सागर की गहराई,आँखों के प्यालों में
डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** महफ़िल मस्ती मय का दरिया है, सागर की गहराई,आँखों के प्यालों में। साकी,शबाब,शराब,शराबी सब डूबे हैं, सावन के कारे कजरारे घने बालों में। मनमोहन की मनमोहक बाँसुरी की सुन धुन, तज लज्जा,दौड़ी आईं गोपियां,जो थीं तालों में। धड़कने मचलने लगीं,रोम-रोम सुलगने लगा, देखा जो काली दीठ-सा तिल,उनके गालों में। खोई-खोई … Read more