आदर्श जीवन की मिसाल गांधी और शास्त्री जी

संदीप सृजनउज्जैन (मध्यप्रदेश) *************************************************** गांधी जयंती विशेष………….. महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री ऐसे दो महामानव जो भारत के भाग्य विधाता रहे,जिनकी विचारधारा एक-दूसरे की पूरक रही। जो देश के लिए जिए और देश के हित में ही काल के ग्रास बने। देश और समाज के प्रति दोनों की समर्पण भावना में किंचित मात्र भी संदेह … Read more

हिन्दी के विकास में गाँधी जी का योगदान

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)******************************************************** गांधी जयंती विशेष………….. अप्रतिहत स्वतंत्रतासेनानी,अतुलनीय देशभक्त,जन-जन के बापू राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का जन्म दिवस २ अक्टूबर को पड़ता है। बापू हमारी परम्परा के ऐसे विरले चिंतक हैं,जो प्रकाश के साथ-साथ अंधकार को भी दूर तक देखते थे। हमारे चिंतन में जो सर्वोच्च था,वह महात्मा गाँधी के रूप में शरीर … Read more

महानायक का मौन-मुखर व्यक्तित्व

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ********************************************************** बोलने को तो सभी बोलते हैं। नदी,नाले,समंदर,झरने भी बोलते हैं। पशु-पक्षी भी बोलते हैं। महसूस करें तो विनाश के पूर्व और बाद का सन्नाटा भी बोलता है,किन्तु ये सब सिर्फ बोलते हैं या सिर्फ चुप रहते हैं। इंसान ही ऐसा है जो बोलकर भी चुप रह सकता है और चुप … Read more

पं. उपाध्याय का भाषा चिंतन

प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामीदिल्ली *********************************************************** पं. दीनदयाल उपाध्याय भारतीय राजनीति में एक जाना-माना नाम है। उन्होंने अपना प्रारंभिक जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के रूप में शुरू किया था। बाद में संघ के संगठनकर्ता के रूप में काम करने लगे। १९५० में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ मिलकर एक राजनीतिक दल भारतीय जनसंघ … Read more

जीवन-गाड़ी के दो पहिए ‘नर-नारी’

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)******************************************************** नर-नारी का अनन्याश्रित संबंध हैl दोनों जन्म से भले अलग ईकाई हैं,पर विवाह से जीवन में मिलकर वे एक ईकाई बन जाते हैंl एक-दूसरे के बिना वे अधूरे हैं। कोई लड़की,लड़के के साथ मिल जाती है,तभी वह नारी कहलाती है। शादी के बाद ही यह होता है पर,शादी के … Read more

चीन से हमारे रिश्तों की पड़ताल:विश्लेषणात्मक अध्ययन

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) **************************************************** गलवन में हमारे २० बहादुर जवानों के बलिदान ने समूचे देश को गुस्से से भर दिया है। इस घटना से हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान को चोट पहुंची है। अब भारत,चीन के दुस्साहस का जवाब कैसे देता है,यह न केवल हमारे लिए महत्वपूर्ण होगा,बल्कि विश्व व्यवस्था पर भी अपना प्रभाव छोड़ेगा। मौजूदा … Read more

स्वभाषाओं के बिना शिक्षा नीति अधूरी

निर्मलकुमार पाटोदीइन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************************** नई शिक्षा नीति की अनेक विशेषताओं में से एक बड़ी विशेषता कौशल के आधार पर विद्यार्थी को आत्मनिर्भर बनाने की है। इसमें पाठ्यक्रम को कम रखते हुए अन्य गतिविधियों को जगह दी गई है। अब शिक्षा कोरी दिमाग़ी और किताबी न होकर जीवन का निर्माण करने के लक्ष्य को भी पूरा करेगी। १२६ … Read more

हिन्दी का घर बाँटने वाले सांसद

डॉ. अमरनाथ,कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)******************************************************* एक ओर जहाँ देश में ‘हिन्दी दिवस’ और ‘हिन्दी सप्ताह’ मनाया जा रहा था,तो दूसरी ओर हिन्दी दिवस के दिन ही लोकसभा में एक सांसद हिन्दी की जड़ में मट्ठा डाल रहे थे। माननीय जगदंबिका पाल खुद भी भोजपुरी क्षेत्र के नहीं हैं,लेकिन उन्होंने संसद में हिन्दी की एक बोली भोजपुरी … Read more

भारत को मिले निषेधाधिकार

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************************* संयुक्त राष्ट्र संघ के ७५ वें अधिवेशन के उद्घाटन पर दुनिया के कई नेताओं के भाषण हुए,लेकिन उन भाषणों में इन नेताओं ने अपने-अपने राष्ट्रीय स्वार्थों को परिपुष्ट किया,पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ ऐसे बुनियादी सवाल उठाए,जो विश्व राजनीति के वर्तमान नक्शे को ही बदल सकते हैं। उन्होंने सुरक्षा … Read more

हिंदी को शीर्ष पर प्रतिष्ठित करें,वह अधिकारिणी

डॉ. स्वयंभू शलभ रक्सौल (बिहार) ****************************************************** हिंदी केवल हमारी मातृभाषा नहीं,हमारी पहचान भी है। इस पर गर्व करना सीखें और नई पीढ़ी को भी गर्व करना सिखाएं। भारत विभिन्न भाषाओं का देश है और हर भाषा का अपना महत्व है,परन्तु जब देश की बात होती है तो देश में सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी ही … Read more