हौंसला

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* अब दुर्गम मार्गों पर बढ़ चले हैं पांव मेरे, कठिन है यह राह इतनी थक गए हैं पांव मेरे। इस सूने रास्ते में याद कल की आ रही है, व्यर्थ में जीवन गंवाया पानी-सा मैं धन बहाया, याद जब आती है उसकी कांपते हैं पांव मेरे। दूर है मंज़िल मेरी, पर … Read more

गले मिलो प्रेम संग

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* नई साल आती रहे,मन में हो शुभ भाव, करते शुभकामना,सभी हम प्यार से। भारत धर्म संस्कृति,आए न कोई विकृति, मन में गुमान रख,रहना संस्कार से। बार-बार प्रयास हो,परिश्रम विश्वास हो, लक्ष्य पर हो निगाह,डरो नहीं हार से। शीतल स्वभाव रख,सफलता स्वाद चख, गर्म लोह कट जाए,शीतल प्रहार से। पंख लगते वक्त … Read more

अवध नादां हुआ

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** जब बुरा-सा वक्त मुझ पर दिल से मेहरबांं हुआ, तब सदा मेरा पराया मेरा खानदान हुआ। स्वार्थ की टेढ़ी तुला पर तौलकर फेंका गया, बस सभी के वास्ते बेमोल का सामांं हुआ। दान की बछिया भला पाली गई कब नेह से! छीनकर मत को हमेशा नाम मत का दान हुआ। … Read more

कटुवचन

श्रीमती पुष्पा शर्मा ‘कुसुम’ अजमेर(राजस्थान) **************************************************** मानव को मिला वाणी का वरदान। सधते उसी से संसार के व्यवहार। ज्ञान विज्ञान मनोरंजन, सभी तो जुड़े हैं वाणी के सूक्ष्म तंतु से। मानव मन पर करती राज्य, संतों की अमृतमय वाणी। हरती दुःख-क्लेश देती शाश्वत शान्ति। ठीक उलटा, कटुवचन प्रभाव पल में भरता मन में द्वेष-भाव, पनपता … Read more

सहज बुनियाद हिलती है

अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** (रचना शिल्प:१२२२ १२२२ १२२२ १२२२) कठिन श्रम से सफलता शीघ्र सबको हाथ लगती है, लगाओ जोर दम भरके,सहज बुनियाद हिलती है। कमाओ लाख धन चाहे,महल मोटर बनाओ तुम, न दे ये काम, जीवन की कभी जब शाम ढलती है। निकट जब बाल बच्चे हों,मजा तब नौकरी में है, अगर … Read more

झूठ-फरेब का दौर

सुषमा मलिक  रोहतक (हरियाणा) ************************************************************************************* खत्म हुआ वक़्त इंसानियत का,झूठ-फरेब का चला दौर है, सच्चाई को दबाने को,झूठी खबरों का सोशल साइट पर शोर है। अपनी गलती ढंकने को लोग,दूसरों पर झूठे इल्जाम लगाते हैं, घर की बहन-बेटियों को,हथियार बनाने से भी नहीं कतराते हैं। जिस थाली में खाया उसी में छेद,फिर दूसरों को साँप … Read more

प्यार की जमना है माँ

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** मेरी माँ, ज्ञान की गंगा है प्यार की जमना है। सपनों की गुल्लक है, यादों का गहना है माँ हमारी दोस्त,सहेली और बहना हैl थपकी है प्यार भरी,लोरी की सरगम है, आस्था की भोर नई माँ,श्रद्धा की पूनम है। माँ हमारी सबसे प्यारी सुन्दर और भोली-भाली, बाँहों का झूला है,आँचल … Read more

घर-घर आये नेता जी

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** नेता घूमते गाँव में,माँगन को वो वोट। तरह-तरह के वायदे,बरसाते वो नोटll घर-घर आते हैं सभी,नेता करते बात। जनता लालच में फँसे,देते हैं सौगातll पाँच वर्ष की नौकरी,पाते हैं वो आज। अपनी झोली हैं भरे,करते हैं वो राजll झूठ कपट मन में बसे,मुँह में मीठा बोल। एक वोट … Read more

धर्मपत्नी

केवरा यदु ‘मीरा’  राजिम(छत्तीसगढ़) ******************************************************************* मैं नारी ही धर्मपत्नी हूँ, मैं प्रियतम की संगिनी हूँ मैं साजन का प्यार हूँ, मैं ही घर-परिवार हूँl मैं सावन की फुहार हूँ, मैं ही बासंती बयार हूँ मैं दुल्हन बनकर आती हूँ, मैं दो कुल को महकाती हूँl मैं बाबुल को छोड़ आती हूँ, मैं माँ का आँगन … Read more

ज़िन्दगी का सवाल

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* उम्र के एक पड़ाव पर, ज़िन्दगी ने ज़िन्दगी से पूछा- क्या किया उम्रभर ? ज़िम्मेदारियों के बोझ तले, दब कर रह गया बस तेरा अस्तित्व। कभी समय ही नहीं मिला, ख़ुद के बारे में सोचने का। दुनिया के रेगिस्तान में, न जाने कब उम्र की मुट्ठी से फ़िसल गयी ज़िन्दगी … Read more