अग्रसर भारत का बचपन आर्थिक कारणों से घायल

ललित गर्ग दिल्ली************************************** देश की राजधानी दिल्ली में तमाम जांच एजेंसियों की नाक के नीचे नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त की मंडी चल रही थी। दिल्ली की ‘बच्चा मंडी’ के शर्मनाक एवं खौफनाक घटनाक्रम का पर्दाफाश होना, अमानवीयता एवं संवेदनहीनता की चरम पराकाष्ठा है, जिसने अनेक ज्वलंत सवालों को खड़ा किया है। आखिर मनुष्य क्यों बन … Read more

नकली दवाओं से बढ़ते खतरे, जतन करने होंगे भारत को

ललित गर्ग दिल्ली************************************** दवाओं में मिलावट एवं नकली दवाओं का व्यापार ऐसा कुत्सित एवं अमानवीय कृत है, जिससे मानव जीवन खतरे में है। विडम्बना है कि, दवा बनाने वाली कंपनियों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण का कोई नियम नहीं है और स्वयं ही गुणवत्ता का सत्यापन करती हैं। यह ठीक नहीं और ऐसे समय तो बिल्कुल … Read more

आखिर, कब तक!

डोली शाहहैलाकंदी (असम)************************************** महिलाओं की भागीदारी को ठंडी बस्ते में डालकर पुरुषों की भागीदारी पर लक्ष्मण रेखा आखिर क्यों नहीं !, यह सवाल हम सभी के आगे प्रश्न चिन्ह बना हुआ है। वैसे तो भिन्नता भारत के कतरे-कतरे में रक्त की तरह प्रवाह होती है। यहाँ न केवल प्राकृतिक भिन्नता, बल्कि धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक भिन्नताएं … Read more

बेरोजगार युवा नए भारत की ताकत कैसे होंगे ?

ललित गर्ग दिल्ली************************************** दुनिया की तीसरी आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर भारत में युवा- बेरोजगारी की दुखद तस्वीर चिन्तनीय है। भारत को युवा-शक्ति का देश कहा जाता है, युवाओं की संख्या, क्षमता और ऊर्जा को देश की ताकत के तौर पर पेश किया जाता है, बावजूद इसके अब अगर युवा बेरोजगारी की समस्या का … Read more

ईश्वरीय शक्तियाँ ही कल्याण का पथ

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************** ईश्वर ने जब पृथ्वी पर सब प्रकार के जलचर, नभचर एवं थलचर जीवों का निर्माण किया, तब सोचा कि किसी ऐसे जीव की सृष्टि करनी चाहिए, जो इन समस्त जीवों पर नियंत्रण रख सके। अतः उन्होंने अपनी असीम शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शक्तियों का समावेश कर अपने जैसे जीव का निर्माण किया … Read more

दायित्व और भूमिका पर पुनरावलोकन की आवश्यकता

डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** हिन्दी साहित्य अकादमियाँ… आपने देखा होगा कि, हिंदी-भाषी राज्यों में ही नहीं बल्कि लगभग सभी हिंदीतर भाषी राज्यों में भी हिंदी साहित्य अकादमी गठित की गई हैं, जबकि अन्य भाषाओं की अकादमी प्राय: उन राज्यों में हैं, जहाँ वे बोली जाती हैं।अगर हिंदी साहित्य अकादमियों का उद्देश्य हिंदी भाषा के साहित्य … Read more

कांग्रेस:गलत निर्णय और चापलूसी ही टूट का कारण

ललित गर्ग दिल्ली************************************** देश की सबसे पुरानी एवं मजबूत कांग्रेस पार्टी बिखर चुकी है। कद्दावर, निष्ठाशील एवं मजबूत जमीनी नेता दल छोड़कर अपनी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी पार्टी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो रहे हैं। वह भी तब, जब लोकसभा चुनाव सन्निकट है। यह दलबदल का जैसा सिलसिला चल रहा है, वह इस दल की … Read more

सतर्क रहें, मंगलमय बनाएं रंगपंचमी

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’इंदौर (मध्यप्रदेश )******************************************** हमने होली की भक्ति, उल्लास में २ बड़ी दुर्घटनाएं घटित होते देखी, एक विश्वविख्यात उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में और दूसरी इंदौर के जगप्रसिद्ध खजराना गणपति मंदिर के गर्भगृह में, जहां होली खेलते हुए रसायनयुक्त गुलाल उड़ाने से आग लगी, जिसमें पुजारी और भक्तों के झुलसने … Read more

जनता-आयोग करे चोंट

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** राजनीतिक क्षेत्र में अवसर और सेवा के लिए राजनेता कितने मर्यादाहीन एवं हल्के जो जाते हैं, यह बात ताजा बयानों से फिर जाहिर हुई है। देश के पुरातन दल कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भाजपा प्रत्याशी और अभिनेत्री कंगना रनौत पर जो टिप्पणी (मंडी में…) की, उससे कांग्रेस पर ही … Read more

दिलों की प्रेरक भावनाओं का पर्व ‘होली’

ललित गर्ग दिल्ली************************************** होली विशेष… होली एक ऐसा त्योहार है, जिसका धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक-आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। बदलती युग-सोच एवं जीवन-शैली से होली त्यौहार के रंग भले ही फीके पड़े हैं या स्वार्थ एवं संकीर्णता से होली की परम्परा में धुंधलका आया है। परिस्थितियों के थपेड़ों ने होली की खुशी को … Read more