कारगिल गाथा
मनोरमा जैन ‘पाखी’ भिंड(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* कारगिल विजय दिवस स्पर्धा विशेष………. कालचक्र बोल रहा हूँ। मैं समय चक्र हूँ,निरन्तर गतिमान। आज फिर किसी ने मुझे पकड़ने की कोशिश की,पर मैं समय हूँ,अपनी गति से चलता हुआ। अपने सीने में सैकड़ों राज दफ़न किये बढ़ा चला जा रहा हूँ।हजारों हार-जीत देख चुका हूँ,पर कदम नहीं हारे….अनवरत् मैं … Read more