ज़िन्दगी का मतलब

नरेंद्र श्रीवास्तव गाडरवारा( मध्यप्रदेश) ***************************************************************** ज़िन्दगी का मतलब, सिर्फ मतलब के लिये ही न हो। ज़िन्दगी का मतलब, वृक्ष की तरह हो जड़,पत्ती,शाखा, फूल और फल… सभी कुछ,सभी के लिये। ज़िन्दगी का मतलब, दीपक की तेल-बाती की तरह हो खुद ख़त्म होता चले… पर,सबको रोशनी देता रहे। ज़िन्दगी का मतलब, सिर्फ जन्म लेना और मर … Read more

सच में महादेव हो तुम

सौदामिनी खरे दामिनी रायसेन(मध्यप्रदेश) ****************************************************** ॐनमःशिवाय पंचाक्षरी मंत्र है, जपे जो शान्ति पावे। महामृत्युंजय मंत्र जाप से, अकाल मृत्यु कट जावे। कालों के महाकाल हो, सच में महादेव हो तुम। करते दया तुम सब पर, भोले हो औघड़ दानी। जटों विच गंगा बहाते, भोले भस्मी को अंग रमातेl तुम देवों के देव कहाते, सच में महादेव … Read more

सूखेगा कब आँख का पानी

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** घन घन घन घनघोर घटाएं,घहर घहर घबराते बादल। भरी दुपहरी दीख रहा है, सूरज को भी अस्ताचल॥ बिजली कड़की बादल बरसे,जैसे अम्बर टूट गया हो। सदियों से जो धैर्य रखा था,इंद्रदेव का छूट गया हो॥ ताल तलैया नदिया नाले,सागर में कोहराम मचा है। अंदर-बाहर तन-मन भीगा,कौन कहाँ कब कौन बचा … Read more

फौलादी इरादे

रेनू सिंघल लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************************************************************** वो सरहद की माटी को माथे से लगाते हैं, न दिन को चैन,नींदें न रातों को वो पाते हैं। वतन से इश्क़ वो करते इरादे उनके फौलादी, लहू से सींच कर तिरंगे की शान बढ़ाते हैं॥ परिचय-रेनू सिंघल का निवास लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में है। १९६९ में ९ फरवरी … Read more

मापदण्ड

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** चलो लिखो!!! भूख और फुटपाथ, नंगी देह और अंधाधुंध सामान से पटा बाजार, कूड़े के ढेर में बोतलें ढूँढते हाथ, बड़ी-बड़ी इमारतों में शिक्षा का रहवास, और वहीं कबाड़ी के यहाँ फटी किताब, उलटते-पलटते मापदंड से बाहर, फिर-फिर उल्टे बेंत पूरा दृश्य रंगमंच की शोभा लजा रहा है, … Read more

काश हम चिड़िया होते

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** काश हम चिड़िया होते, आसमान में हम रहते। शोरगुल से दूर रहते, मन हमारे शांत होते। काश हम चिड़िया होते, भीड़ पर नहीं चलते। काम से हम चले जाते , घर भी जल्दी आ जाते। काश हम चिड़िया होते, पेड़ों पर हम चढ़ जाते। फलों को तोड़कर खा जाते, … Read more

श्रावण की मस्ती

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) ************************************************************** श्रावण का आना,वनों का बहकाना, घटाओं का शोर,मयूर का नृत्य दामिनी की चमक,अम्बर का दिवस, बूंदों की रिमझिम,नक्षत्र का संगीत चातक की प्रीत संग नक्षत्र की है बूँदl भोले की जयकार,सावन की है पहचान, कावड़ियों की चली बारात,गंगा का स्नान पुण्य बड़ा महान,सजी-धजी कावड़, चली भोले के द्वार। मयूर का नृत्य,कोयल … Read more

आँधियों के वार से

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** सागर को कभी झलकता देखा नहीं है डूबी है किश्तियाँ उसमें खुद के भार से, इश्क़ में अपने जज्बातों को रोके रखना… जीता नहीं है कोई,खुद अपने से हार के। गम और खुशी का तो ये शाश्वत रिश्ता है प्यार इन दो बुनियाद पर ही तो टिकता है, आँखें मिलाकर … Read more

ये दुआ है मेरी

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** आबाद रहे दुनिया तेरी ये दुआ है मेरी, यूँ हो रब की रहमत मिलें सदा चमन की कलियाँ, न हो काँटो की सहर ये दुआ है मेरी। तेरे जीवन रूपी सियाही के अल्फ़ाज़छीन तुझसे, खुशियों की सौंप दूँ सौगात मैं तुझे, खुदा की इतनी रहे मेहर ये दुआ है … Read more

हिंदी:डीएमके सांसद वायको की संकीर्ण मानसिकता

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** आसमान की तरफ थूकने से थूक खुद के मुँह पर आता है। सूर्य को कितना भी कोसो,उसको कोई फर्क नहीं पड़ता। हिंदी राजभाषा है,पर कुछ विघ्नसंतोषियों के कारण वह राष्ट्रभाषा नहीं बन पा रही है। इससे हिंदी की कोई प्रतिष्ठा नहीं गिरी,और न गिरेगी। आज भी दक्षिण भारत में हिंदी फिल्मों … Read more