सागर की गहराई,आँखों के प्यालों में

डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** महफ़िल मस्ती मय का दरिया है, सागर की गहराई,आँखों के प्यालों में। साकी,शबाब,शराब,शराबी सब डूबे हैं, सावन के कारे कजरारे घने बालों में। मनमोहन की मनमोहक बाँसुरी की सुन धुन, तज लज्जा,दौड़ी आईं गोपियां,जो थीं तालों में। धड़कने मचलने लगीं,रोम-रोम सुलगने लगा, देखा जो काली दीठ-सा तिल,उनके गालों में। खोई-खोई … Read more

आँचल का पहला फूल

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- माँ का आँचल और आँचल का पहला फूल नारी को सम्पूर्ण नारीत्व का भान कराता है। माँ बनना नारी की सम्पूर्णता है। मातृत्व का आभास ही तन,मन और जीवन में उल्लास की सृष्टि करता है। ये एक ऐसा अहसास है,जिस अहसास को महसूस करने के लिये एक माँ पूरा … Read more

बरसती फुहारें

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* सखी रे रिमझिम बरसती फुहारें, कान्हा आए,चल भीगें हम सारेl भली लगती बरसती फुहारें, तनमन में उल्लास जगाती, धरती की तृष्णा बुझाती, पत्ते-पत्ते पे फिसलती बूंदें डालियाँ झूम-झूम हैं गातीl सखी रे रिमझिम बरसती फुहारें, कान्हा आए,चल भीगें हम सारेl राधा रानी मुस्काती है इठलाती, छम-छम पायलियाँ हैं … Read more

देशहित के लिए अंर्तराष्ट्रीय कर्ज का बोझ

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) ************************************************************** भारत देश विकास और तकनीकी के क्षेत्र में विकासशील देशों के दायरे में आ गया है। आज मोदी की जय-जयकार के नारे भारत देश ही नहीं,विदेशों में मोदी का नाद गूंज रहा है,लेकिन विपक्ष में खलबली मची हुई है। वे मोदी के जयकारों की ध्वनि की गूंज को बर्दाश्त नहीं कर … Read more

पैसे और प्रमाण-पत्र

दीपक शर्मा जौनपुर(उत्तर प्रदेश) ************************************************* पैसे में बनते हैं चरित्र प्रमाण-पत्र, अधिकारी आपके चरित्र के बारे में जाँच नहीं करते उनके यहाँ चरित्र का एक निश्चित दाम होता हैl दस रुपये सामान्य चरित्र, बीस रुपये अच्छा चरित्र सौ रुपये उत्तम चरित्र सामान्य चरित्र के लिए, कुछ रिकार्ड भले ही देखें जाते हों पर उत्तम चरित्र … Read more

तुलसीदास के शब्दों में गुरु महिमा

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** गुरु पूर्णिमा १६ जुलाई विशेष………… भारतीय वांग्मय में गुरु को इस भौतिक संसार और परमात्म तत्व के बीच का सेतु कहा गया है। सनातन अवघारणा के अनुसार इस संसार में मनुष्य को जन्म भले ही माता-पिता देते हैं,लेकिन मनुष्य जीवन का सही अर्थ गुरु कृपा से ही प्राप्त होता है। … Read more

आओ हे गुरुवर

ममता बनर्जी मंजरी दुर्गापुर(पश्चिम बंगाल) ****************************************************************************** दोहा- आओ हे गुरुवर बसो,मन मंदिर में आज। बिन तेरे संसार में,बिगड़े सारे काज॥ रोला- बिगड़ै सारे काज,समझ में कछु नहिं आवै। मन में दु:ख संताप,सदा ही बढ़ता जावै॥ कहती ‘ममता’ नाथ,दया के हाथ बढ़ाओ। हर लो सब संताप,दया निधि गुरुवर आओ॥ कुंडलिनी- आओ हे गुरुवर बसो,मन मंदिर में आज। … Read more

कितने हो निर्लज्ज बताओ…

प्रियांशु तिवारी ‘सागर’ कटनी(मध्यप्रदेश) ****************************************************************** जब बंटवारा हुआ देश का,पूरा भारत रोया था, कुछ लोगों की नाकामी पर रात-रात न सोया थाl दिन का चैन-रात की नींदें छीन विदेशी चले गये, और हमारे भारत के नेता जी सारे छले गयेl चले गये अंग्रेज़ी लेकिन अपना भारत तोड़ गये, जाते-जाते इस भारत में धर्मवाद वो छोड़ … Read more

विशिष्ट साहित्यिक उपलब्धियों हेतु डॉ.छगनलाल गर्ग ‘विज्ञ’ सम्मानित

जयपुर(राजस्थान)। साहित्यिक संस्था ‘कलमकार मंच’ की सहभागिता में भव्या इंटरनेशनल और एन.आर.बी. फाउंडेशन की ओर से रविवार को सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय, जगतपुरा में इंडियन बेस्टीज अवार्ड-२०१९ आयोजित किया गया। इसमें साहित्यकार डॉ.छगनलाल गर्ग ‘विज्ञ’ को साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। इस समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में विशेष मुकाम … Read more

सत्ता सत्य है,राजनीति मिथ्या

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** कर्नाटक और गोवा में जो कुछ हो रहा है,उसने सारे देश को वेदांती बना दिया है। वेदांत की प्रसिद्ध उक्ति है-‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या’-याने “ब्रह्म ही सत्य है,यह जगत तो मिथ्या है।” दूसरे शब्दों में सत्ता ही सत्य है, राजनीति मिथ्या है। सत्ता ही ब्रह्म है,बाकी सब सपना है। राजनीति,विचारधारा,सिद्धांत, परम्परा,निष्ठा … Read more