समंदर कभी रोया नहीं करते

दिप्तेश तिवारी दिप रेवा (मध्यप्रदेश) **************************************************** काँटे हों हजारों मंजिलों की राह पर,यूँ घबराया नहीं करते, और पुरुष जो वीर होते हैं,यूँ मुश्किलों में हारा नही करते। न तेरे-न मेरे,यूँ वक्त तो नही किसी के हाथ में, जब मिले मौका तो लक्ष्य भेदो,यूँ मौके बार-बार नहीं मिलते।   कर्मयोगी कर्म से साधता है पर्वतों,चट्टानों को, हाथ … Read more

जनसंख्या वृद्धि ले जाएगी विनाश की कगार पर

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** विश्व जनसंख्या दिवस(११ जुलाई)विशेष…………. वर्तमान में विश्व की जनसंख्या साढ़े सात अरब के आँकड़े को पार कर चुकी है,और जिस रफ़्तार से जनसंख्या बढ़ रही है,वह आने वाले समय में पूरे विश्व में भयावह स्थिति का निर्माण करेगी। कारण कि जनसंख्या वृद्धि की रफ़्तार के सामने प्राकृतिक संसाधन पूरे विश्व … Read more

चातुर्मास है आत्मावलोकन पर्व

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** बिना कारण के कोई कार्य उत्पन्न नहीं होता,कोई भी कार्य निरर्थक नहीं होताl बहुत पहले समाज विखरित थाl उस समय आवागमन के साधन शून्य,कच्चे मार्ग,बैलगाड़ी,घोड़ों की सवारी ही मुख्य साधन होते थेl अधिकतर निवास गांव में होते थेl व्यापार शून्य,खेती- किसानी से निवृत्ति और आवागमन का साधन न होने से जीवन … Read more

….पर तुम कब आए

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* प्रतिपल आकुलता रहती है, प्रतिक्षण रहता हूँ मैं उन्मन। क्यों आघात किया आकर के, मम विरही हृदय में निर्मम। कितना पूछा द्रवित मन से,पर ना बताए, रोते-रोते रैना बीती,पर तुम कब आए॥ घुमड़-घुमड़ कर बदरा आकर, मुझे विरह-संगीत सुनाए। चातक सम मन हो पिपासित, पीहू-पीहू-गीत सुनाए। रिम-झिम,रिम-झिम नैना बरसे, मिलन … Read more

दौलत और मुहब्बत

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** किसी का दिल नहीं तौलो,कभी धन और दौलत में, नहीं औकात सिक्कों में…खरीदे दिल तिजारत में। नहीं बाज़ार में मिलता,…नहीं दिल खेत में उगता- समर्पण बीज जो बोता,…वही पाता मुहब्बत में॥ तराजू में नहीं तौलो,…किसी मासूम से दिल को, बड़े निश्छल बड़े कोमल,बड़े माशूक़ से दिल को। जरा-सी चोट … Read more

साँस है हिन्दी

प्रेमशंकर ‘नूरपुरिया’ मोहाली(पंजाब) **************************************************************************** हिन्दी धड़कन है साँस है हिन्दी, हिंदी तड़पन है अहसास है हिंदी। हिंदी माँ है हमारी और संस्कृति, जिसने पाला हमें,वह खास है हिंदी॥ भारतीय संस्कृति का निवास है हिंदी, परिधानों में भारतीयों का लिबास है हिंदी। हिंदुस्तानी भाषाई सुगंध फैल रही चारों ओर, हम सबमें अपनेपन का अहसास है हिंदी॥ … Read more

वादा

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** तुमसे कुछ कहना है… मौसम ने बहारों से, फूलों की वादियों से चाँद ने सितारों से और, सभी ने एक-दूसरे से वादा लिया है…। सुनो मैंने भी तुमसे वादा लिया है… संग तुम्हारे चलने का साथ तुम्हारा देने का, कभी ना दिल दुखाने का चोट ना पहुंचाने का वादा लिया है…। … Read more

ये वहम तुम्हारा अहम है

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** सिर्फ हम ही हम हैं, ये वहम तुम्हारा अहम है। आसमां में उड़ रहे हैं वो, जिनके लिए जमीं कम है। पिता सबसे अनमोल है जग में, बाहर से कठोर,अंदर से नरम है। तुम्हारे भाग्य का भागकर आएगा, मेहनत जी तोड़ करो,बाकी सब भरम है। अपना हर कदम मजबूती से … Read more

यही माँ

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ ‘माँ’ एक शब्द, धरती से धैर्यवान सहनशील उससे भी कहीं अधिक, लाड़-दुलार में किसी से तुलना नहीं, स्वंय कष्ट सहकर भी आँसू का घूंट पीकर भी, गीले बिस्तर पर सोकर भी आह तक करने न देती, माँ,जी हाँ ममता की मूर्ति माँ। उसकी क्षणिक आह पर स्वंय सिहर जाती, उसके … Read more

अहम रहा पैसा कभी नहीं

अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** जो आदमी शरीफ़ हो,देखा कभी नहीं। मेरे लिए अहम रहा पैसा कभी नहीं। जिसमें निरीह जीव की हत्या करे सभी, तू कर यकीन वह सफल धंधा कभी नहीं। नित धर्म के अलाव पे रोटी जो सेंकता, धंधा उसी का चल पड़े,मन्दा कभी नहीं। बस एक बात जान लें शादी … Read more