जल से ही जीवन चले

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ************************************** ज से जल जीवन स्पर्धा विशेष… ‘जल से ही जीवन चले,जल से यह संसार।जल से ही यह सृष्टि है,जल है प्राणाधार॥’ हम नित ही सुनते आए हैं कि ‘जल ही जीवन है।’ जल के बिना सुनहरे कल की कल्पना भी नहीं की जा सकती। वस्तुत: जीवन के सभी कार्यों का … Read more

जल है तो कल है

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** ज से जल जीवन स्पर्धा विशेष… शरीर हो या प्रकृति सभी पांच तत्व से बने हैं और वे हैं-जल,वायु,पृथ्वी,अग्नि और आकाश। इन पाँचों में संतुलन बना रहना अति आवश्यक है,तभी हम पर्यावरण को सब तरह से अपने अनुकूल पाएंगे, लेकिन आजकल भिन्न-भिन्न कारणों से इसकी मात्रा में असंतुलन भी होता है … Read more

जागरूकता की जरूरत

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ ज से जल जीवन स्पर्धा विशेष… जल ही जीवन है,ये तो पूरा संसार जानता है,पर क्या हम अपने पीने के जल स्त्रोतों को संभाले हुए हैं ? जी नहीं,बिल्कुल भी नहीं,दुनिया में तीन हिस्से पानी है और एक हिस्सा ज़मीन का है। पानी की ज़रूरत जीवन के लिए,पेड़-पौधों के लिए, वनस्पतियों को सुरक्षित … Read more

भारत-रूसःहमें हुआ क्या,भूमिका अदा करें ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* रूसी विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव और भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर के बीच हुई बातचीत के जो अंश प्रकाशित हुए हैं,और उन दोनों ने अपनी पत्रकार-परिषद में जो कुछ कहा है,अगर उसकी गहराई में उतरें तो थोड़ा-बहुत आनंद जरुर होगा लेकिन दुखी हुए बिना भी नहीं रहेंगे। आनंद इस बात से होगा कि … Read more

मन को कर तू शक्तिमय

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************************* ‘मन को कर तू शक्तिमय,ले हर मुश्किल जीत।काँटों पर गाना सदा,तू फूलों के गीत।’मनुष्य का जीवन चक्र अनेक प्रकार की विविधताओं से भरा होता है,जिसमें सुख-दु:ख, आशा-निराशा तथा जय-पराजय के अनेक रंग समाहित होते हैं। वास्तविक रूप में मनुष्य की हार और जीत उसके मन की मज़बूती पर आधारित होती … Read more

कवियों के कवि जनकवि ‘नागार्जुन’

डॉ. दयानंद तिवारीमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************ जनकवि नागार्जुन का असली नाम वैद्यनाथ मिश्र था,परंतु हिन्दी साहित्य में उन्होंने ‘नागार्जुन’ तथा मैथिली में ‘यात्री’ उपनाम से रचनाएँ कीं। काशी में रहते हुए उन्होंने ‘वैदेह’ उपनाम से भी कुछ कविता लिखी थीं। सन् १९३६ में सिंहल में ‘विद्यालंकार परिवेण’ में उन्होंने ‘नागार्जुन’ नाम ग्रहण किया। आरंभ में उनकी हिन्दी … Read more

बंगाल:मर्यादा क़ा ध्यान नहीं रखा

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* प. बंगाल के नंदीग्राम में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं। जो शुभेंदु कल तक ममता के सिपहसालार थे,वे आज भाजपा के महारथी हैं। ऐसा बंगाल के कई चुनाव-क्षेत्रों में हो रहा है। ममता की तृणमूल कांग्रेस से इतने नेता अपना दल बदलकर भाजपा में शामिल हो … Read more

खुद को जीत जाना ही आत्मसंयम

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)*************************************************** ‘आत्मसंयम’ का सहज और सरल अर्थ है अपने-आप पर,मन पर नियंत्रण। इसका शाब्दिक अर्थ जितना सरल प्रतीत होता है, वास्तविक जीवन में इसको प्रयोग में लाना और आत्मसात करना उतना ही कठिन है। इसकी महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण को गीता में इसके बारे … Read more

समानता,स्वतंत्रता और स्वछंदता में अंतर समझना अति आवश्यक

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** कुदरत ने यह सृष्टि नर और मादा से निर्मित की है,दोनों के अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक और बराबर हैं। नर-नारी दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। सबसे प्राचीन और विकसित सनातन संस्कृति तो इससे भी एक कदम आगे बढ़कर ‘यत्र नार्यास्तु पूज्यंते,रमंते तत्र देवता’ के सिद्धांत का प्रतिपादन करती है। … Read more

श्रेष्ठ अभिनेता रजनीकांत और फाल्के पुरस्कार की घोषणा का ‘संयोग’…!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** सवाल भारतीय फिल्म उद्योग और खासकर दक्षिण फिल्म उद्योग के चेहरे रजनीकांत को वर्ष २०१९ का प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार देने की घोषणा पर नहीं है,लेकिन उस ‘संयोग’पर जरूर है,जो आजकल राजनीति में बहुत ज्यादा ‘घटित’ हो रहा है। महानायक-कामयाब अभिनेता रजनीकांत की अपार लोकप्रियता,उनकी खास तरह की संवाद अदायगी और … Read more