कौन देगा हिसाब ?

अजय जैन ‘विकल्प इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* फिर जल गई कई जिंदगी, कौन देगा हिसाब… बस ढोलेंगे जिम्मेदारी, कौन मानेगा अपनी गलती ? लील गई लापरवाही की आग, मौत से बचने कॆ लिए भी पाई मौत… कोई नहीं मानता,कोई नियम, फिर उजड़ गए फूलों कॆ कई बाग। क्या होगा ! बस खानापूर्ति, देखते रहे ‘सूरत’ में हादसा,लेकर … Read more

जीवन में माधुर्य लुटाये,वो कविता होती है

राजेश पुरोहित झालावाड़(राजस्थान) **************************************************** शब्दों का मधुर गुंजन कविता होती है, भावना की अभिव्यक्ति कविता होती है। छन्द मात्रा लय ताल सुर कविता होती है, जीवन में माधुर्य लुटाये वो कविता होती है। प्रकृति का अतुलित आनन्द कविता होती है, संघर्षों में विजय दिला दे वो कविता होती है। सत्पथ पर सबको चला दे वो … Read more

माँ

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’ बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** ममतामयी माँ तुझ पर जान न्योछावर है, एक झलक पाने के लिए नयन तरसे हैं। तू छोड़कर कहां चली गई माँ, तेरी यादों के सहारे हूँ। साँसें केवल चल रही माँ, शरीर निर्बल लिए बैठा हूँ। माँ चीखती-चिल्लाती है, काम करके बोझ उठाती है। पेट भरती,पानी पीती, फुटपाथ पर … Read more

बचपन सुहाना

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** बचपन था कितना सुहाना, गमों से था मैं तब अनजाना मानता था मैं पिता का कहना, पढ़ना खेलना और मौज मनाना। बचपन था कितना सुहाना… आता याद मुझे बचपन का जमाना, प्यारा था कितना गुरुजी का डांटना डांटना-पीटना और दुलार से समझाना, सफलताओं में उनसे पुरस्कार पाना। बचपन … Read more

मन

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** मन चंचल है तू इतना बेचैन क्यों है मन, किस और भटक रहा है मन… घूम रहा है सपनों के संसार में ए मन, लौट कर आजा उस दुनिया से इस दुनिया में। जहां निराशा है अंधकार है उस और चलें ए मन, जहां सूरज का प्रकाश हो हर तरफ हरियाली … Read more

हे भगवान,करो कल्याण

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** हे भगवान करो कल्याण, हम बच्चों को दे सदबुद्धि व ज्ञान। माता-पिता,बुजुर्ग को सुबह-सवेरे करें प्रणाम, ना करें हम ऐसा काम जिससे हो जाएं बदनाम। बढ़ते जाएं अपने पथ पर कभी ना टूटे ये अरमान, भाई-बहन के साथ रहे करते रहें हम अच्छे काम। ऐसी शक्ति हमें मिले जिससे हो सबका … Read more

रहें पाखंड से बचकर

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** एक थे पाखंडी पंडित,करते पूजा-पाठ थे, हरदम स्वार्थ सिद्धि में रहते आठों याम थे। अपना फायदा हरदम देखते, फायदे के सिवा बात नहीं करते। हरदम अपना दांव लगाते, रुपए खातिर दौड़ के आते। राहू-केतु का भय दिखाकर, लोगों को बहला फुसला कर। अपनी रोटी खूब कमाते, लोगों को मूर्ख रोज … Read more

तेरा वजूद

ऋतुराज धतरावदा इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* नहीं जानती है तू कहाँ तक फैला है तेरा वजूद, फूलों की खुशबूओं दिल तक छूते हर इक स्पर्श, गोधूली से नहाती साँझ चौके से उठती भीनी-सी लहर, धुँध में डूबी सुबह मस्ज़िद की पहली अज़ान मंदिरों की संध्या आरती, पहाड़ी नद के नाद चीड़ के जंगल में झाँकती किरण बूँदों … Read more

विकास की लहर

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) *************************************************************************************** राजनीति बदेलगी बदलेगा हिन्दुस्तान हमारा, सत्य का साम्राज्य होगा विश्व में हो भारत प्यारा। भष्टाचार का तिमिर हटेगा,चहुँओर हॊगा उजियारा, ईमानदारी की सरकार बनेगी,विकास का परचम लहराए। योगी की छाया,मोदी का साया,साथ सदगुरू का होगा, माया है आनी-जानी,सत्य का प्रकाश होगा। दुर्ग की रानी है चंचल चित्त में छाई उदासी है, … Read more

प्रासाद

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** यात्रा के दौरान देखे कई प्रासाद, कुछ प्रासाद अपनी कहानी कहता हुआ प्रतीत हुए, तो कुछ की दीवारों में कैद कितने राज लगेl प्रासाद के झरोखे से झाँकती हवा पुरवाई, अंदर दरवाजों में छुपा रहस्य, हर ईंट की अपनी बयानी काश बाँट ले कोई, उन सदियों की दबी कहानीl कभी … Read more