भविष्य निर्माता उत्पीड़न व शोषण के शिकार

वन्दना शर्मा’वृन्दा’अजमेर (राजस्थान) ***************************************** निजी विद्यालयों में भारतवर्ष का ७० फीसदी से अधिक भविष्य तैयार हो रहा है और उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है निजी शिक्षक। निजी विद्यालय खोलने वाले भी अच्छे पूंजीपति वर्ग होते हैं,और उसमें पढ़ने वाले बच्चे भी मोटे पूंजीपतियों के होते हैं और मोटी मोटी होती है इन शालाओं की फीस,मगर … Read more

नरसिंहराव के प्रति कांग्रेस की कृतघ्नता

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* भारत के प्रधानमंत्री रहे पामुलपर्ती वेंकट नरसिंहरावजी का इस २८ जून को सौवां जन्मदिन था। प्रधानमंत्री बनने के पहले वे विदेश मंत्री, गृहमंत्री,रक्षा मंत्री और मानव संसाधन मंत्री रह चुके थे। १९९१ में जब वे प्रधानमंत्री बने तो तीन पड़ौसी देशों के प्रधानमंत्रियों ने पूछा कि क्या राव साहब इस पद को … Read more

पिता के ऋण से कभी उऋण नहीं हो सकते

सुरेन्द्र सिंह राजपूत हमसफ़रदेवास (मध्यप्रदेश)****************************************** ‘पिता का प्रेम, पसीना और हम’ स्पर्धा विशेष….. पिता के ऋण से हम कभी उऋण नहीं हो सकते,क्योंकि संसार में एक पिता ही वह शख़्स है जो चाहता है कि मेरे बच्चे मुझसे भी ज़्यादा तरक़्क़ी करें। पिता अपने बच्चों की ख़्वाहिशें पूरी करने के लिए जो कड़ी मेहनत और संघर्ष … Read more

काश! वो बचपन वापिस आ जाए

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* ‘पिता का प्रेम, पसीना और हम’ स्पर्धा विशेष….. गरिमामय,प्रभावशाली,अति शानदार व्यक्तित्व के धनी मेरे पिता राम प्रकाश भल्ला-समाजसेवी, स्पष्टवादी,स्वावलम्बी,अथक परिश्रमी,सत्यवादी, निर्भीक,अनुशासन प्रिय,शालीन,दार्शनिक,विनम्रता, परोपकार आदि गुणों से सदैव सभी के प्रिय रहे।छोटा हो या बड़ा,निर्धन हो या धनवान,सभी से समभाव स्नेह करते व सम्मान करते थे। पिता जी, किशोरावस्था से ही … Read more

गंभीर मामलों में भी धैर्य नहीं खोते थे पिताजी

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** ‘पिता का प्रेम, पसीना और हम’ स्पर्धा विशेष….. आज वाले कोलकात्ता के व्यस्तम इलाके में स्थित एक मकान के तीसरे माले में मेरा बचपन बीता। पिताजी के आँगन में पाँव रखने के साथ हम भाई- बहन सम्भल जाते थे। मेरे अपने बड़े ‘माँ जाये भाई’ व मेरे बीच २० साल का … Read more

बढ़ता प्रदूषण,बढ़ता संकट

रोहित मिश्रप्रयागराज(उत्तरप्रदेश)*********************************** आज के आधुनिक युग में जैसे-जैसे लोगों की जरुरत बढ़ती जा रही है,वैसे-वैसे ही पर्यावरण पर लोगों की आकांक्षाओं का भार भी बढ़ता जा रहा है। नित नई सुख-सुविधाओं की चाहत में लोग उत्पादन साम्रग्री के दुष्प्रभाव से अनजान होकर उभोक्ता की भूमिका में पर्यावरण को संकट ग्रस्त कर रहे हैं।आज ऐशो-आराम के … Read more

कश्मीर पर सार्थक संवाद हुआ

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* जम्मू-कश्मीर के नेताओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संवाद काफी सार्थक रहा। इसे हम एक अच्छी शुरुआत भी कह सकते हैं। २२ माह पहले जब सरकार ने धारा ३७० हटाई थी और इन नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था,तब और अब के माहौल में जमीन-आसमान का अंतर आ गया है। जब इस … Read more

माँ की बातें…सीख

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** माँ के बारे में जितना लिखूँ,कम है। मुझे अपनी माँ की बहुत सी बातें याद हैं। प्यार,हुनर,अक्लमंदी और सीख बहुत याद आती है। आज उन्हीं की शिक्षा के कारण हम ससुराल में अपने दायित्व को पूरी तरह से निभा पा रहे हैं। हमारी माँ को अपने सास-ससुर का प्यार कभी नहीं मिला। … Read more

राजनीति महज ‘भविष्य’ या वैचारिक संघर्ष का मंच ?

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और दल में ब्राह्मण चेहरा रहे जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने पर कांगेस नेता शशि थरूर ने एक सवाल उठाया था कि क्या राजनीति विचारविहीन भविष्य (कॅरियर) हो सकती है ? क्या सियासी दल बदलने से व्यक्ति की वैचारिक प्रतिबद्धता भी आईपीएल में दल … Read more

मेरी दृष्टि में कबीर:सीधे चोट की भ्रांतियों पर

नमिता घोषबिलासपुर (छत्तीसगढ़)**************************************** ‘कबीर मन निर्मल भया,ज्यो गंगा की नीर।पीछे पीछे हरि फिरै,कहत कबीर कबीर।”कबीर दास जी ने अपने दोहों के माध्यम से समाज में व्याप्त भ्रान्तियों,अंध विश्वासों,कुरीतियों पर सीधे चोट की। उन्होंने ब्राह्मणवाद पाखंडी एवं कर्मकांड की आलोचना की,वहीं मूर्ति पूजा पर भी उन्होंने कटाक्ष किया,जिसे उक्त दोहे के माध्यम से लिखा गया-‘पत्थर पूजे … Read more