काश! मैं होता सांसद

हेमेन्द्र क्षीरसागर बालाघाट(मध्यप्रदेश) *************************************************************** काश! मैं होता सांसद,यह प्रश्न बार-बार मेरे जेहन में कौंध रहा है कि मुझे अब सांसद बनने जनता की अदालत में जाना चाहिए। इसलिए कि मेरे सांसद ने मुझे,क्षेत्र और मुल्क को धोखा देकर विकास व समृद्धि को रोका है। यहां तक कि झोली में आई सांसद निधी मुँह दिखाई के … Read more

सागर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** मैं सागर हूँ महार्णव अति गह्वरित, धरा के आँचल में समेटे स्वयं को या यों समझ माँ की आबरू को ढँक तीनों दिशा दुर्दांतकों से अनवरत, हूँ मैं तोयनिधि संरक्षक जलधि प्रकृति चराचर जगत् पालक, देव-दानव-मानव जलचर सभी हेतु हूँ जलज का व्योम का, वड़वानल और करुणार्द्र साथ … Read more

मेरा देश

  डॉ.स्नेह ठाकुर कनाडा ******************************************************************* मेरा देश आज दो नामों में बँट गया है, भारत और इण्डिया भारत पूर्वीय दैवीय गुणाच्छादित सभ्यता का प्रतीक, और इण्डिया पाश्चात्य सभ्यता काl भारत इण्डिया के भार से दबा जा रहा है, अधोपतन के गर्त में डुबाया जा रहा हैl भारत की सात्विक संस्कृति की छाती पर, इण्डिया की … Read more

फागुन

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’ पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़  ************************************************** फागुन आया मस्ती लाया,रंग गुलाल उड़ाये। बाग-बगीचा सुंदर दिखते,भौंरा गाना गाये॥ पीले-पीले सरसों फूले,खेतों में लहराये। सोने जैसे गेहूँ बाली,सबके मन को भाये॥ खुश होकर के नाचे गोरी,आँचल को लहराये। बाग-बगीचा सुंदर दिखते,भौंरा गाना गाये॥ ढोल-नगाड़ा बाज रहे हैं,फाग गीत सब गाये। बच्चे-बूढ़े सभी जनों ने,मिलकर शोर मचाये॥ … Read more

क्या यही माँ ??

सुषमा मलिक  रोहतक (हरियाणा) ************************************************************************************* पूछ रही हूँ मेरी माँ मैं तुझसे,बस तू ये मुझको बता दे, क्यो फेंका मुझे कूड़ेदान में,अब मुझको तू ये जता दे। नौ महीने तक रखा पेट में,फिर ऐसी क्या मजबूरी थी, नहीं चाहिए थी बेटी तुझको,तो पैदा करनी जरूरी थी। क्या तेरी कोख में पली नहीं,या मैं तेरे खून … Read more

श्रृंगार गीत का होता है

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** कंचन जैसे शब्दों का जब,सुख संयोजन होता है, मंगल भाव भरे हों जिसमें पुण्य प्रयोजन होता है। अंतस का नेह अगर हमको,नयनों में दिख जाए तो, और लेखनी अपनी पीड़ा,सहज सरल लिख जाए तो… ऐसे में फिर अंसुवन से,आभार गीत का होता है, ऐसे सफल प्रयासों से,श्रृंगार गीत का होता … Read more

पत्र को हस्ताक्षर-पते सहित प्रधानमंत्री को भेजने का अनुरोध

मुम्बई। भारत को इंडिया की अपेक्षा भारत नाम से ही पुकारे जाने के अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री को पत्र लिखने का बीड़ा उठाया गया है। खुद के हस्ताक्षर-पते सहित प्रधानमंत्री को ऐसे पत्र भेजने का अनुरोध किया गया है, ताकि भारत की प्रतिष्ठा कायम रहे। प्रति, नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री,भारत सरकार, नई दिल्ली, भारत विषय-भारत बने … Read more

पिंजड़ा

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) *************************************************************************************** पिंजड़ा स्वर्ण जड़ित दीवारों का बना खूब सजा खूब बड़ा। सोने की कटोरी, मदे की भरी। अफ़सोस हाय! सब फीकी लगे। चाहत है परिन्दे की, नील-गगन में उड़े पंछी के पंख, बेजान पड़े। कटुक निबौरी चाहे मिले, नीड़ भले ना मिले। जल सरोवर का भले, शाखाओं की टहनी पर झूला पड़े। … Read more

‘बिहार विहान’ कार्यक्रम में उपस्थित होंगे साहित्यकार डॉ.शलभ

रक्सौल(बिहार)। २५ मार्च सोमवार को दूरदर्शन बिहार(डीडी बिहार) के ‘बिहार विहान’ कार्यक्रम में शिक्षाविद् एवं समाजसेवी डॉ. स्वयंभू शलभ अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे। यह कार्यक्रम दूरदर्शन से सुबह ८ से ९ बजे तक जीवंत प्रसारित होगा।

गांधी जी के जीवन पर डाॅ.जोशी ने रचा महाकाव्य ‘महात्मायन’

उज्जैन(मध्यप्रदेश)। महात्मा गांधी के १५० वें जन्मशती वर्ष में उज्जैन के लेखक-सम्पादक शिक्षाविद् डाॅ. देवेन्द्र जोशी ने गांधी जी के समग्र व्यक्तित्व पर ‘महात्मायन’ शीर्षक से महाकाव्य की रचना की है। इसका लोकार्पण ४ अप्रैल को उज्जैन में होगा। लेखक डॉ.जोशी के अनुसार इस पुस्तक में गांधी जी के जीवन को २८ प्रसंगों के माध्यम … Read more