हमारे पिता

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** प्यार और दुलार, सुंदर मीठी बयार ऐसा पिता का प्यार, कैसे करूं उनका गुणगान…। अपनी इच्छाओं को, देकर कुर्बानी हमारी जिंदगी कर दी सुहानी, घर की वो है मजबूत छत होंठों पर रखते मुस्कान। कैसे करूं उनका… हर दर्द की दवा रहे, परिस्थितियों से लड़ते रहे हमको भी समझाते रहे, सही … Read more

हमारे गाँव

वाणी बरठाकुर ‘विभा’ तेजपुर(असम) ************************************************************* बार-बार लौट जाते हैं, हमारे गाँव की उन धूल-कीचड़ भरी राहों पर, गाय बछड़े बैलों के झुंड से धुँधले धूल भरी राहों पर, चलते युवाओं के कदम… दोनों किनारों पर, लहराते धान के खेत खेतों में चिड़ियों की किलकारी में मदहोश मन… बरामदे में बच्चों के जोर-शोर से पढ़ते हुए … Read more

वर्षा

अर्चना पाठक निरंतर अम्बिकापुर(छत्तीसगढ़) ***************************************************************************** लगे सुहानी वर्षा प्यारी। मंद पवन की ठंडक न्यारी॥ छोड़ घोंसला पंछी भागे। पेड़ों पर नव पल्लव जागे॥ कहे पपीहा मीठी वाणी। छुप-छुप किया करे मनमानी॥ शीतल मंद पवन मदमाती। रवि किरणें तन- मन को भाती॥ क्षितिज कोहरा नभ धुँधलाता। हरा-भरा तृण हृदय लुभाता! काँटों बीच पुष्प मुस्काता। भौंरा जीवन गाथा … Read more

पहली बार मिले थे…

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* जैसे पहली बार मिले थे,वैसे ही तुम मिला कराे, जैसे पुष्प बगिया में,वैसे ही तुम खिला कराे। हर आँसू मुस्कान बने,सुख-वैभव का विस्तार हाे, ढलना है ताे शबनम बनकर किसलय से तुम ढला कराेl मिट जाता जल-जलकर प्यार में पागल परवाना, स्नेह लिये दीपक-सा मन में,देे प्रकाश तुम … Read more

अनजान प्रियतम

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* सुनो चन्द्र वट, अनजान प्रियतम! मैं रहूँ ना रहूँ… मैं दिखूँ ना दिखूँ, अपनी साँसों में..यादों में..बातों में…, इन हवाओं में..फिज़ाओं में…घटाओं में… बारिश की बूंदों में…, पत्तियों की सरसराहट में… सुबह की पहली किरण में.., दोपहर की अलसाई धूप में… सुरम‍ई-सी शाम की पुरवाई में…, चाँद की चाँदनी रात में… … Read more

कर्म का नाम ही धर्म

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* एक देश है,इंसानों के मर्म एक हैं, तन,मन सब एक है,फिर क्यों तेरा धर्म अलग है। मानव है तू,तेरा कर्म ही धर्म है, न बाँटों प्रभु को,नाम पर प्रभु के, नाम अनेक पर भाव एक है भाव को समझो,कर्म का नाम ही धर्म है। धर्म पिता का पालन … Read more

घर बनाना बच्चों,मकान नहीं

काजल सिन्हा इन्दौर(मध्यप्रदेश) ************************************************************************* घर बनाना बच्चों,पर मकान नहीं, बारादरी इतनी लंबी ना बनाना कि हम हँसें तो तुम सुन ना सकोl घर बनाना बच्चों… दरो-दीवार इतनी सख्त ना बनाना, कि हमारे कहकहे दब जाएंl घर बनाना बच्चों… आँगन ऐसा बनाना कि साथ बैठ पाएं, हाथों में एक-दूसरे का हाथ रख पाएl घर बनाना बच्चों… … Read more

कृष्ण

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** वो सुंदर सलोना प्यारा श्याम है। ब्रज में रहता उसका ही धाम है। वो गोकुल की गलियां भी उसकी है, मोहन,राधे कृष्ण उसका ही नाम है। मोर मुकुट से सजा मुखड़ा और प्यारा। गोपियों के प्रेम में जग उसका सारा। आँखों में काजल सांवला रंग उसका, कान्हा की सुंदरता से जग … Read more

समाजसेवा

वन्दना पुणताम्बेकर इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************************************************* सारा हॉल लोगों से भरा हुआ था। संभ्रांत परिवारों की महिलाओं द्वारा सामाजिक उत्सव मनाया जा रहा था। पीछे किसी प्रतिष्ठित संस्था का बैनर लगा था। पूरे हॉल में रौनक बिखरी पड़ी थी। उच्च परिवार की कुछ महिलाएं पर जमकर नाच रही थी। चंदा देकर अधिकारी बने लोग आगे की … Read more

मौसम

तृप्ति तोमर  भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* तीन ऋतु से मिलकर बना मौसम, जिसमें होता सभी लहरों का संगम। इसमें है बहती हवा का मंजर, जिससे आनंदित होता है सारा शहर। कभी है सूखा पतझड़ तो कभी है सावन, कभी है पत्तों की झरझर तो कभी हवाओं की सनसन। चारों दिशाओं में फैली हवाओं की खुशबू, जिसमें … Read more