-साधा मत समझो तुम,कर देंगे हम … Read more

बेनाम इशारों पर आजादी

रणदीप याज्ञिक ‘रण’  उरई(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************** अब आराम कहाँ, दिमाग जो खुद व्यस्त चौराहा हो चला तभी तो अब शान्त गली भी मन को रिझाती है…l अच्छा लगता है अब, कभी-कभी यूँ ही नीरस रहना क्योंकि सुना है रेगिस्तान की भी अपनी एक पहचान होती है…l कभी-कभी ठहर जाती है निगाहें, टक-टकी लगाये अपरिचित-सी दीवारों पर … Read more

आत्मजा

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* आत्मजा खंडकाव्य से अध्याय-१० आइ.ए.एस. बनने का सपना, अपने से हो चला हताहत जहाँ प्यार की बजी दुंदुभी, सिमट गई उसकी हर चाहत। फिर भी था संकल्प हृदय में, काम नया कर दिखलाने का जो न सहज कर पाती बेटी, ऐसा ही कुछ कर जाने का। तुरत पुस्तकों में लग जाती, … Read more

अगस्त का मस्त महीना

डाॅ.देवेन्द्र जोशी  उज्जैन(मध्यप्रदेश) ******************************************************************** अगस्त माह की बात निराली, चहुंओर छा जाती हरियाली। लेकर आता ये रक्षाबंधन त्योहार, हर्षित करता बहन-बेटी का प्यार। घर की रौनक जब घर में आती, आँगन कली-कली खिल जाती। किलकारी से गुंजित होता आँगन, जैसे उल्लसित हो उठे धरा-गगन अगुवाई में बाजार हो जाते गुलजार, जैसे सालों से हो बहनों … Read more

एक बार

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* यूँ ही कभी थककर एक बार जीवन की उलझनों से दूर, जीना चाहती थी स्वच्छंद,एक बार। चल पड़ी थामे प्रियतम का हाथ, जीवन से मिलने छोड़ घर-बार। पहुँच गयी स्वप्न लोक में, झूल रही थी बाँहों के झूले में,एक बार। होकर भाव-विभोर,ख़ुशबू थी चहुँओर, मिल रही थी प्रियतम … Read more