माँ

सुरेश चन्द्र सर्वहारा कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** घुट-घुटकर अब जी रही,बहा आँख का नीर, माँ तो निर्धन हो गई,बेटे हुए अमीर। बेटे की कोठी बनी,रखे किरायेदार, छप्पर में अब रह रही,बूढ़ी माँ लाचार। आज खड़ा वह पैर पर,आँके सबका दाम, चलना सीखा जो कभी,माँ की उँगली थाम। बच्चे घर से दूर तो,माँ को होती पीर, रूठे रह … Read more

जल ही जीवन है

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** जल जीवन का आधार है, जल कुदरत का श्रृंगार है। जल है तो हमारा कल है, जीवन में जरूरी जल है। बिन जल के नदिया बेकार, बहती नदियों में जल की धार। जल पर सबका अधिकार है, जल से सारा संसार है। जल आसमान से आता है, कभी सागर तक जाता … Read more

जिंदगी के रंग…

राजबाला शर्मा ‘दीप’ अजमेर(राजस्थान) ******************************************************************************************** कैसे-कैसे रंग दिखाती है जिंदगी, सपने मिटाती और सजाती है जिंदगी। हमने तो कसके के बांध के रखा था जेब में, रेत-सी हाथों से फिसल जाती है जिंदगी। हमको तो बद्दुआओं की आदत-सी हो गई, तेरी दुआएं हमको सताती है जिंदगी। एक जख्म भरा भी नहीं कि दूसरा मिला, क्या … Read more

शब्द

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** शब्द मौन है, शब्द ही हँसाते हैं, शब्द ही रुलाते हैं शब्द ही हमें बोलना सिखाते हैं। शब्दों से ही हम किसी के दुश्मन बनते हैं, शब्दों से ही हम किसी के मन में बनते हैं। शब्द ही तो है जो हमे गर्त में ले जाते हैं, शब्द ही हैं जो … Read more

नेता बनाम किसान

सुषमा मलिक  रोहतक (हरियाणा) ************************************************************************************* चुनावों का मौसम चल रहा है,वोटों की गर्मा-गर्मी है, किसान का हाल देखो,उसकी नस-नस में तना-तनी हैl नेता वोट बटोरने में हैं व्यस्त,जा रहे हैं ये जनता के द्वार, किसान को लपेटा आग ने,तो कभी पड़ी ओलों की मारl दिन-रात कुर्सी के लिए,ये सफेदपोश नेता भाग रहे हैं, फसल की … Read more

आइना

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* चेहरे की मलिनता को दिखाता है , हाँ! बिल्कुल सच-सच, बोलता है आइना। खुशी में खुश होता है, दु:ख में दुखित होता है आइना। नहीं छिपती है, कोई इसके आगे सच्चाई, झूठ को झूठ सच को सच, बयां करता है आइना। नहीं सीखा है, कभी गिरगिट की तरह रंग बदलना, और … Read more

पागल

अंतुलता वर्मा ‘अन्नू’  भोपाल (मध्यप्रदेश) ************************************************************ जब आप प्यार से ‘पागल’ बोलते हो न, कसम से बता नहीं सकती मेरे ये यहसास..! ऐसा लगता है जैसे, सीधे दिल में उतर गये तेरे ये अल्फ़ाज़..! दिल को छू लेता है, तेरा पागल बोलना…। तेरे लिए, मेरा पागल बन जाना कोई तो है, जो प्यार से कुछ … Read more

शब्द-ब्रह्म

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* शब्द जो मचाते हैं धूम, कभी शांत,कभी उन्मुक्त पनपते मस्तिष्क हृदय में, लुभाते जोड़ते बाँधते तोड़ते,फिर जोड़तेl निर्माण करते, बड़े अनोखे येे शब्द गूंजते सदियों से, धरती से क्षितिज तकl प्रेम में,स्नेह में,युद्ध में, गीता उपदेश में हर पल अनोखेl ये ब्रह्म शब्द नहीं बंधते, किसी परिभाषा में…ll … Read more

क्या होगा दुनिया छोड़कर

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** साक़ी अगर उदास हुआ,मयकश को आता देखकर, ख्याल-ए-जन्नत ख्वाब है,क्या होगा दुनिया छोड़कर। उनकी मुस्कराहट में छुपे राज का,कैसे पता चले, रोने का फरेब कर लेते हैं,जो आँखों को पोंछकर। तेरी गली में गुजारी जिंदगी,दिल का हाल बताने को, अब क्या पूछना चाह रहीं वो,मेरा जनाजा रोककर। खरीदने वाले की … Read more

आँगन की कली

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* एक कली आँगन में आई सम्मान-सत्कार मिला, खिली मुस्कराई सुवासित किया आँगन समाज व बाबुल का, गई ससुराल सुवासित करने कोl ससुराल के अहम आकांक्षाओं, लालच व संकीर्णता के प्रदूषित झँझावत आये, सम्भालना चाहा न सम्भले अंतर्वेदना कभी किसी से न कही स्वयं में घुलती रही, मिटी,चली गयी… अपना आशियाना … Read more