भारत-पाकःदोनों हुक्मरान से कुछ बेहतर की उम्मीद

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** इस्लामाबाद के भारतीय दूतावास में ऐसा क्या हो रहा था,जिसे नाकामयाब करने के लिए पाकिस्तानी फौज और गुप्तचर विभाग ने अपने जवानों को अड़ा दिया। वहां १ जून को और कुछ नहीं, बस एक इफ्तार पार्टी हो रही थी। न तो वहां कोई भारतीय स्वाधीनता का जलसा हो रहा था,न … Read more

चुनौतियों से घबराएँ नहीं, सफलता के लिए सतत बढ़ते रहें

सत्यम सिंह बघेल लखनऊ (उत्तरप्रदेश) *********************************************************** बहती हुई नदी को देखिये,ध्यान से देखें और चिंतन कीजिये। नदी बहुत तेजी के साथ अपने उदगम स्थल से बहना शुरू करती है। शुरुआत में बहुत छोटा रूप होता है,बिल्कुल छोटा-सा रूप। छोटी-सी धारा के साथ बहना शुरू करती है,जैसे-जैसे आगे बढ़ती है उसका रूप विस्तृत होता जाता है,वह … Read more

कोलकाता की वो पुरानी बस और डराने वाला टिकट….!

तारकेश कुमार ओझा खड़गपुर(प. बंगाल ) ********************************************************** कोलकाता की बसें लगभग अब भी वैसी ही हैं जैसी ९० के दशक के अंतिम दौर तक हुआ करती थी। फर्क सिर्फ इतना आया है कि पहले जगहों के नाम ले-लेकर चिल्लाते रहने वाले कंडक्टरों के हाथों में टिकटों के जो बंडल होते थे,वे साधारणत: २०,४० और ६० … Read more

वीर सिपाही की ललकार

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- भारत में पैदा होकर के मैं इसको नहीं लजाऊँगा, सौगन्ध मुझे है मिट्टी की,मैं खेल मौत से जाऊँगा। दे बलिदान देश भक्तों नें इसकी आन बचाई है, राणा प्रताप से वीरों ने रोटियाँ घास की खायी है। उन बलिदानी वीरों में मैं अपना नाम लिखाऊँगा, सौगन्ध मुझे है… दुश्मन … Read more

धरा की पीर…

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ सूखता नीर- कौन समझता है, धरा की पीर। कटते वन- धरती में दरारें, झुलसे तन। बने जंजाल- चारों तरफ उगे, कंक्रीट जाल। व्यर्थ न बहे- जल ही जीवन है, दुनिया कहे। सुन ले भाई- बढ़ता रेगिस्तान, प्यासा राही। परिचय-निर्मल कुमार जैन का साहित्यिक उपनाम ‘नीर’ है। आपकी जन्म … Read more

अजीब रहा वह सफर

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** वो अपने में ही सिमटते रहे, हम भी कुछ अनमने से रहे। बडा अजीब रहा वह सफर, वो खामोश,हम चुप ही रहे। नजरें तो गढ़ी रहीं दूर उनकी, कनखियों से तो पर तकते रहे। पल्लू तो सम्हाल रखा कसकर, अंगुलियां फिर भी मरोड़ते रहे। ठान ली ही थी,चुप रहने की, … Read more

क्या कसूर था…?

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** अलीगढ़ में मासूम बेटी की घटना पर आधारित……….. एक मासूम-सी वो कली थी, जिसको खिलने भी न दिया बेटी थी वो सबकी, उसको आगे बढ़ने भी न दिया। क्या कसूर था ! उस मासूम कली का, जो फूल भी न बन पाई उसको दरिंदों ने मसल दिया। नन्हें-नन्हें कदम दुनिया में … Read more

विशुद्ध राजनीति है अंग्रेजी को बढ़ाने की

डॉ.एम.एल.गुप्ता ‘आदित्य’  मुम्बई (महाराष्ट्र) ********************************************************** शिक्षा नीति २०१९ के प्रारुप पर भाषा को लेकर बवाल……. प्रश्न यह है कि अंग्रेजी समर्थक एक शक्तिशाली वर्ग जिसने संविधान सभा के निर्णय के पश्चात भी संविधान के अनुच्छेद ३४३ में इस प्रकार का प्रावधान करवाया कि संविधान लागू होने के १५ साल के बाद भी अंग्रेजी के प्रयोग … Read more

कर्म

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** कर्म कर बंदे तू कर्म कर, दिन-रात सुबह-शाम कर्म कर लाख आएं मुसीबतें पथ पर, खड़े रहो तुम कर्म रथ पर। कर्म कर बंदे तू कर्म कर… कर्म कर बंदे तू कर्म कर, असफलताओं से सीख कर बाधाओं से सदैव लड़ कर, बस आगे ही आगे बढ़ सुन्दर … Read more

तुम रुलाना नहीं

केवरा यदु ‘मीरा’  राजिम(छत्तीसगढ़) ******************************************************************* मीत हमको कभी तुम सताना नहीं, दूर जा कर हमें तुम रुलाना नहीं। जी न पायें सजन हम बिना आपके, जान कर तुम हमें आजमाना नहीं। जी रही हूँ तुझे देख कर साजना, तुम नहीं तो कहीं भी ठिकाना नहीं। तुम मुझे यूँ सदा ही हँसाया करो, हाँ कभी तुम … Read more