जवानी

अमल श्रीवास्तव  बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ********************************************************************* बहुत कुछ कर गुजरने को,मचलती भावनाएं जब, नहीं अन्याय सह पाती,रगों में वह रवानी है। न केवल उम्र से ही वास्ता होता है सब उसका, जवानी जगमगाती ज्योति की उज्ज्वल निशानी है॥ देश के दुश्मनों का जो,कलेजा चीर कर रख दे, लगाए जख्म में मरहम,हृदय की पीर जो हर ले। अनीति … Read more

हड़ताल और बीमार बेटा

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** मन अनहोनी की शंका से, थर-थर-थर-थर कांप रहा है आधी रात हुई है बेटा, पल-पल देखो हाँफ रहा है। अस्पताल जाना है लेकिन, हड़ताल अभी तक जारी है लोगों की यह मारा-मारी, इसके जीवन पर भारी है। बंद रहेगी सड़क अगर तो, कैसे होगा काम बताएं अगर इलाज नहीं … Read more

चलो कुछ दूर यूँ ही साथ-साथ

डॉ.किशोर जॉन इंदौर(मध्यप्रदेश) ************************************************************** चलो कुछ दूर यूँ ही साथ-साथ, ज़िन्दगी का साथ हो मुमकिन नहीं रोज़ मुलाक़ात हो मुनासिब भी नहीं, कुछ यू ही हो अफ़सानी बातें कुछ हँसी-कुछ मुस्कुराहटें। कुछ पुरानी,कुछ नई बातें, बस चलना है साथ-साथ किसी का साथ अच्छा लगता है, एक सुकून ठण्डा-सा एहसास पहली बरसात की बूंदों-सा, सुबह फूलों … Read more

खत मेरे इजहार के

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ********************************************************************* नाच नाचा जब नचाया,गीत गाये प्यार के चीर के दिल जख्म दिखाये,इश्क की मार के, कोई तो होगा जतन,जो करूं मैं आखिरी कम नहीं होते दिख रहे,नखरे मेरे यार के। इनकार,इसरार,इकरार,सब मंजूर किया मर्जी हर बात में उनकी,मैंने क्या कसूर किया, गुनाह था ही नहीं,बरी किया काजी ने मुझे पर … Read more

आजा मैया मेरे द्वार

मालती मिश्रा ‘मयंती’ दिल्ली ******************************************************************** मन मेरा माँ रहा पुकार, आजा मैया मेरे द्वार। दुर्भावों का कर संहार, भर दे मैैैया ज्ञान अपारll अँखियाँ तुझको रहीं निहार, चाहूँ दर्शन बारम्बारl मुझ पर कर मैया उपकार, सदा करूँ तेरा सत्कारll कभी न छूटे तेरी आस, तुझमें अटल रहे विश्वास। मन मेरा तेरा आवास, बस तेरी ममता … Read more

आज का मानव

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ आज का मानव अपने स्वार्थों में इतना फंस चुका है, अपना करके हिंसा आगे बढ़ रहा हैl दिखता नहीं कुछ निःशेष है अपनी इच्छाओं की पूर्ति, रहें स्थिर संतुलन प्राणी जगत अथवा मानवीय संस्कृति का, उसको चाहिए मात्र अपनी इच्छाओं की पूर्ति। जिसके लिए उसने अपने इष्ट मित्रों बन्धु-बान्धवों तक … Read more

दोस्त

रितिका सेंगर  इंदौर (मध्यप्रदेश) ****************************************************** एक तूफान आया, और टूट गया मेरा..आ..शियाना… भीड़ रिश्तेदारों की, मेरे साथ बहा रही थी आँ..सू, मेरी आँखें तलाश रही थी दोस्त को मेरे, खबर नहीं थी मुझेl वो तिनके चुन रहा था, मेरा आशियाना बनाने के लिएll

आह्वान

क्षितिज जैन जयपुर(राजस्थान) ********************************************************** भय के भयानकतम के मध्य साहस का दीपक जलाओ तुम, विनाश की घुटन में हो निर्भय निर्माण के गीत अब गाओ तुम। जो बन गए युगों-युगों से भीरू उनको वीर आल्हे सुनाओ रे! दुर्दान्त शत्रुओं के समक्ष तुम, अपना शौर्य और बल दिखाओ रेl जहाँ फैली कल दावानल भयानक आज प्रकृति … Read more

तेरा जाना

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* था यकीं तुमको कि हम तुमको भूल जाएँगे, हमको ये उम्मीद थी कि हम तुमको याद आएँगे…। सिलसिला कुछ यूँ हुआ कि बसर ज़िंदगी होती रही, जो फासला है दरमियाँ वो… कभी हम तय नहीं कर पाएँगे। गर सामना कभी हो गया तो सितम का सबब हम पूछेंगे, कह देगें सब … Read more

जनचेतना

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* राजनीति, हर घर की दहलीज़ पर दस्तक देने लगी है, प्रचार की चहल-पहल गाँव-गाँव और, शहर-शहर में होने लगी है। बढ़ा-चढ़ा कर, भाषणों की ज़ुमलेबाजी भोली-भाली जनता, कुछ-कुछ समझने लगी है, अब नहीं आएगी बहकावे में यारों, वह सीधे तु्म्हारे फेंके गए वादों से आँखें मिलाने लगी है। अब तक ठगते … Read more