तू ही सृष्टि
सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* ‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ स्पर्धा विशेष………………… तू ही धरा,तू सर्वथा, तू बेटी है,तू ही आस्था। तू नारी है,मन की व्यथा, तू परम्परा,तू ही प्रथा। तुझसे ही तेरे तप से ही रहता सदा यहां अमन, तेरे ही प्रेमाश्रुओं की शक्ति करती वसु को चमन। तेरे सत्व की कथाओं को,करते यहाँ सब नमन, फिर … Read more