शब्दों का संसार

अनिल कसेर ‘उजाला’  राजनांदगांव(छत्तीसगढ़) ****************************************************************************** शब्दों का होता अपना ही संसार है, शब्द से जीत शब्द से ही हार है। शब्द से टूटते शब्द से ही जुड़ते परिवार हैं, शब्द से कहीं प्यार-कहीं तकरार है। शब्द पतझर,शब्द ही बसंत बहार है, शब्द है नाव तो शब्द ही पतवार है। शब्द फूल तो शब्द ही तलवार … Read more

प्रेम

कृष्ण कुमार कश्यप गरियाबंद (छत्तीसगढ़) ************************************************************************** प्रेम अराधना,प्रेम ही पूजा, प्रेम आत्मा की पुकार है। प्रेम से बड़ा न कोई दूजा, प्रेम तो ईश्वरीय उपहार है। प्रेम कर्म है,प्रेम ही मर्म, प्रेम धर्म का प्राण-सार है। प्रेम गर दिल में हो सबके, तो हर जन एक अवतार है। प्रेम न बिकता बाजारों में, रत्न बड़ा … Read more

मैं मजदूर हूँ

प्रेमशंकर ‘नूरपुरिया’ मोहाली(पंजाब) **************************************************************************** मैं इस देश का मेहनती मजदूर हूँ, मैं कभी पास अपने,कभी दूर हूँ। हर इमारत की बुनियाद रखता हूँ मैं, फिर भी कुछ कहते हैं मैं मजबूर हूँ॥ मैं प्रगति की इमारत की बुनियाद हूँ, मैं हर मेहनत के सागर की फरियाद हूँ। अपने खून-पसीने से सींचता हूँ मैं इसे, फिर … Read more

ज़िन्दगी का अर्थ

नरेंद्र श्रीवास्तव गाडरवारा( मध्यप्रदेश) ***************************************************************** ज़िन्दगी का अर्थ नहीं, समझने में हम जबसे असमर्थ हैं, जितना भी कमाने में लगे रहो, सब व्यर्थ है क्योंकि, कमाने के चक्कर में खो गये हैं हमारे संगी-साथी,पड़ोसी,हितैषी, हमने कमाने की अंधी दौड़ में इन्हीं को रौंदा है, इसीलिये सूना घरोंदा है, आओ स्वार्थ-दहलीज़ को पार करें, हमारे आसपास … Read more

जल भर-भर ले आए मेघा

मालती मिश्रा ‘मयंती’ दिल्ली ******************************************************************** जल भर भर ले आए मेघा, घटा घिरी घनघोर। दादुर मोर पपीहा बोले, झींगुर करता शोरll रिमझिम-रिमझिम बरसे सावन, लगे नाचने मोर। टर-टर करते दादुर निकले, धूम मची चहुँओरll प्यास बुझी प्यासी धरती की, मनहि रही हरषाय। तप्त हृदय की तृषा मिटी अब, शीत हुआ हिय जायll तड़-तड़ करती बूँदें … Read more

पुस्तकों की सुखद अनुभूति का अलग महत्व

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** मेरे द्वारा उपन्यास और सैकड़ों लेख लिखे गए हैं,और लिखे जा रहे हैं,पर अनुभव है कि,पुस्तकों की सुखद अनुभूति का अलग महत्व हैl एक दिन साक्षात्कार में यह प्रश्न पूछा गया कि,वर्तमान में ई-बुक का चलन है,और यह सुविधा बहुत सुविधाजनक है तो आप प्रकाशन पुस्तकाकार में क्यों कराते हैं,जबकि ई-बुक … Read more

प्यारा हिंदुस्तान

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** हम हैं प्यारा हिंदुस्तान रखते हैं हम दिल में सारा जहान, मेरे अंदर बसता केवल इंसान ही इंसान नफरत का यहाँ तनिक नाम नहीं, क्रोध-ईर्ष्या का यहाँ काम नहीं स्वार्थ का यहां कोई दाम नहींl हम हैं प्यारा हिंदुस्तान हूँ मैं सुन्दर एक सोने-सी चिड़ियाँ, चाहता भला मैं … Read more

भारत माँ के लाल

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ मिलें अपनों का प्यार हमको, तो सफलता चूमेगी कदम। रहे सभी का अगर साथ, तो जीत जाएंगे हर जंग। और मिल जाएगा हमको, वो खोया हुआ आत्म सम्मान। इसलिए हिल-मिलकर, रहो देशवासियों तुम सबll तुम्हें कसम भारत माँ की, दिखाओ अपना जौहर तुम। तुम्हीं तो कर्णधार हो, अब भारत माँ के … Read more

सावन

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* सावन मन भावन लगे,भक्ति शक्ति संगीत। सत्यम शिवम् विराजते,पावन सावन प्रीतll पावन सावन प्रीत,चढ़े झूले पर सखियाँ। तकती है मनमीत,बरसती सावन अँखियाँll शर्मा बाबू लाल,नहीं हो भाव अपावन। भक्ति प्रीत संजोग,लुभाए पावन सावनll हर-हर बम-बम गूँजता,नभ में बिजली मेह। वधू,कन्याएँ झूलती,झूले तीज सनेहll झूले तीज सनेह,सजे मेंहदी व कंगन। इन्द्र धनुष … Read more

क्या कसूर रहा…

ममता बैरागी धार(मध्यप्रदेश) ****************************************************************** हर तरफ खुशियां मेरे आस-पास थी, पंखों से उड़ान भर उड़ना चाहती थी क्योंकि मेरे घर-आँगन की मैं राजकुमारी थी। एक तरफ बाबुल का स्नेह,एक तरफ माँ की ममता, और भाई-बहनों के संग में प्यारी-न्यारी थी। आज लग रहा था,आसमां में पहुंच गई हूँ, मैं ऊपर और आसमान नीचे था शायद … Read more