कुर्बानी

डॉ.लता अग्रवाल भोपाल(मध्यप्रदेश) *************************************************************** झुका है सिर आज, तुझको नमन के लिए। दी है जो कुर्बानी , तूने वतन के लिए। छलकी है आँख तना है सीना, तिरंगे में लिपटे बदन के लिए। लगा कर टीका, किया था विदा, दुश्मनों के शमन के लिए। थी जरूरी शहादत तेरी, चमन के लिए। मांगती है माँ भारती, … Read more

खुद पहचान बनाना है…

रश्मि चौधरी ‘रिशिमा’ इंदौर (मध्यप्रदेश) ********************************************************* सुबह-सुबह अख़बार में लड़ाकू विमान की महिला पायलट की तस्वीर देखकर मन प्रसन्न हो गया…। महिलाएँ कितनी आत्मविश्वासी और स्वावलंबी होती जा रही हैं…। आज महिलाओं द्वारा भी बड़े-बड़े कार्यों की जिम्मेदारी ली जा रही है। महिलाओं द्वारा सभी क्षेत्रों में कदम बढ़ाये गए हैं। पुरुषों के मुकाबले में … Read more

मैं नारी

डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** भोर की प्रथम किरण का कर स्पर्श, चलती रहती हूँ मैं। किरणों के बढ़ते कद तक, ढलते-ढलते किरण-पाख सिमट जाती तब चलती हूँ मैं। चंद्रकिरण के संग, मध्य रात्रि तक आते-आते जब चाँद भी लगता सिमटने, समेट कर अपने पाँव पेट में अपने ही, मैं भी थम जाती हूँ। कुछ … Read more

समर्थन

संजय वर्मा ‘दृष्टि’  मनावर(मध्यप्रदेश) ********************************************************************************** ‘विधवा’ शब्द कहना कठिन, उससे भी कठिन अँधेरी रात में श्रृंगार का त्याग, श्रृंगारित रूप का ‘विधवा’ में विलीन होना… जीवन की गाड़ी के पहिये में, एक का न होना चेहरे पर कोरी झूठी मुस्कान होना। घर-आँगन में पेड़ झड़ता सूखे पत्ते, ये भी साथ छोड़ते जीवनचक्र की भाँति, सुना … Read more

नारी हूँ मैं

नेहा लिम्बोदिया इंदौर(मध्यप्रदेश) ********************************************************** कई रूप हैं मेरे, कभी चंचल चाँदनी कभी गंभीर गहराई लिए हूँ। कभी शांत समुद्र-सी, लेकिन लिए हलचल बहुत हूँ। सृष्टि का आधार भी मैं हूँ, और इसको सँवारने वाली भी मैं हूँ। क्या बोलूँ ? क्या हूँ मैं…? बस एक नारी हूँ मैं…, बस एक नारी हूँ मैं…॥

सबला

अविनाश तिवारी ‘अवि’ अमोरा(छत्तीसगढ़) ************************************************************************ युगों-युगों से सहते आये नारी की व्यथा करुणा है, अबला नहीं अब सबला है,ये दुर्गा लक्ष्मी वरुणा है। द्रौपदी आज बीच सभा चीत्कार रही, कितनी सारी निर्भया खून के आँसू बहा रही। चीरहरण अब रोज होता कृष्ण नहीं अब आते हैं, छोटे-छोटे मासूम भी हवस की भेंट चढ़ जाते हैं। … Read more

धड़कन

वन्दना पुणताम्बेकर इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************************************************* नौ महीनों का दर्द सहकर एक नया अंकुर खिलाती, उस गुंजन के कलरव से वह खुशियों से वह झूम जाती। उस खुशी का एहसास क्या होता…, एक माँ से पूछो॥ ममता की छाँव में अपने नौनिलो को लोरी की तान सुनाकर, मन विभोर करती फिर उस सूनी गोद का दर्द … Read more

माँ से बढ़कर कोई नहीं

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’ पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़  ************************************************** माँ की ममता होती प्यारी,कोई जान न पाये। हर संकट से हमें बचाती,उसकी सभी दुआएँ॥ पल-पल नजरें रखती है वह,समझ नहीं हम पाते। टोंका टांकी करती है जब,हम क्यों गुस्सा जाते॥ भूखी-प्यासी रहकर भी माँ,हमको दूध पिलाती। सभी जिद वह पूरी करती,राह नई दिखलाती॥ सर्दी गर्मी बरसात में,हर … Read more

पिताजी

देवेन्द्र कुमार ध्रुव गरियाबंद(छत्तीसगढ़ ) ************************************************************************** मुझे लगता था वो मुझे डांटने-दबाने में लगे रहे, मैं गलत था,वो तो मुझे ऊपर उठाने में लगे रहे। उनके टोकने,और रोकने से मैं खीझ जाता, मगर मेरे पिता मुझे बेहतर बनाने में लगे रहे। मैं जिद में अड़ जाता,बड़ी हसरतें करता, वो चुपचाप मेरी जरूरतें जुटाने में लगे … Read more

स्त्री

डॉ.अभिषेक कुमार सदानंदपुर (बिहार) *************************************************************************** स्त्री, उपभोग के लिए बनी मांस पिंडों से सजी, पुरुषों की काम वेदना को शांत करने वाली, चलती-फिरती यंत्र भर नहीं। स्त्री, नवांकुरों की सृजनकर्ता पृथ्वी है। स्त्री जीवनदायिनी,ऊष्मा प्रदाता सूर्य है। स्त्री जीवन के लिए आवश्यक अमृत समान जल है। स्त्री, जिसके बिना जिंदगी की कल्पना नहीं, वो प्राणवायु … Read more