चुनाव

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** चुनाव का अब,माहौल आया, सब मिल नेता,योग्य ही चुनें झूठे वादे कर,न जनता लूटे, कर्तव्य निभाते,करे कार्य पूरे। कागज़,पन्नों में,खिंचे खाका, न लोकहित,न विकास करता सही मायने में जनता को, आज नेता है खूब छलता। नोट देकर वोट है लेता, जनता के विश्वास से खेलता दिये हुए पैसों को अपने, कार्यकाल … Read more

प्यार का सन्देश

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ रेत पर नाम लिखाने से क्या होगा, क्या उसको संदेशा तुम दे पाओगे। जब वो आये यहां पर घूमने को, उसे पहले कोई लहर आ जायेगी। जो तुमने लिखा था संदेशा, उसे लहर बहाकर ले जाएगी। रेत पर नाम लिखाने से क्या होगा…॥ अगर करते हो सही में मोहब्बत तुम, तो … Read more

होली मर्दानी

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* (रचना शिल्प:विधान१० वर्ण,१६ मात्रिक, भगण मगण सगण गुरु २११ २२२ ११२ २,दो दो पद समतुकांत हो) रंग सजे सीमा पर सारे। शंख बजाए कष्ट निवारे। संकट आतंकी बन बैठे। कान उन्हीं के वीर उमेंठे। राष्ट्र सनेही भंग चढ़ा लो। शत्रु समूहों को मथ डालो। ओढ़ तिरंगा ले बन शोला। केशरिया होली … Read more

खून की होलियाँ

मनोज कुमार ‘मंजू’ मैनपुरी(उत्तर प्रदेश) **************************************************************************** आज देश महफूज कहाँ है अपने ही गद्दारों से, सीमा पर तो रण कर लेंगे,निपटें कैसे खोटों से। कौन कहे इन हैवानों की करतूतें कब होंगी कम, बच्चा-बच्चा चीख रहा है और सभी की आँख है नम। जुबां-जुबां बोले फिर अब तो इन्कलाब की बोलियाँ, अपने ही अपनों से … Read more

कैसे खेलें होली…

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* होनी थी जो वो तो होली,कैसे खेलें फाग होली, गिरगिट रंग लेकर सभी दल खेल रहे हैं आज होली। रक्त रंजित वीर अरि से खेल रहे हैं रण में होली, आरोपों का गुलाल ले आई नेताओं की देखो टोली॥ चोर-चोर कह शोर मचावे,भोली जनता को रिझावे, भ्रष्टाचार की गागर लेकर … Read more

उन्मुक्त कविताओं का संसार है ‘मुक्त तरंगिणी’

आरती सिंह ‘प्रियदर्शिनी’ गोरखपुर(उत्तरप्रदेश) ***************************************************************************************** पुस्तक समीक्षा………………….. प्रखर गूँज प्रकाशन द्वारा प्रकाशित साझा संग्रह की श्रृंखला के अंतर्गत पूरन भंडारी सहारनपुरी द्वारा संकलित पुस्तक मुक्त तरंगिणी एक ऐसा काव्य संग्रह है,जिसमें रचनाकारों की भावनाओं का बिखराव उन्मुक्त रूप से हुआ है। जिस प्रकार जल की उन्मुक्तता सागर-सा विस्तार देती है,मन की उन्मुक्तता सपनों-सा आकाश देती … Read more

वीर शहीदों को नमन…

डॉ.जयभारती चन्द्राकर भारती गरियाबंद (छत्तीसगढ़) *************************************************************************** वीर शहीदों की शहादत, कैसे हम भूल पायेंगे श्रद्धांजलि,श्रद्धासुमन अर्पित कर, ऋण कैसे हम चुकायेंगेl अतुल्य निधि देश के वीर जवान, सरहद पर नज़र टिकायेंगे एक वीर शहीद का प्रतिशोध, सौ दुश्मन मार गिरायेंगेl सरहद का पुलवामा आतंक, शहादत पर कह रहा हिन्दुस्तान कब तक,आखिर कब तक ? आतंक अब … Read more

होली समरस का त्यौहार

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** आया है खुशनुमा त्यौहार, द्वेष घृणा स्वार्थ विकार समन्वित धर्म जाति भाषा विभेद सभी का, होलिकाग्नि में होता है संहार। महाविजय का परिचायक, सौहार्द सौम्यता सौख्य मनोहर विविध रंगों से रंजित तन-मन, सुमित स्नेह मनभावन जीवन। तमसो मा ज्योतिर्गमय, इस वेदमन्त्र से हो आलोकित आया होली का त्यौहार। … Read more

मैं बंजर में गुल

अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** मैं बंजर में गुल को खिलाने लगा हूँl जमीं आसमां को हिलाने लगा हूँl मैं पीता नहीं था कभी शौक से भी, कि सोहबत में पड़ के पिलाने लगा हूँl कि जिसकी निगाहों ने घायल किया दिल, उसी शोख से दिल लगाने लगा हूँl लगी चेहरे पे है कालिख़ … Read more

होली में उड़े गुलाल

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* उड़े गुलाल रंग हुआ लाल, होली का सुखद त्योहार पीली सरसों नारंगी पलाश, भूले मलाल भूले मलाल आज है ख़ुशी विशाल, उड़े गुलाल रंग हुआ लालl मदमस्त हुआ है आलम, सजनी बहके संग बालम चितचोर हुए हैं सांवरे, पहनावे गलबहियन हार उड़े गुलाल रंग हुआ लालl चितवन में … Read more