ऊर्जा और शक्ति का उपयोग सही दिशा में कीजिए

सत्यम सिंह बघेल लखनऊ (उत्तरप्रदेश) *********************************************************** संसार में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं,जिसकी प्राप्ति मनुष्य के लिए असम्भव हो। प्रयत्न और पुरुषार्थ से सभी कुछ पाया जा सकता है,किन्तु हम अपनी अधिकांश शक्ति तथा ऊर्जा को व्यर्थ की बातों और कामों में गवां देते हैं, जबकि हम अपनी ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग करके … Read more

ये तपती धरती..

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** गर्मी का वार हो रहा है, पारा पचास से भी पार हो रहा हैl लू के थपेड़े पड़ रहे, बढ़ रही गर्मी तप रही धरती भानु की आग से जल रही धरतीl पेड़-पौधों की कमी खल रही, तपती धरती से पेड़-पौधे भी जल रहेl बदलते मौसम की ये मार पड़ रही, … Read more

हमारा बजट

विनोद वर्मा आज़ाद देपालपुर (मध्य प्रदेश)  ************************************************ आम बजट की तैयारी थी शासन-प्रशासन स्तर पर गहमागहमी वाला माहौल था। आज का बजट कैसा होगा ? घाटे का या मुनाफे का,यह आमजनों के बीच चर्चा का विषय था। ठेले पर एक सब्जी विक्रेता सब्जी बेच रहा था,जो सुबह से शाम तक यही सुनता रहा कि आज बजट … Read more

इंसानियत है ही कहां ?

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** इंसानियत है ही कहां,जो शर्मसार हो, सचाई लुप्त होगी बिका कलमकार हो। आशा क्या करोगे लोकतंत्र से तुम सारे, जब चारों स्तम्भों में व्याप्त भ्रष्टाचार हो। घुटने सत्य ही टेक देगा एक दिन जहां, सत्य मेव ज्यते जैसी बेबस सरकार हो। यथार्थ मेरा झूठी गढ़ी कहानी बन … Read more

काश ऐसा हो!

अमल श्रीवास्तव  बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ********************************************************************* काश कालिमा मिट जाये,रवि-सा उजियारा छा जाये, भारत फिर आर्यावर्त बने,पथ सारे जग को दिखलाएl यों तो यह अपना देश कभी,धार्मिक तत्वों का वेत्ता था, दुष्कृत्यों को षडयंत्रों को,सत्कृत्यों से धो देता थाl पर इसमें पाप प्रविष्ट हुआ,वह ध्यान,धर्म, धीरज न रहा,दिन-रात वही,धन-धाम वही,पर सत्य,शील,संयम न रहाl इसलिए जलाओ ज्ञान दीप,अज्ञान … Read more

अलीगढ़ काण्ड अमानवीयता की चरमोत्कर्ष घटना

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** इस देश में जितनी गंगा- जमुनी तहज़ीब की प्रशंसा और दुहाई दी जाती है,और उसके विपरीत कृत्य होते हैं तो इसका क्या आशय हो सकता है ? एक क्षण की भूल जिंदगीभर के लिए गुनहगार बना देती है। कहते हैं कि रमजान का महीना बड़ा साक-पाक माना जाता है,जिस दौरान कोई … Read more

वह कौन है…

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** हवाओं की रवानगी थी, मेरी रफ़्तार भी कुछ तेज थी मौसम खराब का अंदेशा था, थोड़ा मन डरा हुआ था। हर कदम पर कोई पीछा कर रहा था, जैसे कदम रुकते वो भी थम-सा जाता था, कई बार ऐसा महसूस हुआ फिर मैं बोली कौन हो तुम ? सामने क्यो नहीं … Read more

ब़ुत बनाकर

डॉ.अमर ‘पंकज’ दिल्ली ******************************************************************************* (रचना शिल्प:२१२२ २१२२ २१२२) ब़ुत बनाकर रोज ही तुम तोड़ते हो, कर चुके जिसको दफ़न क्यों कोड़ते हो। अब बता दो कौन सी बाक़ी कसक है, आज फिर क्यों सर्द साँसें छोड़ते हो। ख़्वाब सबने तो सुहाने ही दिखाए, बन गई नासूर यादें फोड़ते हो। एक मन मंदिर बना लो उस … Read more

गाँव का जीवन

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** गाँवों का जीवन भला,होता सुखमय यार। घर-घर मीठे बोल है,पावन शुद्ध विचार॥ नहीं किसी से दुश्मनी,रहते मिल-जुल लोग। शुद्ध हवा का द्वार है, होते सभी निरोग॥ सुन्दर-सुन्दर घर यहाँ,लिपे-पुते दीवार। स्वर्ग यहाँ सिमटे मिले,छोटा-सा संसार॥ बाग-बगीचा वाटिका,वन-उपवन गुलजार। कोयल कुहके डाल हैं,मैना की झंकार॥ अमराई की छाँव में,मिलता … Read more

‘अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस’ पर बड़ी स्पर्धा,जीतने का खुला अवसर

इंदौर। लोकप्रिय और नियमितता से सक्रिय हिंदीभाषा डॉट कॉम (पोर्टल) से जुड़े सभी रचनाशिल्पियों(पंजीकृत सदस्य) और नवांकुरों के लिए भी अब चौथी(मासिक) स्पर्धा कराई जा रही है। ‘अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस’ विषय पर इस स्पर्धा के लिए अपनी मौलिक रचना १५ जून २०१९ तक ही भेजी जा सकती है। परिवार की प्रचार प्रमुख सुश्री नमिता दुबे … Read more